Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

वैश्विक पर्यावरण

तूफानी तबाही से बचा सकते हैं, पेड़

हाल के वर्षों में समुद्री तूफानों ने हमारे तटीय राज्यों में भारी तबाही मचाई है। इन्हीं दिनों पश्चिमी तट के केरल, महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात राज्य तूफान ‘वायु’ से उलझ रहे हैं। जलवायु परिवर्तन की मार से उपजे इन विचित्र…

प्रकृति के प्रति लापरवाही का नतीजा

मुकुट यानि क्राउन के आकार के कोरोना वायरस ने अपनी बीमारी कोविड-19 की मार्फत समूची दुनिया को हलाकान कर दिया है। इसकी उत्‍पत्ति की कई वजहें गिनाई जा रही हैं, लेकिन उन सबका जोड आधुनिक विकास के लिए प्रकृति से…

मध्यप्रदेश में जलाधिकार कानून: कितना सार्थक

मध्यप्रदेश की मौजूदा सरकार ने अपने घोषणा-पत्र के मुताबिक ‘मध्यप्रदेश जल का अधिकार (संरक्षण और निरंतर उपयोग) अधिनियम-2020’ क्रियान्वित करने का तय किया है, लेकिन क्या यह कानून राज्य के आम लोगों की पानी की जरूरतों को पूरा करने में…

आज भी बरकरार हैं, देवताओं के ‘पवित्र-वन’

वन और वन्य-प्राणियों के संरक्षण-संवर्धन में लगी कथित ‘वैज्ञानिक वानिकी’ के हल्ले में हम अपनी उन परम्पराओं को भूलते जा रहे हैं जिनकी बदौलत हमारे पास आज भी वन और वन्यप्राणी सम्पदा बची हुई है। भारी-भरकम किताबी ज्ञान की टक्कर…

जीवन के बचाव के लिए ‘धरती रक्षा दशक’

पर्यावरण के संकट, जल-जंगल-जमीन के बाद अब मानवीय जीवन को अपनी गिरफ्त में लेने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में ‘धरती रक्षा दशक’ जैसे आपातकालीन उपायों के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। जनवरी 2020 की पहली…

कैसे जलते हैं, दुनिया के फेफड़े

दुनियाभर को प्राणवायु यानि ऑक्सीजन मुहैय्या करवाने वाले अमेजान के जंगलों में लगी आग इन दिनों सर्वत्र चर्चा और चिंता का विषय बनी हुई है। अमीर देशों के ‘ग्रुप-7’ और ‘ग्रुप-20’ जैसे वैश्विक मंचों तक को हलाकान करने वाली इस…

बिजली का बेहतर विकल्प हो सकती है, अक्षय ऊर्जा

नीलेश दुबे  ऊर्जा की खपत से विकास को मापने के इस दौर में ऊर्जा उत्पादन के तरीकों पर गहराई से विचार करने की जरूरत है। क्या हम व्यापक विस्थापन, भारी पर्यावरण विनाश और असीमित आर्थिक बदहाली की कीमत पर पारम्परिक…

कमी पानी की नहीं, उसे वापरने की तरकीब की है

22 मार्च – विश्‍व जल दिवस पर‍ विशेष पानी की कमी ने अब दो बातों पर ऊंगली रखी है-एक, क्या पानी का टोटा सचमुच ऐसा है जिससे निपटने के लिए ‘तीसरा विश्वयुद्ध’ छेड़ना पडे ? और दूसरे, क्या उस ‘अपराधी’…

बढ़ते हवाई यातायात से बिगड़ता पर्यावरण

एक जमाने में अमीरों के मंहगे परिवहन का सुविधाजनक साधन माना जाने वाला हवाई यातायात अब अनेक शहरों, व्यक्तियों के लिए आम बात हो गया है। जाहिर है, बडे़ पैमाने पर बढ़ते-फैलते हवाई परिवहन ने उसी दर्जे की पर्यावरणीय समस्याएं…

अमेरिका के बिना कैसे काबू होगा, जलवायु परिवर्तन ?

दुनियाभर के बाजारों और उनकी मार्फत वैश्विक राजनीति को प्रभावित करने वाले ‘ग्रूप-20’ के देश भी अब जलवायु परिवर्तन के प्रलयंकारी प्रभावों की चपेट में आते जा रहे हैं, लेकिन उनका सरगना अमेरीका अपने मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जिद…