Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

Month: October 2024

सोनम वांगचुक के सत्याग्रह को मिला गांधीवादी संस्थाओं का समर्थन, लद्दाख के संरक्षण की अपील

नईदिल्‍ली, 8 अक्‍टूबर । सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत राज्य का दर्जा देने और पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाए जा रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत राज्य का…

नक्सलवाद : हिंसा का जवाब हिंसा नहीं, क्या हो असली समाधान?

छत्तीसगढ की लाचारी, बेकारी और बीमारी नक्‍सलवाद को जन्म दे रही है। नक्सलवाद और बागीपन हिंसा है, लेकिन हिंसा को हिंसा से ठीक कभी नहीं किया जा सकता। हिंसा को स्नेह से सम्मान देकर बदला जा सकता है; इसलिए राज-समाज…

Sonam Wangchuk : लद्दाख से उठी हिमालय की आवाज

महात्मा गांधी के जन्मदिन के ठीक एक दिन पहले हजार किलोमीटर की पद और यदा-कदा वाहन यात्रा करके अपनी बात कहने आए कुल-जमा डेढ़ सौ लद्दाखियों को देश की राजधानी की सीमा पर रोकने की आखिर क्या वजह हो सकती…

‘महात्मा गांधी की दृष्टि, राधाकृष्ण का उद्यम’ पुस्तक का लोकार्पण 7 अक्‍टूबर को

पुस्तक प्रख्यात गांधीवादी विचारक के.एस. राधाकृष्ण के जीवन को समर्पित नई दिल्ली। प्रख्यात गांधीवादी विचारक व महात्मा गांधी के अनुयायी के.एस. राधाकृष्ण के जीवन को समर्पित ‘महात्मा गांधी की दृष्टि, राधाकृष्ण का उद्यम ‌: जीवन, विचार व कार्य’ पुस्तक का…

जातिवाद के विरोधी और धर्म निरपेक्षता के सबसे बड़े हामी थे गाँधी

इंदौर। गाँधी एक ऐसे कालजयी व्यक्तितव का नाम है जिसने भारत की हज़ारों वर्ष पुरानी संस्कृति का न केवल साक्षात्कर किया, उसकी तुलना में दुनियाभर के बाकी महापुरुष बोने साबित होते हैं। स्त्री- पुरुष के भेद को सबसे पहले खत्म…

गांधी का ‘डांडी मार्च‘ ‘डंडा मार्च’ में बदल दिया गया है !

प्रसंग : गांधी जयंती अलग-अलग दलों और धड़ों में बँटा देश का राजनीतिक नेतृत्व गांधी और उनके विचारों को काफ़ी पीछे छोड़ चुका है। उसके लिए ज़रूरत सिर्फ़ गांधी के आश्रमों (सेवाग्राम और साबरमती) के आधुनिकीकरण या उन्हें भी ‘सेंट्रल…

गांधी जयंती : गांधीजी की फकीरी  

आम लोगों से भिन्न गांधीजी का पहनना-ओढ़ना भी एक व्यापक राजनीतिक-सामाजिक कार्रवाई का हिस्सा होता था। दक्षिण भारत की यात्रा के दौरान पारंपरिक काठियावाडी वस्त्रों को छोड़कर लंगोट धारण करना उनकी ऐसी ही एक पहल थी। कैसे हुआ,यह बदलाव? गांधीजी…

155 वीं गांधी जयंती : याद रखें हम गांधीजी को

अपने रोजमर्रा के आम-फहम जीवन से लगाकर दुनिया भर के ताने-बाने तक, गांधी की दखल बेहद प्रासंगिक और जरूरी दिखाई देती है। एक लिहाज से देखें तो स्थानीय से लगाकर वैश्विक समाज तक, गांधी से कुछ-न-कुछ सीख-समझ सकता है। कैसे…

महात्‍मा गांधी : व्यक्ति नहीं, एक विचार

आचार्य विनोबा भावे गांधी को समझने के लिए विनोबा से बेहतर कौन हो सकता है? जिन्हें खुद गांधी ने ‘पहला सत्याग्रही’ माना हो, वे गांधी को दैवीय महापुरुष की बजाए एक इंसान मानते थे। ‘सप्रेस’ के दस्तावेजों में 1973 में…