सत्ताधीश बापू की विरासत को वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाने का लालच दिखा कर नष्ट करना चाहते है – पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह

विरासत स्वराज यात्रा , सेवाग्राम – साबरमती संदेश यात्रा से जुड़ी

17 अक्टूबर 2021. पर्यावरणविद् एवं पानी वाले बाबा के रूप में ख्‍यात राजेंद्रसिंह के नेतृत्‍व में चल रही विरासत स्‍वराज्‍य यात्रा आज सेवाग्राम साबरमती संदेश यात्रा के साथ जुड़ गई। इस यात्रा का शुभारंभ बापू कूटी, सेवाग्राम में प्रार्थना सभा से हुआ। इस सभा में जल संरक्षक डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान में आर्थिक लोभ और सत्ता की लोलुप्ता के कारण भारत के इतिहास और विरासत के निर्माण को बदलने का प्रयास किये जा रहे है। इस अन्याय को स्वीकार नहीं किया जा सकता, यह हमारी हकदारी और जिम्मेदारी है।

डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि सत्यमेव जयते वर्तमान में झूठमेव जयते हो गया है। लोग यह सत्य और अहिंसा के अटूट संबंध को भूल गए है। बापू ने अपनी सादगी, सद्भावना से आजादी दिलाई थी। यह स्वराज यात्रा देश के युवा, तरुण और किशोर में बापू की विरासत में आस्था पैदा करेगी, उनकी पूरी मानवता, समाज के लिए बापू के संदेश को लोकचेतना के माध्यम से पहुंचाएंगे।

उन्‍होंने कहा कि  सत्ताधीश लोग बापू की विरासत को वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाने का लालच दिखा कर नष्ट करना चाहते है। लोग बापू के स्थानों से सादगी, समता और आस्था की प्रेरणा लेने आते है, भव्यता को देखने के लिए नहीं।

इसके उपरांत बापू कुटी से कलेक्टर चौक तक पैदल मार्च निकाला गया, इसमें सैकड़ों गांधीजन एकत्रित हुए और गांधी जी की प्रतिमा  पर माल्यार्पण किया गया । इसके बाद यात्रा अमरावती पहुंची। यहां यात्रा का स्वागत किया गया और एक सभा आयोजित हुई। इस यात्रा में नरेंद्चुघ, आशा बोथरा, जयेश जोशी, पारस प्रताप सिंह, अंकुश आदि उपस्थिति रहे। बाद में यात्रा ने अकोला के लिए प्रस्थान किया।

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इसी प्रकार दूसरा दल सुरेश रैकवार के नेतृत्व जैतपुर गुजरान, गुवाड़ा कल्याण पहुंचा, यहां किसानों से विरासत को बचाने और जानने की बात कही। तीसरा दल चमन सिंह और रणवीर सिंह के नेतृत्व में नादनपुर करौली पहुंचा। चौथा दल राहुल सिसोदिया के नेतृत्व में निमली में चल रही है।

उल्‍लेखनीय है कि विश्व विरासत को बचाने के उददेश्‍य से विरासत स्‍वराज्‍य यात्रा देशभर में भ्रमण कर रही है।  हमारे लालची विकास ने विरासत को नष्ट करने, बिगाड़ने, विकृत करने का काम किया है। इसलिए प्राकृतिक विरासत, मानवीय विरासत सभी पर अतिक्रमण, प्रदूषण और शोषण की मार आ गई है। इन्हें बचाने के लिए चेतना की जरुरत है।

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