वैश्विक पर्यावरण

बजट में पर्यावरण

आधुनिक ‘विकास’ और पर्यावरण एक-दूसरे के जानी दुश्मन माने जाते हैं और इस अखाडे में सरकारें विकास की तरफदार। ऐसे में पर्यावण सुधार के लिए बजट प्रावधान सुखद माने जा सकते हैं। कोराना काल के बाद केंद्र सरकार ने एक…

अब भी बचाई जा सकती है – धरती

हर साल बाढ, सूखा, आंधी, गर्मी, बर्फवारी और तूफानों जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बढने का एक मतलब यह भी है कि हमने एक वैश्विक समाज की हैसियत से धरती पर रहना अब तक नहीं सीखा है। एक तरफ, हमारे कार्य-कलाप…

कोराना का कहर बढ़ाते सर्दी और प्रदूषण

जैसा कि कहा गया था, कडकती सर्दी और तेजी से फैलता वायु-प्रदूषण कोरोना वायरस को खुलकर खेलने का मौका दे रहे हैं। अब कोरोना से पनपे कोविड-19 के संक्रमण के दूसरे दौर की चर्चाएं होने लगी हैं। जाहिर है, सर्वशक्तिमान…

ऊर्जा-क्षेत्र में सौर ऊर्जा की दावेदारी

हाल में कोराना महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रदूषण और उसके नतीजे में होने वाले जलवायु परिवर्तन की बडी वजह ऊर्जा संयत्र हैं। वैसे भी दुनियाभर में बिजली उत्‍पादन के…

शिप्रा से गंगा तक पवित्र जल आचमन योग्य भी नहीं

कहा जा रहा है कि गंगा के पानी में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। सवाल यह है कि अरबों रुपये खर्च होने के बाद भी गंगा का पानी पीने लायक क्यों नहीं है ? चाहे उत्तर प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री को…

क्या पूर्व-निर्धारित है, पृथ्वी की मृत्यु?

भारतीय उप-महाद्वीप की ज्ञान-परंपराओं में किसी भी जीवधारी की जीवन-मृत्‍यु पूर्व निर्धारित मानी जाती हैं, लेकिन अब आधुनिक विज्ञान भी इसे मानने लगा है। ताजा शोधों ने उजागर किया है कि प्रकृति में बेजा मानवीय हस्‍तक्षेप के चलते यह पूर्व-निर्धारित…

भोपाल गैस त्रासदी : अब तक भी राज्य और केन्द्र सरकार ने गैस कांड के नतीजों-प्रभावों का समग्र आकलन नहीं किया

3 दिसंबर : भोपाल गैस कांड की 36 वीं बरसी दुनियाभर में सर्वाधिक भीषण मानी जाने वाली औद्योगिक त्रासदी को 36 साल हो गए है। इस त्रासदी में मारे गए हजारों निरपराधों, अब तक उसके प्रभावों को भुगत रहे लाखों…

प्रकृति के ‘संरक्षक’ नहीं, उसके ‘अंश’ हैं, हम !

भोपाल गैस कांड’ : 36 वां साल ‘भोपाल गैस कांड’ का यह 36 वां साल है, लेकिन लगता नहीं कि हम उससे कुछ जरूरी सीख ले पाए हैं। मसलन – अब भी तरह-तरह के नारे, नियम-कानून और मुहीमें पर्यावरण-प्रकृति के…

कोविड में कितनी साफ रहीं, गंगा?

आंकडे बताते हैं कि कोविड-19 महामारी के दौर में लगे लॉकडाउन में गंगा और यमुना सरीखी उसकी सहायक नदियां निर्मल हो गई थीं। इस भुलावे में रहकर कि महामारी के चलते गंगा साफ हो जायेगी, यह सवाल नागरिकों के जिन्दा…

नर्मदा रेत खनन : जनता के साथ जलवायु का कबाड़ा

इमारतों के निर्माण में रेत यानि सिलिका बहुत अहम भूमिका निभाती है, लेकिन क्‍या ‘जीडीपी’ में सर्वाधिक योगदान करने वाली इस गतिविधि को आम लोगों और उनके साथ पर्यावरण को उजाडने की छूट दी जा सकती है? इन दिनों मध्‍यप्रदेश,…