गो रूर्बन यात्रा : युवाओं को सेवा करने का संकल्प लेने की जरूरत

भोपाल, 20 नवंबर। एकता परिषद और अंश हैप्पीनेस सोसाइटी की पहल पर शुरू की गई गो रूर्बन यात्रा आज चौथे दिन गांधी भवन, भोपाल पहुंची। वरिष्ठ भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी एवं गांधी विचारक आर. के. पालीवाल और वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी अनुराधा शंकर के साथ युवा यात्रियों ने संवाद किया। गांधी भवन भोपाल में सभी यात्रियों ने कार्यकर्ताओं के साथ सर्वधर्म प्रार्थना में हिस्सा लिया। प्रार्थना के बाद गांधी भवन और एकता फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से जीतेन्द्र शर्मा ने सभी का स्वागत किया।

आर. के. पालीवाल जी द्वारा छैड़का गाँव में गांधी ग्राम सेवा केंद्र के माध्यम से किए गए उनके प्रयासों और अनुभवों के बारे में बातें रखी। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि सामाजिक बदलाव या समाज सेवा के लिए जो लोग यह कहते है वो कल या कुछ समय बाद कुछ करेंगे, वे लोग कभी कुछ नहीं कर पाते, इसलिए आप आज और अभी से सेवा करने का संकल्प लें। वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी अनुराधा शंकर ने युवा यात्रियों के अनुभवों को सुना और फिर अपनी बात रखी। उन्होंने यात्रियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए।

इसके पश्‍चात यात्रा जैविक खेती को देखने एवं समझने के लिए विदिशा के पास कल्पवृक्ष फार्म पहुंची। जहां कल्पवृक्ष और जैविक जीवन के फाउंडर्स सुधांशु और सुष्मिता ने उनकी पहल के बारे में यात्रियों को अवगत कराया एवं अहिंसक स्थानीय अर्थव्यवस्था पर समझ विकसित करने का प्रयास किया।

महात्मा गाँधी के आदर्शों पर बना एक गाँव को देखा/समझा

इसके पूर्व तीसरे दिन यात्रियों ने गाँधी ग्राम, छैड़का में ग्रामवासियों के साथ संवाद कर जाना कि वे किस प्रकार जैविक खेती कर रहे है। छैड़का गाँव में 42 घर हैं और गाँव की कुल आबादी 450 हैं। यात्रा के प्रतिभागियों ने कुछ घरों में जाकर वहाँ रहने वालों से चर्चा की और उनके कार्यों को जानने की कोशिश की।

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उल्‍लेखनीय है कि छैड़का गाँव को आर. के. पालीवाल जी द्वारा 5 साल पहले गोद लिया गया था, उस समय गाँव की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। आज 5 साल के प्रयासों के बाद गाँव में बेहतर जल प्रबंधन है और पानी की समस्या कम हुई है। इसके बाद सभी ने अरण्यानी फॉरेस्ट का भ्रमण किया जहाँ आदिवासी जीवन के बारे में जानने का मौका मिला वहीं वहां के लोग किस प्रकार जैविक खेती और प्राकृतिक खेती कर रहे है, इसे देखा और समझा।

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