सस्टेनेबल फूड के ज़रिए स्वस्थ भविष्य की संकल्‍पना

स्वस्थ प्राणियों और प्रकृति के लिए सस्टेनेबल फूड विषय पर प्रेरक कार्यशाला सम्‍पन्‍न

इंदौर, 18 अप्रैल। जिम्मी एंड जनक मगिलिगन फाउंडेशन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट द्वारा “जिम्मी मगिलिगन मेमोरियल सस्टेनेबल डिवेलपमेंट सप्ताह” के अंतर्गत चौथे दिन लाइफ केयर हॉस्पिटल में स्वस्थ प्राणियों और प्रकृति के लिए सस्टेनेबल फूड विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला की मुख्य वक्ता पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. जनक पलटा मगिलिगन रहीं। उनके साथ जैविक सेतु के उदय भोले भी विशेष वक्ता के रूप में उपस्थित थे।

डॉ. जनक पलटा का प्रेरणादायक अनुभवसाझा

कार्यशाला में डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने अपने जीवन के 40 वर्षों के पर्यावरणीय कार्यों और सतत जीवनशैली के अनुभवों को पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार उन्होंने 1985 में एक बहाई पायनियर के रूप में इंदौर में सेवा का कार्य शुरू किया और किस तरह 6 एकड़ की बंजर ज़मीन पर जल संरक्षण, सोलर कुकिंग और जैविक खेती के प्रयोगों से बरली डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट फॉर रूरल वीमेन जैसी मिसाल कायम की।

उन्होंने अपनी जीवन यात्रा साझा करते हुए कहा: मैं सीता नहीं, जनक हूँ। मेरे पति जिम्मी ब्रिटेन से आकर मेरे साथ अंतिम सांस तक आदिवासियों की सेवा करते रहे। अब मैं सोलर कुकिंग, ज़ीरो वेस्ट, रसायनमुक्त जीवन और जैविक खेती के माध्यम से सतत जीवनशैली जी रही हूँ।

डॉ. पलटा ने सौर ऊर्जा से खाना पकाने, माइक्रोप्लास्टिक से होने वाले नुकसान, पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली की जरूरत और स्त्री-पुरुष समानता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। डॉ. पलटा ने सोलर थर्मल कुकर की दक्षता को दर्शाते हुए बताया कि इससे न केवल भोजन आसानी से पकाया जा सकता है, बल्कि कुकीज़ जैसी चीज़ों को भी सहजता से बेक किया जा सकता है। उन्होंने सौर ऊर्जा से खाना पकाने के लाभों को रेखांकित किया, जिनमें कार्बन उत्सर्जन में कमी, ईंधन और लागत की बचत, तथा स्वच्छ और टिकाऊ पर्यावरण को प्रोत्साहन शामिल हैं। उन्होंने छोटे-छोटे सतत प्रयासों से धरती और जीवन को स्वस्थ रखने की अपील की।

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जैविक सेतु: एक अनोखा मॉडल

उदय भोले ने बताया कि जैविक सेतु का शुभारंभ 6 दिसंबर 2014 को भारत सरकार की लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन द्वारा किया गया था। यह प्रयास साइंटेक इको फाउंडेशन( अबंरीश केला), प्रयोग परिवार (अरूण डिके), सस्टेनेबल फूड नेटवर्क इंदौर सहित अनेक समर्पित संस्थाओं के सहयोग से संभव हो पाया, जहाँ मालवा के अनुभवी जैविक किसानों द्वारा प्रमाणित उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। यह देश का एकमात्र ऐसा केंद्र है, जो जैविक उत्पादों की विश्वसनीयता और प्रमाणिकता के साथ एक मंच प्रदान करता है।

कार्यक्रम में जिम्मी मगिलिगन के घनिष्ठ मित्र राकेश दीक्षित (शिपिंग इंजीनियर) ने जिम्मी के त्याग और समर्पण के लिए साधुवाद दिया।  

कार्यशाला में लाइफ केयर हॉस्पिटल की डायरेक्टर डॉ. ब्रजबाला तिवारी ने हॉस्पिटल परिसर में उगाई जा रही जैविक सब्ज़ियों और औषधीय पौधों के महत्व को रेखांकित किया। डॉ. संवेदना ने कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं का आभार प्रकट किया और सस्टेनेबल जीवनशैली की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया।

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