कोराना महामारी के बावजूद अब भी जारी है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का निर्माण

सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, विपक्ष के ऐतराज, पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने जतायी निराशा

देश इस वक्त महामारी से जूझ रहा है, वहीं बीते कुछ दिनों से देश में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण की खूब चर्चाएं हो रही हैं। विपक्ष के ऐतराज के बावजूद सरकार ने इसी हरी झंडी दी थी। प्रोजेक्ट की टाइम लाइन का सख्ती से पालन करने के आदेश हैं। विपक्ष की ओर से इसके निर्माण को बंद कराने की मांग हो रही है। देश के ज्यादातर राज्यों में लॉकडाउन है, लेकिन सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में निर्माण कार्य जारी है। प्रोजेक्ट को पर्यावरण संबंधी तमाम मंजूरियां मिल चुकी हैं और ‘आवश्यक सेवा’ अधिनियम में रखा गया है। आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में इस परियोजना का निर्माण किया जा रहा है।

क्या है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट?

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का मुख्य आकर्षण तिकोने आकार का नया संसद भवन होगा, जो 64,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला होगा। संसद की नई इमारत मौजूदा संसद भवन से काफी बड़ी होगी, जहां एक साथ 1,224 सांसदों के बैठने की व्यवस्था होगी। लोकसभा सदन में 888 सांसदों की क्षमता होगी, जबकि राज्यसभा सदन में 384 सांसदों की जगह होगी। यह व्यवस्था भविष्य में सांसदों की संभावित संख्या के मद्देनजर की जा रही है। संसद की नई इमारत में सभी सांसदों को अलग से अपना दफ्तर भी मिलेगा।

निर्माण कार्य की निगरानी लोकसभा सचिवालय, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के सदस्यों और सीपीडब्ल्यूडी,एनडीएमसी और आर्किटेक्ट और डिजाइनरों के हाथों में होगी। इस प्रोजेक्ट में उप राष्ट्रपति का आवास भी शामिल है। ये अगले साल मई तक तैयार हो जाएगा। संसद की नई इमारत का निर्माण 2022 तक पूरा हो जाने की संभावना है।

इसके अलावा एक केंद्रीय सचिवालय का भी निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक तीन किलोमीटर लंबे ‘राजपथ’ में भी परिवर्तन प्रस्तावित है। सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को संग्रहालय में बदल दिया जाएगा और इनके स्थान पर नए भवनों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा इस क्षेत्र में स्थित ‘इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र’ को भी स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है। इस क्षेत्र में विभिन्न मंत्रालयों व उनके विभागों के लिए कार्यालयों का निर्माण किया जाएगा। पूरा सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के पूर्ण होने की समय-सीमा 2024 रखी गई है। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर कुल मिलाकर 13 हजार 450 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

विपक्ष का विरोध

विपक्षी दल नए संसद भवन, सरकारी ऑफिस और प्रधानमंत्री आवास बनाए जाने का विरोध करते रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस प्रोजेक्ट का यह कहते हुए विरोध किया कि महामारी के दौरान इसको रोक दिया जाना चाहिए। कुछ लोगों का कहना है कि कोराना काल के दौरान अस्‍पतालों की परेशानी है। ऑक्सीजन, वैक्सीन और दवाओं की किल्लत है।

पिछले दिनों राहुल गांधी ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को गैरजरूरी बताया था। सरकार ने यह कहते बचाव किया कि पुरानी इमारतें जर्जर हो चुकी हैं। इस प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

इस मामले में सर्वोच्च अदालत ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति सरन और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्दार्थ लूथरा की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। लूथरा ने अनुरोध किया था कि शीर्ष अदालत दिल्ली हाईकोर्ट को सेंट्रल विस्टा निर्माण के खिलाफ जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए बाध्य करे। न्यायालय ने हालांकि सहमति जताई कि स्थिति वास्तव में गंभीर है और कहा कि अगर वह उस जनहित याचिका पर जल्द सुनवाई चाहते हैं तो वह फिर से दिल्ली हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं। 

लूथरा ने पीठ से कहा कि यह मामला अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि देश एक अभूतपूर्व मानवीय संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि वह राजपथ, सेंट्रल विस्टा विस्तार और उद्यान में चल रहे निर्माण कार्य को जारी रखने की प्रदान की गई अनुमति की चुनौती से चिंतित हैं। लूथरा ने कहा, ‘मजदूरों को सराय काले खां और करोल बाग क्षेत्र से राजपथ और सेंट्रल विस्टा तक ले जाया जा रहा है, जहां निर्माण कार्य चल रहा है। इससे उनके बीच कोविड संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है।’

पर्यावरणविद भवरीन कंधारी ने कहा कि यह परियोजना पर्यावरण के लिए नुकसानदेह है और सरकार द्वारा सार्वजनिक स्थान का अतिक्रमण किया गया है। यह बहुत निराशाजनक फैसला है। यह परियोजना पर्यावरण के लिए बहुत नुकसानदेह है। दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है। पहले ही पेड़ काटे जा चुके हैं। यह परियोजना सरकार द्वारा जनता के लिए खुले स्थानों का अतिक्रमण है। हर तरीके से यह भूमि पर कब्जा के समान है।

कौन संभाल रहा जिम्‍मेदारी

बतौर चेयरमैन टाटा प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी बनमाली अग्रवाल को मिली है। वह टाटा संस लिमिटेड में इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस के अलावा एयरोस्पेस के अध्यक्ष हैं। वे टाटा पावर बोर्ड के सदस्य भी थे। ग्लोबली बनमाली को 30 से अधिक साल का अनुभव है। बनमाली ने अपने करियर की शुरुआत वार्टसिला ग्रुप के साथ की।

बनमाली ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के भीतर कई आधिकारिक पदों पर काम किया है। वह मैंगलोर विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से पढ़ाई कर चुके हैं। इसके अलावा विनायक देशपांडे साल 2011 से कंपनी में बतौर मैनेजिंग डायरेक्टर कार्यभार संभाल रहे हैं। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई की है। देशपांडे को करीब 30 साल का अनुभव है।

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