यंगशाला द्वारा भोपाल गैस त्रासदी के 38 सालों के संघर्ष पर युवाओं के साथ संवाद

भोपाल, 4 दिसंबर । युवाओं का अनौपचारिक समूह यंगशाला रूबरू में भोपाल गैस त्रासदी के 38 सालों के दर्द और संघर्ष की कहानियों से युवा रूबरू हुए। चर्चा में पूर्व हेड मेडिको लीगल इंस्टीट्यूट, मध्य प्रदेश डॉ. डी के सथपथी और भोपाल गैस पीड़ितों के साथ काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रचना ढींगरा ने युवाओं से बात की। इस मौके पर वरिष्‍ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्त्‍ता राकेश दीवान भी शामिल हुए।   

डॉ. सथपथी ने चर्चा के दौरान बताया था कि उस रात मेरे सीनियर डॉ. ने मुझसे कहा कि शवगृह में जल्दी पहुचों वहां आज बहुत ज्यादा लोगों की जरूरत है, जब मैं अस्पताल पहुंचा मैंने देखा बहुत-सी लाशें पड़ी थी। उस समय शवगृह में हम 3 ही डॉक्टर थे और इतनी लाशों का पोस्टमार्टम करना संभव नहीं था। इसलिए हमने मेडिकल कॉलेज के फाइनल ईयर के छात्रों और हमारे इन्टर्न की मदद ली।

वे आगे बताते है कि त्रासदी इतनी भयंकर थी कि ताजुल मस्जिद से फैक्ट्री तक लोग खासते कराहते मरते हुए गिर रहे थे। जो लोग हॉस्पिटल पहुंच भी रहे थे उन्हें भी इलाज नहीं मिल पा रहा था। क्योंकि किसी को पता ही नहीं था कि इसका इलाज क्या है। हमारे डीन ने फैक्ट्री के डॉ. लोया को फोन करकर कई बार पूछा ये कौन-सी गैस? इसका एंटीडोट क्या है ? डॉ लोया ने बताया कि उन्हें कंपनी ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।

पीड़ितों के संघर्ष और सरकार की लापरवाहियों के बारे में बात करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता रचना ढींगरा ने बताया कि इस पूरी घटना में पीड़ितों के प्रति सरकार का व्यवहार बहुत ही निराशाजनक रहा है। उन्हें बार – बार अलग-अलग तरीकों से बेज्जत किया गया है। सरकार ने बिना किसी पीड़ित से पूछे अपनी हिसाब से कंपनी से पैसा मांगा और कोर्ट के बाहर ही अपनी मांग के सातवें हिस्से के अमाउंट पर ही सेटलमेंट कर लिया।

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आज की परिस्थितियों के बारे में बात करते हुए वो कहती है कि 42 कॉलोनियों में अब भी प्रदूषण है वहां का गंदा पानी पीड़ित और उनके परिवारों को पीना पड़ रहा है। साफ पानी की मांग को लेकर दिल्ली तक पीड़ितों ने कई यात्राएं की है पर परिस्थितियां आज भी जस की तस है।

इलाज की बात करते हुए वो कहती है कि गैस पीड़ितों को आज भी सही इलाज नहीं मिल पा रहा । वो कहती है डॉक्टर को पता ही नहीं है कि क्या इलाज देना आज भी सिम्टम्स देखकर इलाज होते हैं। दवाइयां खा-खा कर कई पीड़ितों की किडनियां खराब हो गई।

इस पूरी चर्चा के दौरान गैस त्रासदी से जुड़े कई सारे सवाल युवाओं ने वक्ताओं से किए जिसका वक्ताओं ने जवाब दिया।

चर्चा के अंत में वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीवान ने पद्मश्री से सम्मानित गैस पीड़ितों की आवाज जब्बार भाई को श्रद्धांजलि देते हुए उनके संघर्ष के बारे में युवाओं को बताया।

इस मौके पर भोपाल गैस त्रासदी से संबंधी एक फिल्‍म का भी प्रदर्शन किया गया। गौरतलब है कि यंगशाला भोपाल युवाओं का एक स्थान है, जो “युवाओं और संविधान” के मुद्दों पर काम करता है। यहां समय-समय पर युवाओं के साथ मुद्दों पर आधारित चर्चा और गतिविधियां की जाती है।

 उक्‍त जानकारी संगशाीला से जुडी रोली शिवहरे ने दी।

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