सचमुच वे गुमनाम नींव की ईंटें भी प्रणम्य हैं
किसी व्यक्ति की महानता उसके समय, परिवेश और परिजनों पर भी निर्भर करती है। महात्मा गांधी को भी अपने सबसे बड़े भाई से ऐसा साथ, सहयोग, सहायता मिलती रही। बुलन्द इमारत पर रीझना स्वाभाविक है, लेकिन नींव की वे ईंटें…
