युवाओं को ऐसी जीवन शैली बनाने की जरूरत जिससे पर्यावरण का हो कम से कम ह्रास

सेवा सुरभि द्वारा प्रकाशित हमारा इंदौर हमारा पर्यावरण पुस्तिका का विमोचन

इंदौर, 4 जून । विश्व पर्यावरण दिवस के एक दिन पूर्व इंदौर प्रेस क्लब सभागृह में सेवा सुरभि के बैनर तले हुए आयोजन में निगमायुक्त हर्षिका सिंह ने कहा कि खासकर के युवाओं को अपनी ऐसी जीवन शैली विकसित करने की महती आवश्यकता है ताकि पर्यावरण का कम से कम नुकसान हो। हमारे घरों से कम कूड़ा कचरा निकले और सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद हो। निगम एक फॉरेस्ट वन बनाएगा और हर बगीचे में एक कोना ऐसा होगा जहां नागरिक अवसर विशेष पर पौधे लगा सके। शहर विकास या स्मार्ट सिटी के नाम पर बीते 5 वर्षो में जितने भी पेड़ कटे उससे दुगने पौधे निगम इसी वर्ष लगाएगा। अधिक से अधिक पेड़ों का रिप्लांट होगा और जो पेड़ सूखने या टूटने की स्थिति में है ऐसे सभी पेड़ों को बचाएगा निगम प्रशासन।

निगमायुक्त हर्षिका सिंह आज सुबह सेवा सुरभि द्वारा आयोजित पर्यावरण परिचर्चा और पुस्तक विमोचन समारोह में बोल रही थी। इस मौके पर मंच पर शिक्षाविद डॉ. जयश्री सिक्का, पर्यावरण विद डॉ. संदीप नारुलकर, उमाशंकर तिवारी उपस्थित थे।

हमारा इंदौर हमारा पर्यावरण पुस्तिका का विमोचन

निगमायुक्त हर्षिका सिंह ने सेवा सुरभि द्वारा प्रकाशित पुस्तक हमारा इंदौर हमारा पर्यावरण का विमोचन किया। इस पुस्तक को पर्यावरणविद डॉ. ओ पी जोशी, डॉ. किशोर पंवार, सुधींद्र मोहन शर्मा और भोलेश्वर दुबे ने तैयार किया है। विमोचन अवसर पर भाजपा प्रवक्ता गोविंद मालू,  प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी, शिक्षाविद डॉ. जयश्री सिक्का, पर्यावरण विद डॉ. संदीप नारुलकर, उमाशंकर तिवारी, कुमार सिद्धार्थ, ओमप्रकाश  नरेड़ा, संजय पटेल विशेष रूप से उपस्थित थे।

Dr. Jayshree Shikka

हमारी जैव विविधता हमारी शक्ति विषय पर बोलते हुए डॉ. जयश्री सिक्का ने कहा कि अभी तक हमने जीवों की 12 लाख प्रजातियों को ही पहचाना जबकि इससे कहीं अधिक है। रोजाना हजारों प्रजातियां नष्ट हो रही और अभी भी नहीं चेते तो पृथ्वी से जैव विविधता समाप्त हो जायेगी। पूरे देश में चावल की 2 लाख प्रजातियां है जिसमें से 45 हजार अकेले धान के कटोरे छत्तीसगढ़ में है। बढ़ते शहरीकरण के चलते गौरया कम दिखाई देती, गिलहरी कम हो गई। इसलिए पेड़ों को कटने से बचाएं। पेड़ ऑक्सीजन के सबसे बड़े हब है।

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हमारा जन प्रबंधन और अपव्‍यय विषय पर डॉ. संदीप नारुलकर ने कहा कि हर व्यक्ति की पानी की खपत का राष्ट्रीय औसत 135 लीटर प्रति व्यक्ति है, लेकिन निगम अपने नागरिकों को प्रति व्यक्ति 98 लीटर पानी देता है। अब 1200 करोड़ खर्च कर निगम नर्मदा का चौथा चरण लाने की तैयारी में है। नर्मदा पर निर्भरता कम करनी होगी। मृत पड़े कुएं बावड़ी को जिंदा करने की जरूरत है।

भोपाल के पर्यावरण सरोकारी उमाशंकर तिवारी ने कहा कि केवल बातों से पर्यावरण नहीं बचेगा। बिजली, सड़क, कचरा आदि के प्रबंधन पर काम करने की जरूरत है। मेरे घर परिवार ने संकल्प लिया है कि वार त्योहार पर  फटाखे  नहीं जलायेंगे। जिस परिवार में प्लास्टिक का उपयोग होगा वहां खाना नहीं खायेंगे- ऐसे संकल्प लेने  होंगे। पर्यावरण को बचाने के लिए पागलपन के हद तक काम करने की जरूरत है।

संस्था की जानकारी कुमार सिद्धार्थ ने दी। कार्यक्रम का प्रारंभ पंचम निषाद संगीत संस्‍थान के बच्चों ने पर्यावरण गीत गाकर किया, जिसके बोल थे- चलो हम पर्यावरण बचाए, गंगा यमुना और सरस्वती इन्हें निर्मल बनाए।‘

अतिथि स्वागत गोतम कोठारी, कमल कलवानी, अतुल सेठ, मेघा बर्वे, रामेश्वर गुप्ता, अनिल गोयल,   ने किया। अतिथियों को प्रतीक चिन्ह मोहन अग्रवाल, गोविद मंगल, मुकुंद कारिया,अशोक मित्तल ने प्रदान किए। कार्यक्रम का  संचालन किया संस्कृतिकर्मी संजय पटेल ने। आभार माना ओमप्रकाश नरेडा ने।

इस मौके पर प्रो. रमेश मंगल, डॉ. दिलीप वाघेला, अशोक कोठारी, सुरेश मिंडा, डॉ. सम्यक जैन, प्रवीण जोशी, डॉ. किसलय पंचोली, मुरली खंडेलवाल, गुरमीत सिं‍ह नारंग, विनय जैन सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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