गांधी विरासत को बचाने के लिए वाराणसी स्थित राजघाट परिसर के सामने चल रहा सत्याग्रह का 57 वां दिन
सर्व सेवा संघ के आह्वान पर न्याय के दीप जलाएं -100 दिवसीय सत्याग्रह जारी वाराणसी, 6 नवंबर। गांधी विरासत को बचाने के लिए वाराणसी स्थित राजघाट परिसर के सामने चल रहे सत्याग्रह को आज 57 वां दिन है। इस सत्याग्रह…
रेलवे बोर्ड के नवीन गुलाटी का बयान झूठा और दुष्प्रचार है : सर्व सेवा संघ
वाराणसी, 24 अक्टूबर । सर्वोदय समाज की शीर्ष संस्था अखिल भारतीय सर्व सेवा संघ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर रेलवे बोर्ड के सदस्य (इंफ्रा) नवीन गुलाटी के बयान को असंगत, तथ्यहीन, असत्य और गुमराह करने वाला बताया है। नवीन…
लोकतांत्रिक प्रक्रिया द्वारा समस्या समाधान करने का प्रयास नागरिकों का कर्तव्य है : चंदन पाल
सर्व सेवा संघ के खिलाफ चल रहे सरकारी षड्यंत्र के विरोध में सौ दिनी सत्याग्रह का 41 वां दिवस वाराणसी, 21 अक्टूबर । सर्व सेवा संघ परिसर को जमींदोज करने के एक वर्ष होने के निमित्त चल रहा सौ दिनी…
गांधी दर्शन एवं गांधी साहित्य : गांधी को गायब करने की साजिश
‘सर्व सेवा संघ प्रकाशन’ और ‘गांधी विद्या संस्थान’ समेत 4 संग्रहालयों और करीब 84 आवासों पर यह हमला दरअसल एक सुनियोजित साजिश है
सोनम वांगचुक के सत्याग्रह को मिला गांधीवादी संस्थाओं का समर्थन, लद्दाख के संरक्षण की अपील
नईदिल्ली, 8 अक्टूबर । सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत राज्य का दर्जा देने और पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाए जा रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत राज्य का…
‘महात्मा गांधी की दृष्टि, राधाकृष्ण का उद्यम’ पुस्तक का लोकार्पण 7 अक्टूबर को
पुस्तक प्रख्यात गांधीवादी विचारक के.एस. राधाकृष्ण के जीवन को समर्पित नई दिल्ली। प्रख्यात गांधीवादी विचारक व महात्मा गांधी के अनुयायी के.एस. राधाकृष्ण के जीवन को समर्पित ‘महात्मा गांधी की दृष्टि, राधाकृष्ण का उद्यम : जीवन, विचार व कार्य’ पुस्तक का…
जातिवाद के विरोधी और धर्म निरपेक्षता के सबसे बड़े हामी थे गाँधी
इंदौर। गाँधी एक ऐसे कालजयी व्यक्तितव का नाम है जिसने भारत की हज़ारों वर्ष पुरानी संस्कृति का न केवल साक्षात्कर किया, उसकी तुलना में दुनियाभर के बाकी महापुरुष बोने साबित होते हैं। स्त्री- पुरुष के भेद को सबसे पहले खत्म…
गांधी का ‘डांडी मार्च‘ ‘डंडा मार्च’ में बदल दिया गया है !
प्रसंग : गांधी जयंती अलग-अलग दलों और धड़ों में बँटा देश का राजनीतिक नेतृत्व गांधी और उनके विचारों को काफ़ी पीछे छोड़ चुका है। उसके लिए ज़रूरत सिर्फ़ गांधी के आश्रमों (सेवाग्राम और साबरमती) के आधुनिकीकरण या उन्हें भी ‘सेंट्रल…
गांधी जयंती : गांधीजी की फकीरी
आम लोगों से भिन्न गांधीजी का पहनना-ओढ़ना भी एक व्यापक राजनीतिक-सामाजिक कार्रवाई का हिस्सा होता था। दक्षिण भारत की यात्रा के दौरान पारंपरिक काठियावाडी वस्त्रों को छोड़कर लंगोट धारण करना उनकी ऐसी ही एक पहल थी। कैसे हुआ,यह बदलाव? गांधीजी…
155 वीं गांधी जयंती : याद रखें हम गांधीजी को
अपने रोजमर्रा के आम-फहम जीवन से लगाकर दुनिया भर के ताने-बाने तक, गांधी की दखल बेहद प्रासंगिक और जरूरी दिखाई देती है। एक लिहाज से देखें तो स्थानीय से लगाकर वैश्विक समाज तक, गांधी से कुछ-न-कुछ सीख-समझ सकता है। कैसे…








