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भागलपुर में लुप्त हो रही गांधी की स्मृतियों को बचाने की कोशिश

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चंपारण के बाद महात्मा गांधी सबसे अधिक बार भागलपुर आए, लेकिन उनके आगमन की ऐतिहासिक स्मृतियां आज उपेक्षा और अतिक्रमण की शिकार हैं। बापू के भागलपुर आगमन के शताब्दी वर्ष पर जहां राष्ट्रीय समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं शहर में उनकी स्मृतियों के संरक्षण और प्रतिमा स्थापना की मांग भी जोर पकड़ने लगी है।


बिहार में चंपारण के बाद सबसे अधिक बार भागलपुर में ही महात्मा गांधी के आगमन हुए । उनके इन आगमनों के सौ साल साल पूरे होने के दौरान उनकी अब तक की रही सही स्मृति भी लुप्त होती जा रही है। अब भागलपुर के श्रेष्ठ जनों को सुध आई है तो वे उनकी स्मृतियों को सहेजने संवारने के लिए सक्रिय हो गए हैं।

महात्मा गांधी भागलपुर 1917 में सबसे पहली बार आए थे तो उन्होंने राजेंद्र प्रसाद के प्रयासों से आयोजित बिहार छात्र संघ की एक सभा को की अध्यक्षता की थी। तब उन्होंने देशवासियों से अंग्रेजी को छोड़कर मातृभाषा को अपनाने की अपील की थी।  इसके बाद उनका आगमन 1920 में हुआ, तब उनकी अपील पर स्थानीय नागरिकों ने विदेशी कपड़ों की होली जलाई थी और नशा के खिलाफ अभियान चलाया था। तीसरी बार 1925 में बापू अपने जन्मदिन पर ही आए थे और उन्होंने महिलाओं की एक बहुत बड़ी सभा को संबोधित किया था। उन्होंने महिलाओं से रूढ़ियों और अंधविश्वास से दूर होने, पढ़ने लिखने और पर्दा प्रथा हटाने की अपील की थी। इसके बाद आखिरी बार 1934 में आए थे तब भूकंप पीड़ितों की राहत के लिए घूम-घूम कर आर्थिक सहयोग जुटाया था ।

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महात्मा गांधी के इन आगमनों का इतना प्रभाव पड़ा कि अंग प्रदेश के विभिन्न जिलों में आजादी के लिए संघर्ष करने वाले सेनानी सड़कों पर भारी संख्या में आए और इनमें से कई लोग शहीद भी हुए। आजादी मिलने तक महात्मा गांधी की याद हमेशा ताजा रही लेकिन आजादी के बाद भागलपुर में उनकी सभी स्मृतियां धीरे-धीरे लुप्त होने लगी।

 महात्मा गांधी जब भागलपुर आए तो उन्हें भागलपुर के आधुनिक   कर्ण कहे जाने वाले दीप नारायण सिंह ने 38 एकड़ जमीन दान दी जिसका नाम गांधी जी की सलाह पर लाजपत पार्क रखा गया। अब यह पार्क अतिक्रमण का शिकार तो हुआ ही है, साथ ही उनकी स्मृतियां भी धूमिल हो रही है। इस पार्क में ना लाजपत राय की कोई प्रतिमा है और ना ही महात्मा गांधी की ।

महात्मा गांधी को या जमीन इसलिए दी गई थी कि यहां जनहित में सभा समारोह हो और हरियाली से भरे इस मैदान में स्थानीय नागरिक सुबह-शाम टहल सके और उनको गांधी भी सहज रूप से याद आ सके लेकिन इस पार्क पर अब व्यवसाईयों की नजर लग गई है।  वे लाजपत राय और गांधी की स्मृति वाले इस पार्क को मनोरंजन और व्यापार का केंद्र बनाने की जुगत में है हालांकि आए दिन उनके खिलाफ नागरिकों की ओर से विरोध किया जा रहा है लेकिन अब जबकि उनके आगमन के शताब्दी वर्ष पर राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है तो लोगों में यह चेतना जाग रही है कि वे अब गांधी की स्मृतियों को बचाएं ।

एक और जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के भागलपुर आगमन के 100 साल पूरे होने पर आगामी 7 से 9 अगस्त तक तीन दिवसीय बापू आगमन शताब्दी समारोह राष्ट्रीय स्तर पर धूमधाम से मनाने की तैयारियां अंतिम चरण में है वहीं दूसरी ओर शहर के गांधीवादियों सामाजिक कार्यकर्ताओं साहित्यकारों और वरिष्ठ पत्रकारों ने बापू के सम्मान  को लेकर एक बड़ी प्रशासनिक उपेक्षा की ओर ध्यान दिलाया है। यह मांग उठाई जा रही है कि कचहरी चौक पर बापू चबूतरा बना दिया गया है अब बापू की प्रतिमा भी जिला प्रशासन स्थापित करें

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 जिलाधिकारी को पत्र लिखकर मांग की गई है कि समाहरणालय परिसर में आधुनिक भारत के निर्माता राजा राममोहन राय स्मारक के ठीक सामने स्थित गांधी चबूतरा पर बापू की एक विशाल प्रतिमा स्थापित की जाए । पत्र भेजने वालों में प्रसून लतांत और डॉ सुधीर मंडल  सहित कई लोग शामिल है। गांधी जी के  भागलपुर आगमन   के सौ साल बीत जाने के बाद भी शहर के किसी सार्वजनिक स्थान पर उनकी कोई प्रतिमा नहीं है।

तिलकामांझी से कचहरी चौक होते हुए घंटाघर तक जाने वाली मुख्य सड़क का नाम महात्मा गांधी पथ जरूर है लेकिन इस सड़क के ना तो शुरुआती छोर पर और न ही अंत पर गांधी जी की कोई प्रतिमा है। नगर में तिलका मांझी भागलपुर विश्व विद्यालय के गांधी विचार विभाग में बापू की प्रतिमा जरूर है लेकिन वहां आम लोगों की सीधी पहुंच नहीं है।

दिल्ली से संबद्ध गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र में बोध नारायण मिश्रा और दामिनी देवी की प्रतिमाएं तो हैं पर बापू का कोई स्टैचू वहां भी नहीं है । डीएम कार्यालय परिसर स्थित गांधी चबूतरा के पीछे बापू का एक बड़ा चित्र लगा है जो अब धूप बारिश के कारण धीरे-धीरे धूमिल पड़ता जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि 2 अक्टूबर 1925 को बापू भागलपुर आए थे इस ऐतिहासिक घटना के 100 साल पूरे होने पर अगर समाहरणालय के गांधी चबूतरा पर बापू की भव्य प्रतिमा लगाई जाती है तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमिट धरोहर और प्रेरणा स्त्रोत साबित होगी।

गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र की पहल पर गठित गांधी आगमन शताब्दी समारोह समिति द्वारा 7 से 9 अगस्त को तीन दिवसीय राष्ट्रीय समारोह का खाका तैयार किया गया है जिसके तहत सद्भावना यात्रा और सफाई अभियान, संगीत संध्या, भव्य कवि सम्मेलन ,रक्तदान शिविर का आयोजन और बापू के भागलपुर दौरे पर आधारित स्मारिका का प्रकाशन समारोह के मुख्य आकर्षण होंगे। उम्मीद की जा रही है कि समारोह के संपन्न होते ही गांधी की स्मृतियां ताजा होंगी और उनके आदर्श और मूल्यों के प्रति आम लोगों में लगाव की लहर जरूर पैदा होगी।

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