कैसे करें पर्यावरण की परवाह
‘विश्व पर्यावरण दिवस’ (5 जून) पर विशेष हर साल पर्यावरण दिवस के बहाने हम लगातार बदहाल होते अपने परिवेश का लेखा-जोखा तो कर लेते हैं, लेकिन उसे लेकर गंभीरता से कोई पहल नहीं करते। क्या हमारा यह व्यवहार प्रकृति, पर्यावरण और…
महासंकट : पानी पर परामर्श
हर साल की तरह अब फिर पानी पर परामर्श का मौसम शुरु हो गया है और हमेशा की तरह हम फिर पानी बचाने, संवारने, संरक्षित करने की तमाम-ओ-तमाम नेक सलाहों को ‘दूसरे कान’ से निकालने के लिए तैयार भी हो…
पर्यावरण : प्रकृति को पछाड़ता प्लास्टिक
प्लास्टिक को बनाया तो इंसान ने ही है, लेकिन अब वही प्लास्टिक, भस्मासुर की तरह इंसान और उसके प्राकृतिक पर्यावास पर संकट बनकर खडा हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन ‘वर्ल्ड वाइड फंड’ (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार 2030…
नववर्ष 2022 : नाना प्रकार के नए साल
विश्वभर के विभिन्न देशों, समाजों में नववर्ष मनाने की अपनी-अपनी भिन्न-भिन्न परम्पराएं हैं। साल के समाप्त होने और नए साल के शुरु होने के उत्सव कैसे मनाए जाते हैं? प्रस्तुत है विभिन्न देशों में नववर्ष मनाने की झलकियां। विश्व में…
प्रकृति : समुद्री सम्पदा की समाप्ति में लगी जेलीफिश
प्रकृति के साथ इंसानी रिश्तों की बदहाली आए दिन हमें भीषण प्राकृतिक आपदाओं के रूप में भोगना पडती हैं, लेकिन इंसान इसे कभी सुधारने की कोशिश नहीं करता। करोडों साल के इतिहास में प्रकृति खुद अपने को बार-बार समाप्त और…
हिन्दी से हटती नई पीढ़ी
14 सितंबर : हिंदी दिवस पर विशेष हिन्दी एक भाषा ही नहीं, भरी-पूरी संस्कृति है और इसलिए उसे सीखना केवल भाषा-ज्ञान भर नहीं है। बदलाव की अनिवार्यता के चलते जब रहन-सहन, खान-पान, रीति-रिवाज आदि सभी बदलते जा रहे हैं तो…
पर्यावरण : घर के भीतर प्रदूषण
हाल के अध्ययन बता रहे हैं कि वायु-प्रदूषण अब घर, स्कूल और तरह-तरह के कमरों के भीतर तक पहुंच गया है और इससे बचना है तो हमें तेजी से कुछ उपाय करना होंगे। एक ताजा अध्ययन में पता चला है…
वैश्विक पर्यावरण : जलवायु परिवर्तन से बढ़ेंगे चक्रवात
विडंबना है कि मानव सभ्यता की समाप्ति का संकट खुद मानव-निर्मित हो गया है। मसलन – लगातार बढ़ते चक्रवात, वायुमंडल और समुद्र के बढ़ते तापक्रम की वजह से पैदा हो रहे हैं और तापक्रम बढ़ने की वजह रोजमर्रा की मानवीय…
मानवीय क्रियाकलापों से बढ़ी बाढ़ की तीव्रता और विध्वंसता
बाढ़ आना एक सामान्य प्राकृतिक आपदा है किन्तु प्रकृति के विरुद्ध किए जा रहे मानवीय क्रियाकलापों के कारण बाढ़ की तीव्रता, परिमाण और विध्वंसता अत्यधिक बढ़ गई है। यदि हम प्रकृति के साथ ताल मेल बैठाकर चले तो बाढ़ ही…
पर्यावरण के संरक्षक हैं आदिवासी
9 अगस्त : विश्व आदिवासी दिवस जल, जंगल और जमीन को परंपराओं में भगवान का दर्जा देने वाले आदिवासी बिना किसी आडंबर के जंगलों और स्वयं के अस्तित्व को बचाने के लिए आज भी निरंतर प्रयासरत है। यह समुदाय परंपराओं…









