राष्ट्रवाद और आत्मनिर्भरता पर क्या कहते थे, ‘गुरुदेव?’
‘गुरुदेव’ रवीन्द्रनाथ टैगोर की बात करें तो राष्ट्रवाद और आत्मनिर्भरता का उल्लेख आ ही जाता है, लेकिन क्या उनके हवाले से ये दोनों मूल्य ठीक उसी तरह जाने-पहचाने जा सकते हैं जिस तरह आजकल इन्हें उपयोग किया जा रहा है?…
संभव है, नए कृषि कानूनों की वापसी
कडकती सर्दी में धरना देते किसानों को महीना भर से ऊपर हो गया है, लेकिन उनके संघर्ष का कोई हल निकलता दिखाई नहीं देता। किसानों की मांग है कि नए कृषि कानूनों को खारिज किया जाए और सरकार इसके लिए…
कोरोना की वैक्सीन ही नहीं,लोकतंत्र का टीका भी ज़रूरी है !
किसानों ने जिस लड़ाई की शुरुआत कर दी है वह इसलिए लम्बी चल सकती है कि उसने व्यवस्था के प्रति आम आदमी के उस डर को ख़त्म कर दिया है जो पिछले कुछ वर्षों के दौरान दिलों में घर कर…
भारी पड़ेगी , भूजल की अनदेखी
कृषि और औद्योगिक उत्पादन में बढौतरी ने हमारे जल-संसाधनों पर भारी संकट खड़ा कर दिया है। नतीजे में धीरे-धीरे हजारों साल में बना भूगर्भीय जल भंडार सूखता जा रहा है। इससे कैसे निपटा जाए? जब से हमारे देश में कुंओं, बावडियों…



