भारत में हैं, नई दुनिया की संभावनाएं
कोरोना के प्रकोप ने हमारे सामने, भले ही परोक्ष रूप से, विकास की वैश्विक अवधारणा का एक बेहद जरूरी सवाल खडा कर दिया है। यानि विकास के नाम पर आज तक हम जो और जैसा करते रहे थे, वह दरअसल…
असली सोना तो देश की मिट्टी है
बाजार और उसके लिए विपुल उत्पादन के हल्ले में हमारी खेती धीरे-धीरे अपनी उत्पादकता और गुणवत्ता खोती जा रही है। अब ना तो रासायनिक खाद, दवाओं, कीटनाशकों के दुष्प्रभावों से मुक्त फसलें बची हैं और ना ही उसे पैदा करने…
पराली के प्रदूषण को मात देती कुछ तकनीकें
जाडा आते-आते देश की राजधानी और उससे सटे इलाके पराली जलाए जाने से पैदा होते धुंए की तकलीफों से दो-चार होने लगते हैं। जमीन को सांस तक नहीं लेने देती आधुनिक ताबड-तोड़ खेती रबी फसलों की कटाई के तुरंत बाद…
मेरी किसानी का सफर
गांधी विचार को लेकर बरसों-बरस होशंगाबाद के निटाया गांव में सक्रिय रहे स्व. श्री बनवारीलाल चैधरी के अनेक अनूठे प्रयासों में से एक था-अपने युवा कार्यकर्ताओं की ‘पीठ ठौंकने’ के दर्जे का सम्मान करना। हर साल सामाजिक कार्यों में लगे…



