प्रदेश सरकार का जिला अस्पतालों को निजी हाथों में देने का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण

प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना पहली प्राथमिकता होना चाहिए

उल्‍लेखनीय है कि जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियान पिछले दो दशकों से अधिक समय से सक्रिय है और स्वास्थ्य के नीतिगत मसलों को बेहतर बनाने की दिशा में हस्तक्षेप करता रहा है और सार्वजनिक स्वस्थ्य सेवाओं की मजबूती का पक्षधर रहा है।

जन स्वास्थ्य अभियान के अमूल्य निधि ने कहा कि सरकार के इस निर्णय से गरीब वंचितों के इलाज का एक बड़ा संस्थान उनकी पहुँच से दूर हो जाएगा। हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था में जिला अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की दृष्टि से जिले में महत्वपूर्ण जरूरी स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है। जिला अस्पताल पर सम्पूर्ण जिले की आबादी के स्वास्थ्य की ज़िम्मेदारी होती है, केवल अस्पताल में स्वास्थ्य देखभाल प्राप्त करने वालों की नहीं।

उन्‍होंने कहा कि आज प्रदेश में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए न कि तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ। ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2021-22 के अनुसार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 4134 उप स्वास्थ्य केंद्र, 1045 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 245 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की कमी है। इसी प्रकार की कमी आदिवासी और शहरी क्षेत्रों में भी है। साथ ही इन स्वास्थ्य केन्द्रों में चिकित्सक और अन्य मेडिकल और पेरा मेडिकल स्टाफ का अभाव भी है।

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जन स्वास्थ्य अभियान ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 स्वास्थ्य देखभाल के लिए अधिकार-आधारित दृष्टिकोण की आवश्यकता का समर्थन करती है, और इसे करने के लिए वित्तीय और ढांचागत संसाधनों का एक निश्चित स्तर होना चाहिए, जहां सबसे गरीब आबादी लाभान्वित हो सके। नीति यह सिफारिश भी करती है कि भविष्य में स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच एक मौलिक अधिकार बन जाए।

अभियान एस आर आज़ाद ने कहा कि मध्यप्रदेश में पूर्व में भी अलीराजपुर जिला अस्पताल और जोबट सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को दीपक फ़ाउंडेशन के निजी हाथों में सौंपकर स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार की उम्मीद की थी, परंतु सरकार का यह प्रयास भी विफल रहा था। इन प्रयासों से जिले में स्वास्थ्य की परिस्थितियों में कोई अंतर नहीं आया था। इस मामले में जन स्वास्थ्य अभियान मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में एक जनहित याचिका भी लगाई है, जो कि अभी भी विचाराधीन है।

अभियान से जुड़े धीरेंद्र आर्य ने कहा कि निजी स्वास्थ्य संस्थानों का मात्र एक ही उद्देश्य होता है मुनाफा कमाना और हम सभी ने कोविड महामारी के दौरान निजी अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों की मुनाफाखोरी के अनुभवों को बहुत नजदीक से देखा है। कोविड महामारी के दौरान प्रदेश के सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों और चिकित्साकर्मियों सहित जमीनी कार्यकर्ताओं ने बहादुरी के साथ महामारी का सामना किया था और जनता को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की थीं।

अभियान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता राकेश चांदौरे ने कहा कि सरकार का यह निर्णय जन स्वास्थ्य अधिकार की भावना के विपरीत है और इससे जरूरतमन्द जनता स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित होगी।

जन स्वास्थ्य अभियान ने प्रदेश के मुख्‍यमंत्री को पत्र लिखकर इस निर्णय पर पुन: विचार करने की मांग की है और प्रदेश में जनता को स्वास्थ्य सेवाएँ देने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को निजी हाथों में सौंपे जाने के बजाय सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत किए जाने का आग्रह किया है।

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