उत्तर प्रदेश में सरकारी अस्पतालों के निजीकरण के खिलाफ जनजागरूकता अभियान चलाएगा जन स्वास्थ्य अभियान

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, दवाओं की बढ़ती कीमतें और निजी अस्पतालों की मनमानी पर जताई गहरी चिंता

लखनऊ, 20 जून। उत्तर प्रदेश में सरकारी अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया के विरोध में अब जन स्वास्थ्य अभियान, उत्तर प्रदेश व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएगा। यह निर्णय गुरूवार को लखनऊ में आयोजित जन स्वास्थ्य अभियान उत्तर प्रदेश की कोर समिति की विस्तारित बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ चिकित्सक और अभियान के वरिष्ठ सदस्य डॉ. एस. पी. पाण्डेय ने की। बैठक में जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया के राष्ट्रीय संयोजक अमूल्य निधि विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में प्रदेश के 17 जिलों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया के राष्ट्रीय संयोजक अमूल्य निधि ने कहा कि नीति आयोग के दबाव में विभिन्न राज्य सरकारें अपने अस्पतालों को निजी हाथों में देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं आम लोगों की पहुँच से दूर होती जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में यह खतरा अधिक गहराया है, क्योंकि राज्य सरकार 14–15 जिलों के अस्पतालों को पीपीपी मोड के ज़रिए निजी संस्थाओं को सौंपने की योजना पर काम कर रही है, जिनमें से तीन को पहले ही सौंपा जा चुका है।

अमूल्य निधि ने दवाओं की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को आम आदमी के लिए चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि जीवन रक्षक दवाओं और गंभीर बीमारियों की दवाएं अब मध्यम और निम्न आय वर्ग की पहुँच से बाहर होती जा रही हैं।

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उनका कहना था कि आम लोगों पर स्वास्थ्य खर्च बढ़ता जा रहा है, जिसे नियंत्रित करना सरकार की जिम्मेदारी है। नीति आयोग के दबाव में कई राज्य सरकारी अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने का प्रयास कर रही है, जिससे स्वास्थ्य सुविधाएं आम ग़रीब आदमी से दूर हो जाएंगी । जन स्वास्थ्य अभियान के कार्यकर्ताओं को सबको साथ लेकर इसको रोकने का प्रयास करना चाहिए

बैठक की शुरुआत में जन स्वास्थ्य अभियान, उत्तर प्रदेश के संयोजक संजीव सिन्हा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही बदहाल स्थिति में है। दवाओं की कीमतें बेतहाशा बढ़ रही हैं और निजी अस्पताल आम लोगों को आर्थिक रूप से निचोड़ने का माध्यम बन चुके हैं।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में कुपोषण और एनीमिया व्यापक जन-स्वास्थ्य समस्याएं हैं। ऐसे में यदि अस्पतालों का निजीकरण हुआ, तो यह समस्याएं और गहराएंगी। उन्होंने जोर दिया कि जनता को जानकारी देकर, आवाज उठाकर और संगठित जन दबाव बनाकर ही इस प्रक्रिया को रोका जा सकता है।

बैठक में यह महसूस किया गया कि जन स्वास्थ्य अभियान को राज्य के ज़्यादा से ज़्यादा जिलों में सक्रिय और संगठित करना आवश्यक है। बैठक की अध्यक्षता कर रहे डॉ. एस. पी. पाण्डेय ने सुझाव दिया कि जिन जिलों में अभी तक अभियान की इकाई नहीं बनी है, वहां जल्द से जल्द गठन की प्रक्रिया पूरी की जाए। इसके साथ ही जिन जिलों में इकाइयाँ पहले से हैं, वहाँ उनका पुनर्गठन कर उन्हें और अधिक सक्रिय बनाया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि संगठन को ठोस एक्शन प्लान के साथ आगे बढ़ना होगा, जिससे जनता से सीधे जुड़कर प्रभावी हस्तक्षेप किए जा सकें।

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बैठक में अगले कुछ महीनों की कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई और सर्वसम्मति से कई निर्णय लिए गए। इसके अनुसार, प्रदेश सरकार द्वारा अस्पतालों के निजीकरण के विरोध में एक ज्ञापन स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा जाएगा और इसके समानांतर राज्यव्यापी जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जन स्वास्थ्य अभियान की राज्य की 25 जिला इकाइयों का पुनर्गठन किया जाएगा ताकि संगठन की पहुँच और प्रभाव को बढ़ाया जा सके।

जन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा जिससे उनकी समझ और कौशल में वृद्धि हो सके। बैठक में यह भी तय हुआ कि प्रदेश में व्यापक स्तर पर कुपोषण और एनीमिया के मुद्दों पर राज्य स्तरीय संवाद आयोजित किया जाएगा जिसमें चिकित्सा विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रभावित समुदायों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

स्वास्थ्य और पर्यावरण के जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए पेयजल संकट और पर्यावरणीय स्वास्थ्य विषयों पर एक विस्तृत पर्चा तैयार किया जाएगा जिसे अभियान के माध्यम से आमजन तक पहुँचाया जाएगा।

साथ ही, प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर एक तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जो नीति-निर्धारकों, शोधकर्ताओं और नागरिक समाज के लिए उपयोगी दस्तावेज़ बनेगी।

बैठक में राज्य स्तरीय स्वास्थ्य कन्वेंशन आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया, जिसमें स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पक्षों पर व्यापक संवाद और रणनीति तय की जाएगी।

बैठक में प्रमुख रूप से अज़हर अली, अजय शर्मा, प्रीति राय, अल्पना, राकेश निगम, प्रीति श्रीवास्तव, जितेंद्र पांडे, अमित अंबेडकर समेत कई वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने अनुभव साझा किए और संगठन की भावी दिशा पर सुझाव दिए।

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