गांधी विचार को ध्‍वस्‍त करने वाले देश की बुनियाद गिरा रहे हैं : महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी

सर्व सेवा संघ परिसर, राजघाट से पुनर्निर्माण का संकल्प, सत्याग्रह आगे भी जारी रहेगा

वाराणसी, 19 दिसंबर। न्याय के दीप जलाएं-सौ दिनी सत्याग्रह के आज समापन दिवस पर सत्याग्रहियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी के प्रपौत्र एवं जाने-माने लेखक तुषार गांधी ने कहा कि सत्ता में बैठे हुए लोग कायर हैं और गांधी से डरते हैं। ये गांधी विचार के परिसरों को मिटाने की साजिश में लगे हुए हैं। अगर उनकी कोशिश कामयाब होती है तो यह देश पराया हो जाएगा। इसलिए यह एक प्रकार का विचारधारा का युद्ध है। जैसे महात्मा गांधी ने 1942 में करेंगे या मरेंगे का नारा दिया था, उसी तरह का संकल्प आज फिर से लेना होगा।

तुषार गांधी ने कहा कि अगर यहां कोई अवैध मंदिर होता तो क्या मोदी उसे बुलडोजर से गिराते? परिसर को गिराने वाले इस देश की बुनियाद को गिरा रहे हैं, वे धर्म के आधार पर समाज को बांट रहे हैं। इस परिसर को जिन्होंने मलबे में बदल दिया है, उसी के कंकड़- पत्थर इनके विचारों के कब्र बनाने के काम आएंगे। I इसी हौसले के साथ यह सत्याग्रह आगे भी जारी रहेगा। इसे पूरे विश्व में फैलाया जाएगा और गांधी प्रतिमाओं के सामने शीश नवा कर पाखंड करने वाले वाली विचारधारा का पर्दाफाश किया जाएगा।

इस मौके पर सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने कहा कि सर्व सेवा संघ परिसर प्रेरणा का स्थान है, गांधी विचार को चारों तरफ फैलाने का स्थान है, शांति के सैनिकों को तैयार करने का स्थान है, चंबल के बागियों को सही रास्ते पर ले आने के उद्यम का स्थान है, यह नागालैंड -मिजोरम में शांति प्रयासों का स्थान है। इस स्थान को नष्ट कर केंद्र की सरकार और उसकी पोषक सांप्रदायिक विचारधारा ने राष्ट्र की बुनियाद पर बुलडोजर चलाकर आघात किया है। जिस तरह चंबल के बागियों को सही रास्ते पर लाया गया उसी तरह सत्ता के अहंकारियों को भी दुरुस्त किया जाएगा। हमारे सत्याग्रह का यही उद्देश्य है।

See also  पंजाब में 11 और 12 सितम्बर को होगा सर्व सेवा संघ का 90वां अधिवेशन

गिरते तापमान और ऊंचे इरादों के बीच देशभर से जुटे गांधीजन एवं परिवर्तनवादी समाजकर्मी सुबह 6 बजे से पहले ही सर्व सेवा संघ, राजघाट परिसर के गेट के सामने इकट्ठा होना शुरू हो गए थे। हमेशा की तरह सुबह 6 बजे ही विद्याधर मास्टर की आवाज गूंजी महात्मा गांधी अमर रहें और आज के सत्याग्रह का आरंभ हुआ। सर्व सेवा संघ के पूर्व अध्यक्ष सुगन बरंठ, नंदलाल मास्टर और अशोक भारत ने सर्वधर्म प्रार्थना का सूत्र संचालन किया।

इसके बाद राजघाट से शास्त्री घाट तक की प्रभात फेरी शुरू हुई, जो 6 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 8:30 बजे समारोह स्थल पहुंची। राजघाट से प्रारंभ प्रभात फेरी में महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी, सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल, गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत, गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार, मैग्सेसे सम्मान से सम्मानित संदीप पांडे, समग्र ग्राम सेवा संघ के सवाई सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे।

इस मौके पर उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज, रंजू सिंह, जागृति राही, प्रबंधक ट्रस्टी शेख हुसैन, मंत्री अरविंद कुशवाह, अरविंद अंजुम, सत्येंद्र सिंह, लोकतांत्रिक जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी के राष्ट्रीय समिति के सदस्य सुशील कुमार, समाजवादी नेता डॉ. सुनीलम, भारत जोड़ो अभियान के शाहिद कमाल, ऑल इंडिया थिएटर काउंसिल के अशोक मानव, यूसुफ मेहर अली केंद्र की गड्डी, किसान नेता दशरथ भाई, ईश्वर चंद्र त्रिपाठी, कर्नाटक के मल्लिकार्जुन, दयानंद पाटिल,  ऊषा विश्वकर्मा, महाराष्ट्र सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रमेश दाने, झारखंड सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष शंकर राणा, सर्वोदय समाज के पूर्व संयोजक प्रोफेसर सोमनाथ रोड़े, लोक समिति के संयोजक कौशल गणेश आजाद, अभिमन्यु भाई, फरीद आलम, सिराज अहमद, पूनम, सोनी, फादर जयंत, फादर आनंद, जोखन सिंह यादव, शिवजी सिंह, प्रदीप प्रियदर्शी, ईश्वर चंद्र, संजीव सिंह सतेंद्र सिंह आदि शामिल रहे।

See also  आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के लिए खादी की अनिवार्यता समाप्त किये जाने की निंदा

Table of Contents

नीले धुएँ की धरती : ‘ग्रेट स्मोकी माउंटेन्स’

समाज और सरकार चाहे तो पर्यावरण को पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसका एक बेहतरीन उदाहरण अमरीका के टेनेसी और नार्थ कैरोलीना राज्यों की सीमाओं से लगा ‘ग्रेट स्मोकी माउंटेन्स’ है। करीब सौ साल पहले कानून बनाकर प्रकृति को उसके

Read More »

पर्यावरण संरक्षण : केवल पौधारोपण नहीं, जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी

विश्व पर्यावरण दिवस केवल पौधे लगाने का संदेश नहीं देता, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने का आह्वान करता है। जल संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग, प्रदूषण नियंत्रण, जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपभोग जैसे छोटे-छोटे प्रयास

Read More »

World Environment Day : पर्यावरण संरक्षण पर टिका है भविष्य

पर्यावरण संरक्षण और संतुलन का प्रश्न आज पूरी मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन ने पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित

Read More »