अमन के नाम से नफ़रत बेचने का मीडिया व्यापार !
अख़बारों के पाठकों और राष्ट्रीय (राष्ट्रवादी?) चैनलों की खबरों के प्रति ईमानदारी और विश्वसनीयता के प्रति पाठकों और दर्शकों का भ्रम काफ़ी हद तक टूटकर संदेहों में तब्दील हो चुका है।उनका बचा हुआ भरोसा भी सरकारी इंजीनियरों द्वारा बनवाए जाने…
तपती दुनिया में घनी छांह है बुद्ध की देशना
बुद्ध के जीवन का आखिरी वाक्य उनके असाधारण रूप से प्रज्ञाशील होने को पूरी तरह स्थापित कर देता है। आज के समय में जब हर धर्म का अनुयायी सत्य को अपनी जेब में रखने का, उसके अकाट्य होने का दावा…

