क्या हमारा संविधान रचने वालों ने कभी मौजूदा हालातों की कोई कल्पना की थी? क्या वे देख पा रहे थे कि देश सात-साढ़े सात दशकों में कहां-से-कहां पहुंच जाएगा? डॉ. आंबेडकर को शायद इसका भान था और इसीलिए वे बार-बार…
तीन मई को मणिपुर के एक शहर चूराचांदपुर में मैतेई समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के खिलाफ निकाले गए विशाल जुलूस के बाद भड़की भयानक हिंसा ने अब समूचे उत्तर-पूर्व को अपनी चपेट में ले लिया है। ऐसे…