विश्व निद्रा दिवस हमें याद दिलाता है कि स्वस्थ जीवन के लिए पर्याप्त नींद उतनी ही आवश्यक है जितना संतुलित आहार और नियमित व्यायाम। आज अनिद्रा वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है—लाखों लोग इससे प्रभावित हैं। शोध बताते हैं…
भोपाल में 12वां डॉ. अजय खरे स्मृति व्याख्यान भोपाल, 7 मार्च। जन स्वास्थ्य को केवल इलाज के दायरे में नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और व्यापक सामाजिक संदर्भों के साथ जोड़कर देखने की जरूरत है। यदि पानी पर टैक्स लगाने…
हमेशा की तरह इस बार भी हमने अपने बजट में वे ही कारनामे किए हैं जिनके चलते स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्र साल-दर-साल फिसड्डी होते जा रहे हैं। स्वास्थ्य में हमने पिछले सालों की तरह एक तरफ, भारी-भरकम आवंटित…
नई दिल्ली, 02 फरवरी | केंद्रीय बजट 2026 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बढ़े हुए आवंटन के दावों के बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताज़ा ऑडिट रिपोर्ट ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की एक गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने…
बजट 2026 पर जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) की प्रतिक्रिया नई दिल्ली 01 फरवरी। जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था को लगभग पूरी तरह नज़रअंदाज़ करता है,…
इंदौर/भोपाल, 4 जनवरी। “स्वच्छ शहर” के रूप में प्रचारित इंदौर में दूषित पेयजल के कारण हो रही लगातार मौतों ने प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच की गहरी खाई को उजागर कर दिया है। जन स्वास्थ्य अभियान, मध्यप्रदेश (सम्बद्ध…
इंदौर को वर्षों से देश के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा मिलता रहा है, लेकिन दूषित पेयजल से हुई 14 मौतों ने इस छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हादसा बताता है कि स्वच्छता के दावों के…
भोपाल, 22 दिसंबर। स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा में सार्वजनिक–निजी भागीदारी (पीपीपी) के बढ़ते प्रयोग को लेकर जन स्वास्थ्य से जुड़े संगठनों ने गहरी चिंता जताई है। सोमवार को भोपाल में ‘एक्शन अगेन्स प्रायवेटाइजेशन आफ मेडिकल एजुकेशन एवं हेल्थ सर्विसेस’…
रायपुर राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य सम्मेलन में पारित हुए महत्वपूर्ण प्रस्ताव रायपुर, 10 दिसंबर। स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण और व्यावसायीकरण से उत्पन्न खतरे को रोकने के लिए राष्ट्रीय अभियान चलाने तथा अप्रैल 2026 में व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर पखवाड़ा मनाने…
भारत में चरम मौसम घटनाओं की रफ्तार भयावह स्तर तक बढ़ चुकी है। हीटवेव, बाढ़, चक्रवात, बादल फटना और बिजली गिरने जैसी आपदाएँ अब लगभग पूरे साल देश के किसी न किसी हिस्से को प्रभावित कर रही हैं। इनकी बढ़ती…