Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

विशाखापत्तनम और सूरत हादसों ने उठाए श्रमिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल

जेएसए इंडिया ने स्वतंत्र जांच, जवाबदेही और कड़े सुरक्षा उपायों की मांग की

भोपाल 9 जून। विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में 8 श्रमिकों तथा गुजरात के सूरत में 4 श्रमिकों की दुखद मृत्यु पर जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (जेएसए इंडिया) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। ये घटनाएँ एक बार फिर देशभर के कार्यस्थलों पर व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों की गंभीर उपेक्षा को उजागर करती हैं। श्रमिकों का स्वास्थ्य और सुरक्षा आज भी एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि लाखों श्रमिक असुरक्षित कार्य परिस्थितियों और सुरक्षा प्रावधानों के अपर्याप्त क्रियान्वयन के कारण चोटों, व्यावसायिक रोगों और मृत्यु का सामना कर रहे हैं। ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है और ये कार्यस्थल सुरक्षा प्रबंधन में गंभीर चूकों की ओर संकेत करती हैं।

जेएसए इंडिया के सलाहकार एवं पीटीआरसी के निदेशक जगदीश पटेल ने मृतक श्रमिकों के परिवारों के लिए पर्याप्त मुआवजे तथा सुरक्षा उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों की सख्त जवाबदेही की मांग की है। उन्होंने श्रम संहिताओं और संबंधित नियमों के अंतर्गत व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन का भी आह्वान किया। उन्होंने दोनों राज्यों में फैक्टरी निरीक्षण विभागों में सभी रिक्त पदों को भरने की मांग की है।

पॉजिटिव वुमेन नेटवर्क एवं जेएसए इंडिया की कौसल्या पेरियासामी ने कहा कि सूरत की घटना फैक्ट्री अधिनियम, 1948 तथा गुजरात फैक्ट्री नियमों के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन प्रतीत होती है, जो नियोक्ताओं को सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने, खतरनाक पदार्थों के उचित प्रबंधन, आपातकालीन तैयारी तथा श्रमिकों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराने के लिए बाध्य करते हैं। सीमित (कन्फाइंड) स्थान में प्रवेश अत्यंत जोखिमपूर्ण गतिविधि है, चाहे वह फैक्ट्री कानून के अनुसार खतरनाक उद्योग की श्रेणी में आती हो या नहीं। ऐसी घटनाओं में प्रायः एक से अधिक श्रमिकों की मृत्यु होती है, इसलिए यह अत्यंत गंभीर विषय है।

See also  कोटा मातृ मृत्यु प्रकरण: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राजस्थान सरकार से मांगा जवाब

इस घटना की जांच के दौरान सरकार को प्रवासी श्रमिकों के लिए विशेष उपाय करने चाहिए।

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से अपेक्षाएँ निजी कंपनियों की तुलना में अधिक होती हैं। कानूनी प्रावधानों का बेहतर क्रियान्वयन, बेहतर सुरक्षा विभाग, प्रशिक्षित स्थायी कर्मचारी और बेहतर रखरखाव दुर्घटनाओं को रोक सकते हैं। हमें यह जानकारी नहीं है कि मृतक श्रमिक अस्थायी संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) श्रमिक थे या उच्च वेतन पाने वाले स्थायी कर्मचारी। जिन सभी श्रमिकों की मृत्यु हुई है, उन्हें मुआवज़े की गणना और भुगतान के लिए स्थायी कर्मचारियों के समान माना जाना चाहिए। पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी जिम्मेदार व्यक्तियों पर विधि के अनुसार न्यायालय में मुकदमा चलाया जाना

गुजरात असंघटित श्रमिक हित रक्षक मंच के संयोजक विपुल पाण्ड्या और जेएसए इंडिया के अमूल्य निधि ने संबंधित सरकारों से आग्रह किया है कि वे:

  • दोनों घटनाओं की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए तथा जांच रिपोर्टों को सार्वजनिक किया जाए।
  • प्रभावित परिवारों को पर्याप्त मुआवज़ा और पुनर्वास सहायता प्रदान की जाए। स्थायी और अस्थायी श्रमिकों के बीच कोई भेदभाव न किया जाए।
  • लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • खतरनाक रसायनों का प्रबंधन करने वाले उद्योगों में निरीक्षण और प्रवर्तन तंत्र को मजबूत किया जाए।
  • भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी प्रावधानों का व्यापक रूप से कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

असुरक्षित कार्यस्थलों के कारण श्रमिकों की जान जाना अस्वीकार्य है। प्रत्येक श्रमिक को सुरक्षित और स्वस्थ कार्य वातावरण का अधिकार है, और सरकारों तथा नियोक्ताओं को इस अधिकार की रक्षा करने की अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

WhatsApp हमारे WhatsApp Channel को Join करें
See also  दिल्ली में पेयजल की गुणवत्ता गंभीर संकट के दायरे में : CAG ऑडिट रिपोर्ट का खुलासा

Table of Contents

चरखा क्या बोले : इतिहास के करघे पर बुना गया गांधी का स्वप्न

महात्मा गांधी के चरखे को स्वराज, स्वदेशी और श्रम की प्रतिष्ठा के प्रतीक के रूप में केंद्र में रखकर डॉ. मीरा झा का उपन्यास “चरखा क्या बोले” स्वतंत्रता आंदोलन और ग्रामीण भारत की जीवंत गाथा प्रस्तुत करता है। यह कृति

Read More »

कोटा मातृ मृत्यु प्रकरण: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राजस्थान सरकार से मांगा जवाब

जन स्वास्थ्य अभियान राजस्थान इकाई की शिकायत पर आयोग का संज्ञान जयपुर, 30 जुलाई। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग  ने जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) राजस्थान इकाई द्वारा कोटा में हुई मातृ मृत्यु एवं गंभीर स्वास्थ्य क्षति के मामले में दायर शिकायत

Read More »

मार्क्स, गाँधी और प्रेमचन्द : हमारे समय का संवाद

प्रेमचन्द को केवल हिन्दी के महान कथाकार के रूप में नहीं, बल्कि हमारे समय के एक जीवन्त वैचारिक हस्तक्षेप के रूप में देखने का आग्रह करता है। बढ़ती असमानता, बाजारवाद, लोकतान्त्रिक संकट और सामाजिक विघटन के दौर में यह विमर्श

Read More »