Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

सुदर्शन सोलंकी

बाघ : ‘उनका अस्तित्व हमारे हाथ में है’

जंगलों के विनाश से बाघों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है और यह प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर है। इसलिए बाघों के संरक्षण के प्रति जागरूकता हेतु ‘विश्व बाघ दिवस’ मनाया जाता है। वर्ष 2010 में रूस के…

वैश्विक तापमान में वृद्धि : आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं 10 प्रतिशत तक बढ़ेगी

नासा के आधिकारिक आकंड़ों के अनुसार वेनेज़ुएला की झील मैराकाइबो का नाम सबसे ज़्यादा बिजली चमकने वाले स्थान के तौर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है। यहां प्रत्येक साल प्रत्येक किलोमीटर पर 250 बार बिजली चमकती है।…

पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं, सैनिटरी पैड्स

गंदे,‘अन-हाइजिनिक’,अस्वास्थ्यकर पुराने कपड़ों,पत्तों आदि से पीढियों से निपटाए जाते मासिक-धर्म को पिछले कुछ सालों से सैनिटरी पैड्स की स्वच्छता नसीब हुई थी, लेकिन दिन-दूनी, रात-चौगुनी आकार में बढ़ता इनका उपयोग कोई और संकट तो खड़ा नहीं कर रहा? एक तरफ…

हीरे की हवस में कटते बुंदेलखंड के जंगल

पिछले कुछ सालों से लगातार सूखे की मार झेलते बुंदेलखंड में अब पानी देने वाले जंगलों पर खतरा मंडराने लगा है। यह खतरा समाज के बेहद छोटे, ऊपरी अमीर तबके की हीरे की हवस के रूप में आया है। कहा…

22 मई : जैव विविधता संरक्षण

विश्व जैव विविधता दिवस या विश्व जैव विविधता संरक्षण दिवस 22 मई को मनाया जाता है। इसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने प्रारंभ किया था। सन् 2010 को जैव विविधता का अंतरराष्ट्रीय वर्ष घोषित किया गया था। “जैव विविधता एक प्राकृतिक…

कोराना काल में प्राणवायु के लिए पेड़

कोविड-19 महामारी के इस दौर में जिस अदृश्‍य, अ-स्पर्शनीय, गंधहीन और केवल महसूस की जाने वाली प्राणवायु यानि ऑक्सीजन की शिद्दत से जरूरत महसूस की जा रही है, वह अपने आसपास की वनस्पतियों, पेडों में भरपूर मौजूद है। लेकिन क्या…

डॉ. भीमराव अंबेडकर- बहुजनों के मसीहा

14 अप्रैल – डॉ. भीमराव अंबेडकर की130वीं जयंती पर विशेष स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा, बौद्ध धर्म, विज्ञानवाद, मानवतावाद, सत्य, अहिंसा आदि के विषय अम्बेडकरवाद के सिद्धान्त हैं। दलितों में सामाजिक सुधार, भारत में बौद्ध धर्म का प्रचार एवं प्रचार, भारतीय संविधान…

भोजन में बढ़ता रासायनिक जहर

तेजी से फैलती कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों ने हमारी भोजन उत्पादन की पद्धति पर तीखे सवाल खडे कर दिए हैं। हम जिसे भोजन मानकर खा रहे हैं क्या वह सचमुच जहर-मुक्त, पौष्टिक और इंसानी शरीर के लिए सर्वथा उपयुक्त है?…

वायु प्रदूषण से बर्बाद होती जिन्दगी

वायु-प्रदूषण मानवीय जीवन और स्वास्थ्य के लिए दिनों-दिन खतरनाक होता जा रहा है। तरह-तरह के अध्‍ययन बताते हैं कि प्रदूषित हवा ने दूसरी अनेक बीमारियों के मुकाबले अधिक जिन्दगिया ली हैं। केंद्र सरकार की संस्था ‘इंडियन कॉउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ (आईसीएमआर)…