आशा, उषा व सहयोगिनी कार्यकर्ताओं की लंबित मांगों के समर्थन में जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियान ने लिखा पत्र

स्वास्थ्य सेवा प्रदाता आशा, उषा के काम की अनदेखी कर रही सरकार

जन स्‍वास्‍थ्‍य के मुद्दों से सरोकार रखने वाले जन संगठन जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियान, मध्‍यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक को आज पत्र भेजकर एनएचएम के अंतर्गत 2005 से काम कर रही कुशल व प्रशिक्षित स्वास्थ्य सेवा प्रदाता आशा, उषा व सहयोगिनी कार्यकर्ताओं के लंबित मांगों के निराकरण की मांग की है। आशा कार्यकर्ता व सहयोगी को कार्य आधारित मानदेय पर कार्य करने हेतु रखा गया है, लेकिन इन कार्यों के अलावा उनसे नियमित अथवा संविदा कर्मचारी की तरह काम लिया जा रहा है।

जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियान के संयोजक अमूल्‍य निधि, एस आर आज़ाद , सुदीप दास ने कहा है कि कोविड 19 के दौर में आशा, उषा और आशा सहयोगिनी की भूमिका महत्वपूर्ण रही हैं। समुदाय स्तर से लेकर स्‍वास्थ्य केंद्र व अस्पतालों तक स्‍वास्थ्य सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने, सर्वेक्षण, जन जागरूकता फैलाने आदि में इन सभी महिला सामुदायिक स्‍वास्थ्य कार्यकर्ताओं का योगदान अहम रहा हैं। इन कार्यकर्ता की मूलभूत मांग यही है कि न्यूनतम मजदूरी के आधार पर जीने लायक मानदेय और साथ ही इनको नियमित मानदेय दिया जाए तथा इन्हें नियमित शासकीय कर्मचारी माना जाए।    

अमूल्‍य निधि, एस आर आज़ाद , सुदीप दास ने कहा कि मीडिया की खबरों के आधार पर ये बातें सामने आई है कि 24 जून 2021 को भोपाल में मिशन संचालक, राष्‍ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्य प्रदेश से आशा, उषा, आशा सहयोगी संयुक्त मोर्चा मध्य प्रदेश की बैठक सकारात्मक रही और चर्चा में बनी सहमति का लिखित आश्‍वासन पत्र  का इन्तजार किया जा रहा हैं।

जन स्वास्थ्य अभियान, मध्‍यप्रदेश ने अनुरोध किया है कि वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए जल्दी लिखित आश्वासन देकर समाधान निकाला जाए। आशा कार्यकर्ता और सहयोगिनी घर-घर जाकर लोगों का सर्वे कर रही हैं। लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से भी मांग की है कि आशा कार्यकर्ताओं और सहयोगिनी की इन समस्याओं के जल्द निराकरण कराने के दिशा में सकारात्‍मक पहल की जाए।

उल्‍लेखनीय है कि एनएफएचएस -4 के आंकड़ों में और एसआरएस-2017 के आंकड़ों में प्रदेश के स्वास्थ्य सूचकांक अन्य बीमारू राज्यों की तुलना में बेहतर स्थिति में नहीं है। इन सूचकांकों को सुधारने में मातृ मृत्यु दर, बाल मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से ही आशा कार्यक्रम की शुरुआत 2005 में की गई थी। पिछले 15 साल से राष्‍ट्रीय स्‍वास्थ्य मिशन और कई सारे स्वस्थ्य के मुद्दे पर कार्यरत संस्थाएं, विशेषज्ञ और आम जनता ने इन आशा कार्यकर्त्‍ताओं की भूमिका को महसूस भी किया हैं और मान्यता भी दी हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सभी घटकों में प्रदेश के प्रदर्शन को सुधारना ही इन आशा कार्यकर्ता का  मुख्य उद्देश्य हैं।

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