Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

Year: 2020

खोट गांधी की प्रासंगिकता में नहीं, हमारे साहस में है !

महात्‍मा गांधी : 150वां जयंती वर्ष   गांधी की ज़रूरत के प्रति एक ईमानदार अभिव्यक्ति की पहली शर्त ही यही है कि हम इन हिंसक आत्मघाती दस्तों का अहिंसक और शांतिपूर्ण तरीक़ों से प्रतिकार करने के लिए अपने शरीरों के…

विन्सेंट शीनः जिसने कहा था कि गांधी कभी भी मारे जा सकते हैं

विन्सेंट शीन लिखते हैं कि गांधी ने पूरी दुनिया की आत्म का छू लिया था। गांधी पर 1927 में रेने फुलम मिलर ने एक किताब लिखी। उसका शीर्षक था- लेनिन एंड गांधी। लेकिन तब तक गांधी को गंभीरता से नहीं…

कोरोना-काल में सेक्स वर्कर्स

कोरोना काल में देश के 14 करोड़ से ज्यादा परिवारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा है। इनमें समाज के हाशिये पर रहने वाले समुदायों की आजीविका सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। इन्हीं में सेक्स वर्कर्स समुदाय भी शामिल है। प्रस्‍तुत…

गांधी महज सिद्धांत नहीं, व्यवहार हैं

2 अक्‍टूबर : गांधी जयंती पर विशेष आज के समय में सर्वाधिक उपयुक्‍त,सक्षम और सर्वजन-हिताय विचार महात्‍मा गांधी की कथनी और करनी से लिए जा सकते हैं। गांधी के विचार केवल भारत या भारतीय उपमहाद्वीप भर के लिए नहीं हैं,…

गुम होता गांधीजी का ‘जंतर’

महात्‍मा गांधी के समूचे जीवन को देखें तो उस पर एक ‘जंतर’ का प्रभाव साफ दिखाई पडता है। सबसे गरीब और कमजोर आदमी को ध्‍यान में रखकर अपने कामकाज और भविष्‍य को तय करने के इस ‘जंतर’ ने गांधीजी के…

लता मंगेशकर यानी ख़ुशबू के शिलालेख पर लिखी प्रकृति की कविता

भारत की ‘स्वर कोकिला’ कही जाने वाली लता मंगेशकर अपना 91वां जन्म दिन मना रही है| लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को मराठी बोलने वाले गोमंतक मराठा परिवार में, मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ था। उनके पिता पंडित…

बुरा से बुरा आदमी भी संत बन सकता है- डॉ. एस.एन.सुब्बराव

महात्मा गांधी सेवा आश्रम जौरा की स्वर्ण जयंती समारोह जौरा, मुरैना । बुरा से बुरा आदमी भी संत बन सकता है इसका प्रयोग चम्बल घाटी हुई बागी आत्मसमर्पण की घटना है। यह बात प्रख्यात गांधीवादी और नवजवानों के प्रेरणा स्त्रोत…

आधी आबादी से अब भी दूर है, ‘की-बोर्ड’ और ‘टचस्क्रीन’

आप चाहें, न चाहें, ‘डिजिटल मीडिया’ धीरे-धीरे सभी की बुनियादी जरूरत बनता जा रहा है। लेकिन क्‍या महिलाओं की हमारी आधी आबादी तक भी विज्ञान का यह चमत्‍कार पहुंच पा रहा है? क्‍या वे उतनी ही आसानी से ‘स्‍मार्ट-फोन’ की…

सांत्वनाओं के स्तर पर भी आत्मनिर्भर बना दिए जाने के ‘सफल’ प्रयोग !

लोगों की जिंदगियाँ जैसे शेयर बाज़ार के सूचकांक की शक्ल में बदल गयी हैं। सूचकांक के घटने-बढ़ने से जैसे बाज़ार की माली हालत की लगभग झूठी जानकारी मिलती है, लोगों के मरने-जीने की हक़ीक़त भी असली आँकड़ों की हेरा-फेरी करके…

नई राजनीति के नेता – शंकर गुहा नियोगी

शंकर गुहा नियोगी : 28 सितंबर पुण्‍य स्‍मरण सत्तर के दशक में पहले ‘छत्तीसगढ़ माइन्स श्रमिक संघ’ (सीएमएसएस) और फिर ‘छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा’ (सीएमएम) का गठन करके मजदूरों, किसानों में एक नई राजनीतिक चेतना विकसित करने वाले कॉमरेड शंकर गुहा…