ग्लोबल वार्मिंग को प्रकृति-आधारित समाधानों से 0.1 डिग्री सेल्सियस कम किये जाने की संभावना

‘नेचर’ में प्रकाशित ऑक्सफोर्ड शोध का विश्‍लेषण

हाल ही में ‘नेचर’  में प्रकाशित ऑक्सफोर्ड शोध के मुताबिक ‘नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस’ (NBS) याने प्रकृति-आधारित समाधान इस सदी के अंत तक जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में योगदान कर सकते हैं। शोध विश्लेषण से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन की बढ़ोतरी को सीमित करने के लिए हमें कार्बन उर्त्‍सजन को कम करना होगा, इसके लिए अच्छे प्रबंधन और प्रकृति की बहाली की आवश्‍यकता के साथ-साथ प्रकृति-आधारित समाधान के निवेश में बढ़ोतरी करनी चाहिए, जिससे भविष्य के लिए पारिस्थितिकी तंत्र और भूमि में सुधार होगा। शोधकर्त्‍ताओं के अनुसार बेहतर परिस्थितियों में भी ‘नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस’ ग्लोबल वार्मिंग को सन् 2055 तक 0.1° C और 2100 तक 0.4°C कम कर सकता है। लेकिन यह अनुमान आधारित है।

नेट जीरो याने एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें कार्बन उत्सर्जन का स्तर लगभग शून्य हो। इस पर आमतौर पर होने वाली चर्चाओं में अमूमन कार्बन उर्त्‍सजन को कम करने के लिए ‘नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस’ या प्रकृति पर निर्भर होने के तरीकों का ज़िक्र होता है। जैसे जंगलों की सुरक्षा और उनका संवर्ध्‍दन या इसी वजह से बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की पहल आदि।

उल्‍लेखनीय है कि ‘नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस’ (NBS) या प्रकृति-आधारित समाधान में सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रकृति के साथ काम करना शामिल है, जो मानव कल्याण और जैव विविधता दोनों के लिए लाभ प्रदान करता है। विशेष रूप से ये जैव विविधता पर आधारित कार्य हैं और स्थानीय समुदायों और स्वदेशी लोगों की पूर्ण भागीदारी और सहमति के साथ तैयार कर कार्यान्वित किए जाते हैं।

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ऑक्सफोर्ड शोध टीम ने पाया कि ‘नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस’ उपायों, जिसमें पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और बड़े पैमाने पर इसकी बहाली शामिल है, से ग्लोबल वार्मिंग 1.5 डिग्री सेल्सियस के बजाय 0.1 डिग्री सेल्सियस कम होगा और अगर लक्ष्‍य 2.0 डिग्री सेल्सियस का है तो इन उपायों से केवल 0.3 डिग्री सेल्सियस ग्लोबल वार्मिंग कम की जा सकेगी।

ये तभी संभव हो सकेगा, जब सन् 2025 के बाद, प्रति वर्ष 10 गीगाटन से अधिक CO2 को खत्म किया जाएगा, ये ग्लोबल ट्रांसपोर्टेशन क्षेत्र के सालाना उत्‍सर्जन से अधिक होगा, जिसकी कीमत 100 डॉलर प्रति टन से कम CO2 की लागत पर होगी।

इसमें ज़रूरी बात ये है कि ‘नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस’ धरती को एक चरम तापमान तक पहुंचने के बाद भी लंबे समय तक ठंडा रख सकते है। शोधकर्त्‍ताओं के अनुसार बेहतर परिस्थितियों में भी ‘नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस’ ग्लोबल वार्मिंग को सन् 2055 तक 0.1° C और 2100 तक 0.4°C कम कर सकता है। लेकिन यह अनुमान आधारित है। वर्तमान में होने वाले जलवायु परिवर्तन के खर्च के एक छोटे से हिस्से को ही ‘नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस’  के लिए दिया जाता है।

ऑक्सफोर्ड के नेचर बेस्ड सॉल्यूशंस इनिशिएटिव के तकनीकी निदेशक सेसिल गिरार्डिन के अनुसार, ‘दुनिया को अब प्रकृति आधारित समाधानों में निवेश करना चाहिए, जो पारिस्थितिकी सही हो, सामाजिक रूप से न्यायसंगत हों, और एक सदी या उससे अधिक समय में समाज को कई लाभ देने के लिए तैयार किए गए हैं । उचित रूप से प्रबंधित और सतत टिकाउ प्रबंधन से हमारी कामकाजी भूमि के संरक्षण से आने वाली कई पीढ़ियों को फायदा हो सकता है।’

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‘नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस’, मानव कल्याण और जैव विविधता दोनों के लिए फायदा पहुंचाने वाले हैं और सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रकृति के साथ काम करते हैं, और उन्हें नवंबर में हुए COP 26 जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के आधार पर ही बनाया गया है ।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है, अगर ग्लोबल वार्मिंग की जांच नहीं की जाती है, तो जंगलों की आग और अन्य मौसम विज्ञान संबंधी नुक़सान ‘नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस’ की प्रभावशीलता को कम कर सकते हैं। इसलिए उनकी दीर्घकालिक कार्बन सिंक संभावनाएं और बायोडायवर्सिटी, इक्विटी और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों और उनके प्रभावों पर पूरा ध्यान दिया जाना चाहिए।

इस रिपोर्ट के सह-लेखक, प्रो. नथालिए सेड्डन, संस्थापक ऑक्सफोर्ड के नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस’  के निदेशक का निष्कर्ष है कि ‘एक महत्वाकांक्षी स्केलिंग-अप नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस’  को जल्दी से सावधानी के साथ लागू करने की आवश्यकता है, जो एक तरह से जैव विविधता और स्थानीय लोगों के अधिकारों का समर्थन करता है, जबकि फॉसिल फ्यूल्स को स्थिर रखते हुए कम करता है।’

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