नजरिया : क्या भूलूं, क्या याद करूं?
हम क्या भूलें ? उस दरिंदगी को भूलें जिसे विभीषिका कहा जा रहा है। वह विभीषिका नहीं थी, क्योंकि वह आसमानी नहीं, इंसानी थी। उसे इतिहास के किसी अंधेरे कोने में दफ्न हो जाने देना चाहिए क्योंकि वह हमें गिराता…
सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक
हम क्या भूलें ? उस दरिंदगी को भूलें जिसे विभीषिका कहा जा रहा है। वह विभीषिका नहीं थी, क्योंकि वह आसमानी नहीं, इंसानी थी। उसे इतिहास के किसी अंधेरे कोने में दफ्न हो जाने देना चाहिए क्योंकि वह हमें गिराता…