अर्थ व्यवस्था : बैंकों की बदनीयत
लोक-कल्याणकारी राज्यों से उम्मीद की जाती है कि वे ऐसे काम करें जो जनहित में, बिना शुल्क के हों। बैंकों का गठन भी सेवा के इसी भरोसे के साथ किया गया था, लेकिन आजकल वे खुलकर धंधे में लगे हैं।…
सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक
लोक-कल्याणकारी राज्यों से उम्मीद की जाती है कि वे ऐसे काम करें जो जनहित में, बिना शुल्क के हों। बैंकों का गठन भी सेवा के इसी भरोसे के साथ किया गया था, लेकिन आजकल वे खुलकर धंधे में लगे हैं।…