देश में स्वास्थ्य सेवाओं के राष्ट्रीयकरण की जरूरत
कोरोना के बाद का भारत विषय पर आयोजित 4 दिवसीय वेवनार सम्पन्न समाजवादी समागम, वर्कर्स यूनिटी, जनता वीकली, पैगाम, बहुजन संवाद द्वारा कोरोना के बाद का भारत विषय पर आयोजित 4 दिवसीय वेवनार के अंतिम दिन योगेंद्र यादव, हरभजन सिंह…
अपनी ही स्थापित छवि को खंडित करते नज़र आते नरेंद्र मोदी !
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले दिनों लेह से कोई पैंतीस किलो मीटर दूर नीमू नामक जगह की बहु-प्रचारित यात्रा है। प्रधानमंत्री की पोशाक, सैनिकों (राष्ट्र भी) के समक्ष उनके समूचे उद्बोधन की मुद्राएँ, गलवान घाटी में हुई झड़प में घायल…
जंगल से आती है भोजन की थाली
आदिवासियों की जीवन शैली, उनकी परंपरागत खेती किसानी और जंगल का खानपान का अत्यधिक महत्व है। जंगलों का लगातार कटते जाने का सीधा असर लोगों की खाद्य सुरक्षा पर पड़ रहा है। आदिवासियों ने अब जंगल और खेती बचाने के…
वसुंधरा को सुंदर बनाये रखने के लिए हिमालय का संरक्षण जरूरी
खगोलीकरण और जलवायु परिवर्तन का दौर हिमालयी समाजों तथा प्रकृति दोनों के लिए चुनौती और चेतावनी भरा है,ये खतरे हमारे जीवन संसाधनों उत्पादन और जीवन पद्वति के लिए घंटी बजा चुके हैं। ऐसे में इन सबके प्रभाव को सरकारों और…
देश के अंतिम जन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर क्रमवार उपवास (सत्याग्रह)
5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस) से 2 अक्टूबर 2020 (अन्तराष्ट्रीय अहिंसा दिवस ) देश को गांधीजी की ओर लौटना चाहिए, देश बन्दी की इस अवधि ने सभी संवेदनशील और सोचने – समझने वाले भारतीय नागरिकों को, देश में उत्पन्न कठोर…
जलवायु परिवर्तन और परचून की दुकानें
सोपान जोशी दो दर्जन सालों में ’विकास’ लगातार बढ़ता ही रहा है। हम अपनी ही बनाई सीमा में रहने के लिए कतई तैयार नहीं है। 1.5 डिग्री सेल्सियस का अंतर जलवायु में आया है वह गर्मी-सर्दी के उतार-चढ़ाव से कहीं…
समाज के अंदर जब तक तर्क वितर्क नहीं होगा वो आगे नहीं बढ़ेगा
मशहूर वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता और ग़ज़लगो गौहर रज़ा ‘कोरोना के बाद का भारत’ श्रृंखला के अंतर्गत 4 जुलाई को तर्कवादी समाज का निर्माण विषय पर वर्कर्स यूनिटी के फेसबुक लाइव पर बोलते हुए मशहूर वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता और ग़ज़लगो गौहर…
खादी संस्थाओं के ऋण माफ करने एवं दोनों देशों से युद्ध का रास्ता त्यागने का आव्हान
सर्व सेवा संघकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी सम्पन्न सेवाग्राम : सर्व सेवा संघ (अखिल भारत सर्वोदय मंडल) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की वर्चुअल बैठक में 13 राज्यों के 22 सदस्यों ने खादी संस्थाओं की ऋण माफ़ी एवं भारत और चीन के बीच में तनाव के संदर्भ…
जरूरी है, जैव-विविधता का जीवन
जैव-विविधता इंसानों समेत समूची सचराचर धरती के विकास में अहमियत रखती है, लेकिन उसे इंसानों से ही सर्वाधिक खतरा भी है। अपनी खाऊ-उडाऊ विकास पद्धति पर अटूट भरोसा करने वाला इंसान यह तक भूलता जा रहा है कि जैव-विविधता की…
दीया मिर्ज़ा ने तो पूछ लिया है ! आप क्या सोचते हैं ?
ये चित्र सत्ताओं में बैठे हुए लोगों को शर्मिंदा तो नहीं ही कर रहे हैं पर उनकी प्रजाओं को अपने होने के बावजूद कुछ भी न कर पाने को लेकर आत्म ग्लानि और क्षोभ में ज़रूर डूबा रहे हैं। इतना…







