सरकारी स्कूलों के बंद होने के मायने
बाजार-वाद के हल्ले में सरकारी अस्पतालों की तरह सरकारी स्कूलों को हम कितना भी गरिया लें, सर्वाधिक लोगों को स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा इन्हीं की मार्फत मिलती है। तो फिर इन्हीं को बेहतर क्यों नहीं किया जाए? खासकर तब, जब कोविड-19 की ‘मेहरबानी’ से…
शिक्षकों से एक अनुरोध
राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020 पिछले महीने आई ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020’ को लेकर राजनीतिक दलों और शिक्षा के काम में लगे कई समूहों में बेचैनी है। वे मानते हैं कि इस नीति की दम पर शिक्षा का निजीकरण…
बिना प्रवेश परीक्षा के भी संभव है, ‘आईआईटी’ में दाखिला
कोविड-19 के इन दिनों में केन्द्र की जिद पर देशभर में ‘आईआईटी’ प्रवेश-परीक्षा लेने की मारामारी मची है। पश्चिम बंगाल, उडीसा जैसे कई राज्य इन परीक्षाओं को टालने की मांग कर रहे हैं। दूसरी तरफ, विद्यार्थियों के समय बर्बाद होने…
डर का ‘डीएनए’
कहा जाता है कि इंसान की बुनियादी फितरत में आहार, निद्रा, क्रोध, भय और मैथुन शामिल हैं। इनमें से भय हमारे जीवन के सर्वाधिक करीब है। क्या होता है, भय? उसके क्या प्रभाव होते हैं? हमारे मन में भय क्यों,…
क्या हैं, ‘नई शिक्षा नीति’ के लक्ष्य : ‘विश्वगुरु’ या सस्ता श्रम?
कोविड-19 से बदहाल देश के सामने, बिना किसी संतोषजनक संवाद, बातचीत के, हड़बड़ी में लाई गई ‘शिक्षा नीति-2020’ आखिर क्या उपलब्ध करना चाहती है? क्या यह तेजी से बढ़ती निजी पूंजी को और बढाने की खातिर सस्ते मजदूरों की व्यवस्था…
स्कूल खुलें तो, मगर कैसे ?
जिम और योग केंद्र खोलने के बाद अब स्कूल-कॉलेज खोलने की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं| देश में 32 करोड़ छात्र हैं| मुख्यधारा के स्कूलों में एक ही कक्षा के सात-आठ सेक्शन्स हैं| हर कक्षा में 70 बच्चे तक…
मासूमियत पर महामारी की मार
बच्चों में चिंता, चिडचिडाहट और अवसाद के मामले बढ़ रहे हैं, और इन मनोदशाओं से निपटने के बड़े और छोटे बच्चों के तरीके अलग-अलग हैं| कई छोटे बच्चों में अनावश्यक चिडचिडाहट देखी जा रही है और ऐसे में वे अपने…
आसान नहीं ऑनलाइन पढ़ना-पढ़ाना
शिक्षा अकादमिक विषयों की पढ़ाई तक सीमित होकर रह गयी है| खेल-कूद, और हॉबी क्लासेज के लिए ऑनलाइन पढ़ाई में कोई जगह नहीं रह गयी है| अब बच्चा संगीत कैसे सीखेगा बच्चा, खेल-कूद की बारीकियां कहाँ से सीखेगा, पेंटिंग और…
अरविन्द गुप्ता : जिसने बच्चों में उम्मीद के बीज बोए
शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए अरविन्द गुप्ता अपने तई प्रयासरत हैं। वे शिक्षक, इंजीनियर और वैज्ञानिक हैं। सबको पढ़वाने के लिए उनकी वेबसाइट लोकप्रिय है। वे बच्चों, शिक्षकों में उम्मीद जगाते हैं। उनमें उम्मीद के बीज बोते…
कोरोना पीडितों के लिए कितने तैयार हैं, हमारे स्कूल?
मौजूदा महामारी से घबराकर अपने-अपने गांवों-घरों की ओर लौटते लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे रास्ते के स्कूलों में ‘लॉक डाउन’ के चलते कुछ दिन रुक जाएं। यह आग्रह उनसे भी किया जा रहा है जो शहरों,…









