पर्यावरण पर किया जाता प्रहार भी हिंसा ही है
जल, जंगल, जमीन, हवा जैसे प्राकृतिक संसाधनों को भरपूर मुनाफे के लिए बेरहमी से लूटना, दुहना एक तरह की हिंसा ही है। यह हिंसा धीरे-धीरे समाज में जगह बनाती है और फिर इंसानों के बीच अपने क्रूरतम रूप में अवतरित…
सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक
जल, जंगल, जमीन, हवा जैसे प्राकृतिक संसाधनों को भरपूर मुनाफे के लिए बेरहमी से लूटना, दुहना एक तरह की हिंसा ही है। यह हिंसा धीरे-धीरे समाज में जगह बनाती है और फिर इंसानों के बीच अपने क्रूरतम रूप में अवतरित…