Gandhi गांधी मूल्यों के पुनर्विचार और पुनर्स्थापित करने के लिए नई पीढ़ी आतुर

सर्वोदय समाज सम्‍मेलन के दूसरे दिन सर्व सेवा संघ के 75 वर्ष पूरे होने पर हुआ विशेष कार्यक्रम

सेवाग्राम (वर्धा), 15 मार्च । सर्वोदय समाज के 48 वें सम्मेलन के आयोजन के बीच सर्वोदय आंदोलन की शीर्षस्‍थ संस्‍था सर्व सेवा संघ के 75 वर्ष भी पूरे हुए हैं। इसी मौके पर एक आयोजन उसी महादेव भवन में आयोजित हुआ, जिस स्‍थान पर 75 साल पहले सर्व सेवा संघ का गठन हुआ था। इस आयोजन में अनेक वरिष्ठ और युवा गांधीवादियों ने भाग लेकर भविष्य की दिशा तय करने पर विचार-विमर्श किया है।

इस आयोजन में गांधीवादियों के बीच वैचारिक भिन्नता तो देखी गईं, जहां कुछ स्थापित गांधीवादी राजनैतिक परिस्थितियों में यथास्थिति बनाए रखना चाहते हैं या कम से कम दखल की बात करते हैं, वहीं नई पीढ़ी गांधी मूल्यों के पुनर्विचार और पुनर्स्थापित करने के लिए बेचैन दिखी।

यह बहुत महत्वपूर्ण है कि रचनात्मक कार्यों के लिए लोकसेवकों के माध्यम से जिस आंदोलन की कल्पना सर्व सेवा संघ के गठन के समय की गई थी, उसमें वर्तमान समय में युवाओं ने ओर धार देने पर ज़ोर दिया। उनका मानना है कि सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक परिदृश्य को बिना दखल के नहीं छोड़ा नहीं जा सकता।

पश्चिमी बंगाल के वयोवृद्ध गांधीवादी मानवेन्द्र मण्डल ने वर्तमान समय में राजनैतिक सत्ता की रीति-नीति से देश की बर्बादी पर जनता को सचेत करने के लिए काम करने पर ज़ोर दिया।

राजस्‍थान समग्र सेवा संघ के अध्यक्ष सवाई सिंह ने संवैधानिक संस्थाओं पर सरकारी नियंत्रण व जीवन के हर क्षेत्र में सरकारी शिकंजे के ख़िलाफ़ समाज को जागृत करने के लिए गांधीवादियों के लिए समय की मांग है।

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वरिष्ठ सर्वोदयी विचारक अमरनाथ भाई ने कहा कि ऐसे समय जब सत्ता के विरोध और विपक्षी आवाज को कुचला जा रहा हो तो गांधीजनों को आगे आना होगा। गांधीवादियों को जनता के बीच जाकर जनता को जागरूक करना होगा, जब जनता खड़ी होगी तभी देश बचेगा।

गुजरात के गांधीवादी उत्तम भाई परमार ने कहा कि वर्तमान समय द्वितीय स्वतंत्रता संग्राम शुरू हो गया है। गांधी के समय पहली राजनीतिक आजादी हुई थी, अब समय दूसरी आजादी का और इसमें भाग लेकर ही देश को बचाया जा सकेगा।

वरिष्‍ठ गांधी विचारक, चिंतक एवं जाने माने चिकित्‍सक डॉ. अभय बंग ने वर्तमान समय में वर्तमान सत्ता की वैचारिकी के ख़िलाफ़ किसी पक्ष में खड़े होने में दुविधा की बात की और कहा कि हम अगर किसी के पक्ष में खड़े होंगे तो हमारा अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा। इस क्रम में उन्‍होंने सांपनाथ और नागनाथ का उदाहरण दिया, तब इस पर लखनऊ की युवा गांधीवादी ऊषा विश्वकर्मा ने अपना विरोध प्रकट करते हुए यह स्पष्ट किया कि आज देश में सत्ता पर काबिज नीति से देश बर्बादी की ओर है इसलिए आज गांधीवादियों को इस अनीति को बदलने के आगे आना चाहिए। अगर आज गांधीवादी आगे नहीं आए तो देश का स्वरूप बिगड़ जाएगा। यह सांपनाथ और नागनाथ की बात नहीं है, समाज में फैलाए  ज़हर को समाप्त करने की बात है।

सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल में वर्तमान समय में विचार-विमर्श करके समाज को दिशा देने की बात की। उन्होंने कहा कि हालांकि हमारे पूर्वजों के बनिस्बत हमारे कंधे कमजोर हैं, फिर भी हम अपनी विरासत को आगे ले जाने का पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। हमारी कोशिशों में उतार-चढ़ाव आता रहा है, लेकिन हम कभी पीछे नहीं हटे हैं और ना ही हटेंगे। सम्मेलन में विकास के नाम पर प्रकृति का दोहन विषय पर चिन्‍मय मिश्र ने वक्तव्य दिया। इस सत्र की अध्यक्षता पूर्व सांसद सुश्री मीनाक्षी नटराजन ने की।

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गांधी से प्रभावित बड़ी संख्या में सम्मेलन में आए युवाओं के लिए रखे गए विशेष सत्र में भी युवाओं की यही सोच दिखाई दी तथा समयानुकूल रचनात्मक कार्यों से समाज निर्माण में संलग्‍न होने की बात कहीं।

सम्‍मेलन में लगभग 880 प्रतिनिधियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है जो हरियाणा, राजस्थान गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिमी बंगाल आंध्र, तेलंगाना, झारखंड छत्तीसगढ़, उड़ीसा आदि से शामिल हो रहे हैं।

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