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इंदौर के अस्‍पताल में नवजात शिशुओं की सुरक्षा पर सवाल

इंदौर के अस्‍पताल में नवजात शिशुओं की सुरक्षा पर सवाल

जन स्वास्थ्य अभियान, मध्य प्रदेश ने एमवायएच घटना को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग से की हस्तक्षेप की मांग  इंदौर, 3 सितंबर। मध्य प्रदेश के एमजीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महाराजा यशवंतराव अस्पताल (MYH), इंदौर में नवजात शिशु गहन चिकित्सा...

जन स्वास्थ्य अभियान, मध्य प्रदेश ने एमवायएच घटना को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग से की हस्तक्षेप की मांग

 इंदौर, 3 सितंबर। मध्य प्रदेश के एमजीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महाराजा यशवंतराव अस्पताल (MYH), इंदौर में नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती दो नवजात शिशुओं को चूहों द्वारा काटने की चौंकाने वाली घटना पर जन स्वास्थ्य अभियान, मध्य प्रदेश ने चिंता जाहिर की है। अभियान ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर पूरे घटना की निष्पक्ष स्वतंत्र जाँच की मांग की है और जिम्मेदार अस्पताल अधिकारियों की जवाबददेही सुनिश्चित करने की मांग की है।

ज्ञात हो कि महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवायएच), इंदौर में नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती दो नवजात शिशुओं को चूहों द्वारा काटने से दोनों नवजात बच्चियों की मृत्यु हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार दूसरी बच्ची की मृत्यु आज 3 सितंबर को इलाज के दौरान हुई है।

जन स्वास्थ्य अभियान, मध्य प्रदेश ने इस पूरी घटना में विभिन्न मानकों और दिशानिर्देशों जैसे संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण (आईपीसी), जिला अस्पतालों के लिए भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, 2022), एनआईसीयू के लिए डब्ल्यूएचओ मानक के उल्लंघन की बात करते हुए कहा है कि स्वच्छता और एनआईसीयू सुरक्षा बनाए रखने में घोर लापरवाही बरती गई है जिससे चूहों के काटने से नवजात शिशुओं का द्वितीयक संक्रमण के संपर्क में आना जानलेवा साबित हुआ है।

बाल स्वास्थ्य और मातृ स्वास्थ्य के मुद्दे के मामलों में मध्य प्रदेश के सूचकांक अन्य राज्यों से काफी पीछे है, और यह राष्ट्रीय सूचकांकों में सबसे खराब है। जन स्वास्थ्य अभियान, मध्य प्रदेश द्वारा लिखे पत्र में मांग की गई है कि इस घटना पर सरकार और स्वास्थ्य तंत्र यह सुनिश्चित करे कि आगे इससे और कोई मौत न हो और एनआईसीयू में भर्ती अन्य बच्चों की संक्रमण से सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद ही अन्य विभागीय कार्यवाही और जाँच की जाए। साथ ही इस घटना का संज्ञान लें और मामले की गहराई से जाँच करें।

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पत्र में यह भी मांग की गई कि मध्य प्रदेश के एमवायएच और अन्य सरकारी अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण प्रक्रियाओं की तथ्य-खोजी जाँच का आदेश दें। हालांकि सरकार ने पहले ही जाँच की घोषणा कर दी है, लेकिन एनसीपीसीआर को विश्वसनीय स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा एक स्वतंत्र जाँच सुनिश्चित करनी चाहिए।

जन स्वास्थ्य अभियान, मध्य प्रदेश के अमूल्य निधि, राजकुमार सिन्हा, सुधा तिवारी, राहुल यादव, विनोद पटेरिया, डॉ जी. डी. वर्मा, वसीम इकबाल ने कहा कि शिशु मृत्यु का कारण बनने वाली लापरवाही के लिए अस्पताल अधिकारियों की जवाबदेही तय करें, न कि केवल प्रमुख जिम्मेदार वरिष्ठ कर्मचारियों के निलंबन तक सीमित यह सीमित हो। उन्‍होंने यह भी मांग की कि      राज्य को सभी एनआईसीयू और एसएनसीयू, आईसीयू आदि जैसे समान विभागों में सख्त कीट नियंत्रण और आईपीसी ऑडिट करने और एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दें। सभी बच्चों की मृत्यु का मृत्यु ऑडिट प्रस्तुत किया जाना चाहिए और सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध होना चाहिए। प्रभावित परिवारों के लिए मुआवज़ा और पुनर्वास सहायता की सिफारिश करें।

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