जगदीप छोकर और ‘एडीआर’ : क्या उनके बिना भी ऐसा ही होता हमारा लोकतंत्र
12 सितंबर को प्रो. जगदीप छोकर के निधन से लोकतंत्र का एक प्रहरी चला गया। एडीआर की पहल से मतदाताओं को उम्मीदवारों की आपराधिक, आर्थिक व शैक्षिक पृष्ठभूमि जानने का अधिकार मिला और ‘नोटा’ विकल्प भी संभव हुआ। उनकी भूमिका…
बेहूदे विकास से उपजे भूकंप
अभी कुछ दिन पहले अफगानिस्तान और उसके कुछ पहले रूस में आए तीखे भूकंपों की खबरें हमारे अपने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में जानलेवा बाढ़ के मौजूदा हालात इस लिहाज से मिलते-जुलते दिखाई देते हैं,…

