समग्र शिक्षा : हम लक्ष्य से हटकर, उल्टी दिशा में चलने लगे
पिछले कुछ सालों में, कोविड महामारी के चलते हमारे देश की शिक्षा सर्वाधिक प्रभावित हुई है, लेकिन आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक संसाधनों को लगाकर उसे वापस चुस्त-दुरुस्त करने की बजाए हमारी सरकारें उसका बजट घटाने में लगी हैं। केंद्रीय बजट…
शिक्षा : बहुतेरे बच्चे सीख क्यों नहीं पा रहे ?
एक प्रभावी शिक्षक होने के लिए लगातार जुटे रहने और तैयारी की जरूरत होती है और उसे दैनिक अभ्यास में लाने के लिए उचित परिस्थितियों की जरूरत होती है| लेकिन भारत का ठीक से न काम करने वाला शिक्षक शिक्षा…
EDUCATION : आईआईटी का नया कैलेंडर
‘भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान’ उर्फ आईआईटी देश में तकनीकी शिक्षा और शोध के सर्वश्रेष्ठ केन्द्र माने जाते हैं और उनसे आधुनिक विज्ञान और समाजशास्त्र के प्रचार-प्रसार की अपेक्षा की जाती है, लेकिन यदि वे ही पोगापंथी को तरजीह देने लगें तो…
कोविड के बाद की कक्षाएं
कोरोना वायरस से उपजी कोविड-19 बीमारी अब धीरे-धीरे कम होते हुए समाप्ति के संकेत देने लगी है। जाहिर है, ऐसे में हमें अपने बच्चों के स्कूल फिर से शुरु करना होंगे। लंबे समय बाद स्कूलों, खासकर उच्च और उच्च-माध्यमिक स्तर…
कोरोना-काल में कैसी हो शिक्षा?
आपदा के किसी भी दौर में सबसे पहला शिकार बच्चे और उनकी शिक्षा ही होते हैं। कोविड-19 के पिछले साल-सवा साल में भी बच्चों को अचानक पकडा दिए गए मोबाइल या कम्प्यूटर की मार्फत पढाया-लिखाया जा रहा है। क्या भौतिक…
शिक्षा का केन्द्रीय बजट यानि ‘गरीबी में गीला आटा’
हाल के केन्द्रीय बजट में राज्यों के खाते में आवंटित शिक्षा-बजट की राशि बहुत कम करके केन्द्र सरकार आखिर क्या करना चाहती है? कोरोना महामारी के बाद करीब सालभर में पहली बार खुल रहे गांव-खेडे के स्कूलों को अपने रख-रखाब…
कोरोना से प्रभावित कक्षाएं
कोरोना वायरस की मार्फत फैली कोविड-19 बीमारी ने तरह-तरह की समस्याएं पैदा की हैं। इनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण है – स्कूली शिक्षा। शिक्षा की इस बदहाली का तीखा असर झुग्गी बस्तियों की गरीब आबादी को झेलना पड रहा है। कोविड ने…
शिक्षा से अपेक्षा
अपने समय में शिक्षा सर्वाधिक विवादास्पद जरूरत बनकर रह गई है। कोई अपने बच्चों को क्यों, कैसी और कितनी शिक्षा दिलाए? इतना सब करने के बाद क्या शिक्षा के घोषित उद्देश्य पूरे हो सकेंगे? शिक्षा व्यवस्था के दो ध्येय होते…
शिक्षकों का ज़ज्बा : हमें स्वयं के उत्तर तलाशने होंगे
वे अपनी कक्षाएं पेड़ों के नीचे, पहाड़ की ढलानों पर, धूल भरे आँगन में, मंदिरों में और मस्जिदों में संचालित की हैं। कुछ राज्यों ने आसपास के समुदायों में व्यवस्थित रूप से कक्षाओं को आयोजित करने के लिए प्रगतिशील कदम…
‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ से गायब है, रोजगार-दाता कृषि-क्षेत्र
खेती के जिस व्यवसाय में देश की तीन चौथाई आबादी लगी हो उसका हाल में जारी ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ में अपेक्षित जिक्र भी न होना विचित्र है। क्या भूख, उत्पादन और ‘जीडीपी’ जनित अर्थव्यवस्था को साधे रखने तथा सर्वाधिक रोजगार…









