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वरिष्‍ठ आयकर अधिकारी संजय अग्रवाल की पुस्तक ‘F5 जिंदगी का रिफ्रेश बटन’ का विमोचन

वक्ताओं ने कहा: जीवन की छोटी घटनाओं में छिपे अर्थों को समझना और अपने भीतर झांकना जरूरी

रिपोर्ट : कुमार सिद्धार्थ

इंदौर, 9 अगस्त। कंप्यूटर पर काम करते हुए किसी पन्ने को नए सिरे से देखने के लिए हम जिस ‘रिफ्रेश’ बटन को दबाते हैं, जीवन में भी कभी-कभी उसकी जरूरत पड़ती है। ठहरकर यह देखने की कि हम कहां खड़े हैं, क्या बदलना चाहिए और किन चीजों को नए सिरे से समझने की जरूरत है। लेखक संजय अग्रवाल की पुस्तक ‘F5 जिंदगी का रिफ्रेश बटन’ इसी विचार को रोजमर्रा के अनुभवों, मुलाकातों और छोटी-छोटी घटनाओं के जरिए सामने लाती है।

पुस्तक का विमोचन रविवार को मानस भवन, हिंदी साहित्य समिति, आरएनटी मार्ग, इंदौर में हुआ। इस अवसर पर पद्मश्री एवं प्रख्यात क्रिकेट कमेंटेटर सुशील दोशी, वरिष्ठ साहित्यकार ज्योति जैन और संस्कृतिकर्मी संजय पटेल ने पुस्तक पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन लेखिका डॉ. प्रतिभा जैन ने किया। इस अवसर पर डॉ. संदीप अग्रवाल सहित साहित्य और संस्कृति से जुड़े अनेक लोग उपस्थित थे।

छोटी घटनाओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता : संजय पटेल

संस्कृतिकर्मी संजय पटेल ने पुस्तक पर बात करते हुए कहा कि संजय अग्रवाल के भीतर एक लेखक के साथ-साथ एक पाठक और जिज्ञासु व्यक्ति भी लगातार जीवित है। यही जिज्ञासा उन्हें नई चीजों को देखने, पढ़ने और लोगों से मिलने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कम समय में लेखक की दूसरी पुस्तक के सामने आने को भी उल्लेखनीय बताया।

पटेल ने पुस्तक में विषयों के चयन और विशेष रूप से शायरी के इस्तेमाल की सराहना की। उनके मुताबिक पुस्तक की खूबी यह है कि इसमें जीवन की बहुत सामान्य दिखाई देने वाली घटनाओं को भी ठहरकर देखने की कोशिश की गई है। कई बार कोई छोटी-सी घटना अपने भीतर बड़ा अर्थ छिपाए होती है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी का मिस्ड कॉल भी महज एक मिस्ड कॉल नहीं होता। उसके पीछे किसी की जरूरत हो सकती है, किसी मदद की अपेक्षा हो सकती है या कोई ऐसी बात हो सकती है जिसके लिए वह व्यक्ति आप तक पहुंचना चाहता हो। जीवन में ऐसी घटनाओं को हम अक्सर यूं ही गुजर जाने देते हैं, जबकि संवेदनशीलता की मांग है कि उनके पीछे छिपे संकेतों को समझने की कोशिश की जाए।

उन्होंने मनुष्य के भीतर मौजूद पूर्वाग्रहों, नाराजगियों और कटुताओं की ओर भी ध्यान दिलाया। परिवार हो, मित्रता हो या कामकाज का संसार—मनुष्य अपने भीतर कई तरह की गांठें लेकर चलता है। इन्हें मिटाना आसान नहीं है। पुस्तक इन आंतरिक स्थितियों पर भी सोचने का अवसर देती है।

पटेल ने पुस्तक की भाषा, उसकी कसावट और प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि यह बहुत सहज ढंग से पढ़ी जा सकती है। इसे एक साथ पढ़ा जा सकता है और अलग-अलग हिस्सों में लौटकर भी पढ़ने का आनंद लिया जा सकता है।

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जीवन को नए नजरिए से देखने का अवसर देती है पुस्तक : ज्योति जैन

वरिष्ठ साहित्यकार ज्योति जैन ने पुस्तक पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कंप्यूटर की दुनिया से आया ‘F5’ यहां महज तकनीकी शब्द नहीं रह जाता, बल्कि जीवन को समय-समय पर रिफ्रेश करने का रूपक बन जाता है। कंप्यूटर पर किसी पन्ने को रिफ्रेश करने का अर्थ है उसे नए सिरे से देखना। इसी तरह जीवन में भी ऐसे पड़ाव आते हैं, जब व्यक्ति को कुछ देर रुककर अपने जीवन, अपनी सोच और अपने निर्णयों को फिर से देखने की जरूरत होती है।

उन्होंने कहा कि जीवन में कोई एक स्थिति हमेशा के लिए नहीं रहती। परिस्थितियां बदलती हैं, संबंध बदलते हैं और अनुभवों के साथ हमारी समझ भी बदलती है। इसलिए जरूरी है कि हम बीते अनुभवों को ढोते रहने के बजाय उनसे सीखें और जरूरत पड़ने पर अपने जीवन को नई दिशा देने का साहस रखें। ‘F5’ इसी आत्ममंथन और बदलाव की संभावना की ओर संकेत करता है।

ज्योति जैन ने पुस्तक की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में उसकी सहजता और संवादधर्मिता को माना। उन्होंने कहा कि पुस्तक पढ़ते हुए ऐसा नहीं लगता कि लेखक पाठक को कोई उपदेश दे रहा है। बल्कि ऐसा महसूस होता है जैसे कोई परिचित व्यक्ति अपने अनुभव साझा करते हुए जीवन की कुछ सामान्य-सी लगने वाली बातों पर हमारा ध्यान खींच रहा हो। यही सहजता पुस्तक को पाठक के करीब ले आती है।

उन्होंने कहा कि आज मनुष्य की जिंदगी बहुत तेजी से चल रही है। उसके पास काम करने के लिए समय है, आगे बढ़ने की बेचैनी है, लेकिन कई बार अपने बारे में सोचने और अपने जीवन को देखने का समय नहीं है। ऐसे में ‘F5’ का विचार खासा महत्वपूर्ण हो जाता है। जीवन में कभी-कभी यह देखना भी जरूरी है कि हम जिस दिशा में जा रहे हैं, क्या वह वास्तव में हमारी दिशा है।

उन्होंने पुस्तक में जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों को महत्व दिए जाने की सराहना की। उनके अनुसार जीवन की बड़ी सीख हमेशा बड़ी घटनाओं से ही नहीं मिलती। कई बार किसी सामान्य मुलाकात, छोटी-सी बातचीत, किसी व्यक्ति के व्यवहार या किसी मामूली घटना से भी ऐसी बात सामने आ सकती है, जो लंबे समय तक हमारे साथ रहती है। संजय अग्रवाल ने ऐसे ही अनुभवों को पकड़कर उन्हें विचार में बदलने की कोशिश की है।

ज्योति जैन ने यह भी कहा कि रिफ्रेश करने का अर्थ अतीत को मिटा देना नहीं है। बल्कि अपने अनुभवों को नए नजरिए से देखना और उनमें से उपयोगी चीजों को साथ लेकर आगे बढ़ना है। मनुष्य अपने पुराने अनुभवों, सफलताओं और असफलताओं से ही बनता है, लेकिन यदि वह उन्हीं में अटका रहे तो आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है। इसलिए जीवन में समय-समय पर अपने विचारों और प्राथमिकताओं की समीक्षा भी जरूरी है।

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उन्होंने कहा कि पुस्तक का शीर्षक इसी वजह से आकर्षक है। ‘F5’ एक परिचित शब्द है, लेकिन लेखक ने उसे जीवन के सवालों से जोड़कर उसका अर्थ विस्तार दिया है। तकनीक की एक छोटी-सी कुंजी यहां आत्मचिंतन की बड़ी बात कहती है।

ज्योति जैन के अनुसार पुस्तक की भाषा भी उसके विचार को सहज बनाती है। इसमें कठिन शब्दावली या भारी-भरकम दार्शनिकता के बजाय रोजमर्रा की भाषा में जीवन से जुड़ी बातें कही गई हैं। इस कारण अलग-अलग उम्र और पृष्ठभूमि के पाठक इसमें अपने अनुभवों की कोई न कोई झलक पा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इस पुस्तक को पढ़ते हुए पाठक के सामने अंततः एक सरल-सा सवाल खड़ा होता है—क्या जीवन को बेहतर बनाने के लिए हमेशा बाहर की दुनिया को बदलना जरूरी है, या कभी-कभी शुरुआत अपने भीतर से भी की जा सकती है? ‘F5 जिंदगी का रिफ्रेश बटन’ इसी सवाल पर ठहरकर सोचने का अवसर देती है।

बड़ा आदमी बनने से अधिक जरूरी अच्छा इंसान बनना : सुशील दोशी

पद्मश्री सुशील दोशी ने पुस्तक विमोचन के अवसर को अपने लिए आत्मीय बताते हुए अपने जीवन के शुरुआती दौर को याद किया। उन्होंने वर्ष 1978 का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके जीवन में यह वर्ष एक महत्वपूर्ण पड़ाव की तरह आया था। माइक्रोफोन पर बोलने और कमेंट्री की दुनिया से जुड़ने की शुरुआती स्मृतियों को साझा करते हुए उन्होंने उस दौर के अपने अनुभवों को याद किया।

उन्होंने संजय अग्रवाल के भीतर मौजूद जिज्ञासा और सीखते रहने की प्रवृत्ति की सराहना की। कहा कि उनके भीतर लेखक के साथ एक ऐसा पाठक भी मौजूद है जो लगातार नई चीजों की तलाश करता रहता है। यही गुण लेखन को जीवंत बनाता है।

सुशील दोशी ने कहा कि जीवन केवल उपलब्धियों को हासिल करने का नाम नहीं है। सपने देखना और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते रहना जरूरी है। कई बार किसी मंजिल की शुरुआत बहुत छोटी-सी इच्छा से होती है। यदि व्यक्ति उस इच्छा को लेकर लगातार काम करता रहे तो वही सपना एक दिन वास्तविकता में बदल सकता है।

उन्होंने जीवन में संतुलन के महत्व को भी रेखांकित किया। उनके अनुसार किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए केवल प्रतिभा या महत्वाकांक्षा पर्याप्त नहीं है। परिस्थितियों को समझना, उनके साथ तालमेल बनाना और सही समय पर सही निर्णय लेना भी उतना ही जरूरी है।

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उन्होंने कहा कि मनुष्य के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि केवल बड़ा आदमी बन जाना नहीं है। इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है कि वह अच्छा इंसान बन सके। जीवन में ऐसे काम किए जाएं जिनके कारण लोग हमें सम्मान और आत्मीयता से याद करें। उन्होंने कृतज्ञता को भी जीवन का महत्वपूर्ण गुण बताया और कहा कि जिन लोगों ने हमारे जीवन में किसी भी रूप में सहयोग किया है, उनके प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जीवन को जीने की भी एक कला होती है। केवल उपलब्धियां हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि उन उपलब्धियों के बीच हम अपने जीवन और संबंधों को किस तरह जी रहे हैं।

लोगों से मिलना और उनसे सीखना ही इस पुस्तक की जमीन है : संजय अग्रवाल

लेखक संजय अग्रवाल ने पुस्तक के पीछे की प्रक्रिया बताते हुए कहा कि यह किताब किसी एक घटना या एक विचार से पैदा नहीं हुई। इसके पीछे वर्षों के अनुभव, मुलाकातें, बातचीत और लोगों से मिले विचार हैं। वे लोगों से मिलना-जुलना और उनसे संवाद करना पसंद करते हैं। बातचीत के दौरान सामने आने वाली छोटी-छोटी बातें कई बार उन्हें भीतर तक प्रभावित करती रहीं और बाद में वे चिंतन और लेखन का आधार बनीं।

उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2023 के आसपास उन्होंने इस तरह के छोटे-छोटे चिंतन लिखना शुरू किया। धीरे-धीरे ऐसी सामग्री जमा होती गई और मित्रों व शुभचिंतकों की प्रेरणा से उसे पुस्तक का रूप देने का विचार सामने आया। इसी क्रम में ‘F5 जिंदगी का रिफ्रेश बटन’ आकार लेती गई।

अग्रवाल के मुताबिक पुस्तक का प्रयास किसी को उपदेश देना नहीं है। वे चाहते हैं कि पाठक रोजमर्रा की उन घटनाओं पर भी एक बार ठहरकर विचार करे, जिन्हें सामान्यतः हम नजरअंदाज कर देते हैं। किसी मुलाकात, बातचीत, फोन कॉल या छोटी-सी घटना के पीछे भी जीवन का कोई अर्थ छिपा हो सकता है।

उन्होंने कहा कि उनके लिए लेखन लगातार सीखने की प्रक्रिया है। लोगों से मिलना, उनकी बातें सुनना, अनुभवों को समझना और उनमें से किसी अर्थपूर्ण बात को शब्द देना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। प्रयास करते रहना, उससे अनुभव हासिल करना और उस अनुभव से फिर कुछ नया सीखना—जीवन को आगे बढ़ाने का यही क्रम है।

इस मौके पर शहर के वरिष्‍ठ साहित्‍यकार, पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे उनमें कमल हेतावल, राजेश मेहता, राजेश खंडेलवाल, कुमार सिद्धार्थ, डॉ किसलय पंचोली आदि उल्‍लेखनीय है।

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