सुचेता कृपलानी ने भारतीय राजनीति को निष्ठा, पारदर्शिता और अनुशासन की नई दिशा दी : अरविन्द मोहन

नईदिल्‍ली, 30 नवंबर। वरिष्ठ पत्रकार,  लेखक और गांधी विचार के अध्येता अरविन्द मोहन ने शनिवार को कहा कि राष्ट्र सेवा के लिए स्वतंत्रता सेनानी सुचेता कृपलानी ने अपने व्यक्तिगत जीवन में महत्वपूर्ण बलिदान दिया ताकि राष्ट्रीय आंदोलन का कार्य बिना बाधा के सुचारू रूप से चलता रहे।

मोहन ने यह बात दिल्ली स्थित हिंदी भवन में सुचेता की 51वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित ‘सुचेता स्मृति व्याख्यान–2025’ कार्यक्रम में कही, जो देश की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं। इस कार्यक्रम को आचार्य कृपलानी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें कृपलानी के राष्ट्र निर्माण में असाधारण योगदान को याद किया गया।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार अरविन्द मोहन तथा वरिष्ठ लेखक व इतिहासकार डॉ भगवान सिंह ने सुचेता कृपलानी को पुष्पांजलि अर्पित की। यह कार्यक्रम कृपलानी की पुण्यतिथि (1 दिसंबर) से ठीक पहले आयोजित किया गया। इस व्याख्यान का विषय सुचेता कृपलानी के अवदान था।

उन्‍होंने कहा कि सुचेता कृपलानी ने भारतीय राजनीति में न सिर्फ महिलाओं के लिए मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि स्वाधीनता, अनुशासन और सामाजिक न्याय जैसे मूल्यों को व्यवहार में उतारकर राजनीति को नई दिशा दी। आज के समय में सुचेता कृपलानी की निष्ठा, पारदर्शिता और राष्ट्रसेवा की भावना से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।

अरविन्द मोहन ने बताया कि राष्ट्र सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली विवाहित कई महिलाओं की तरह ही सुचेता कृपलानी ने भी व्यक्तिगत जीवन में बड़ा बलिदान दिया। उन्होंने शादी के समय बच्चे पैदा न करने का दृढ़ फैसला लिया ताकि राष्ट्रीय आंदोलन के कार्य में कोई बाधा उत्पन्न न हो। उन्होंने किशन पटनायक और उनकी पत्नी वाणी, दुर्गाबाई देशमुख और असम की चंद्रप्रभा सैकिया जैसी महिलाओं के व्यक्तिगत जीवन पर प्रकाश डाला।

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सुचेता कृपलानी के योगदान पर बोलते हुए अरविंद मोहन ने कहा कि सुचेता कृपलानी ने भारतीय राजनीति में न सिर्फ महिलाओं के लिए मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि स्वाधीनता, अनुशासन और सामाजिक न्याय जैसे मूल्यों को व्यवहार में उतारकर राजनीति को नई दिशा दी। उनका कहना था कि आज के समय में सुचेता कृपलानी की निष्ठा, पारदर्शिता और राष्ट्रसेवा की भावना से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।

अरविन्द मोहन ने बताया कि गांधीजी ने अपने अनुयायियों को एक फौज की तरह तैयार किया, सबने लड़ाई लड़ी, लेकिन उन्होंने कुछ चुनिंदा महिलाओं को ही नेतृत्व करने का अधिकार दिया, जिनमें सुचेता कृपलानी भी शामिल थीं। उन्होंने बताया कि उस दौर में छुआछूत और अन्य सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध भी तीखा संघर्ष हुआ। उन्‍होंने स्वतंत्रता संग्राम, कांग्रेस संगठन, नोआखाली शांति मिशन, विभाजनकालीन राहत कार्य तथा सुचेता कृपलानी के बहुआयामी योगदान को अत्यंत मार्मिक रूप से याद किया।

श्री मोहन ने अपने संबोधन में 1947 के विभाजन के दौरान दिल्ली में किए गए सुचेता जी के असाधारण राहत कार्यों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जब सरकारी तंत्र लगभग असहाय हो चुका था, तब सुचेता जी ने अपने व्यक्तिगत संसाधनों से राहत शिविरों की व्यवस्था की, हजारों विस्थापित महिलाओं, बच्चों और परिवारों के लिए भोजन, चिकित्सा तथा पुनर्वास की योजनाएँ संचालित कीं।

उन्होंने जानकारी दी कि सिर्फ दिल्ली में उस समय लगभग 36,000 महिलाओं को हिंसा से बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने और पुनर्वासित करने का अभियान सुचेता जी की दृढ़ इच्छाशक्ति एवं अथक परिश्रम का परिणाम था। दो हृदयाघातों के बाद भी उनका सार्वजनिक जीवन के प्रति समर्पण कम नहीं हुआ, यह उनकी असाधारण ऊर्जा और राष्ट्रप्रेम का प्रमाण था।

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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान समाजवादियों में से कुछ समाजवादी डॉ. राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण (जेपी), आचार्य जे. बी. कृपलानी, और सुचेता कृपलानी के व्यक्तिगत त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद करते हुए डॉ. भगवान सिंह ने कहा, “ जो देश अपने पूर्वजों के त्याग और कृतियों को याद नहीं करता, वह उन्नति नहीं कर पाता।” सुचेता कृपलानी और आचार्य कृपलानी जैसे लोग केवल परिवार नहीं, स्वयं को राष्ट्र को समर्पित कर देने वाले तपस्वी थे। उन्होंने सुचेता कृपलानी और आचार्य कृपलानी के विवाह के भावनात्मक प्रसंग का भी जिक्र किया जिसमें दोनों ने आयु, संघर्ष और विचारधारा से ऊपर उठकर एक-दूसरे को समझा। उन्होंने यह भी कहा कि “हम सब ही उनके वास्तविक वारिस हैं, क्योंकि उनके विचारों और बलिदान को आगे ले जाना ही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी आने वाली पीढ़ी को इन महान विभूतियों के आदर्शों के बारे में और उनके विचारों को उन तक पहुंचाएं।

ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी अभय प्रताप ने बताया कि ट्रस्ट की ओर से आचार्य जेबी कृपलानी की तरह ही सुचेता कृपलानी की स्मृति में भी अब हर वर्ष ऐसे जन-उपयोगी, प्रेरणादायक और विचारोत्तेजक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि नई पीढ़ी स्वतंत्रता आंदोलन और उसके मूल्यों से परिचित हो सके।

व्याख्यान से पहले, नई कलाकार गायिका अनुश्री मिश्रा ने ‘रघुपति राघव राजा राम… पतित पावन सीताराम..’भजन और देशभक्ति के गानों पर अपनी प्रस्तुति दी जबकि हारमोनियम वादक विवेक नेगी थे। कार्यक्रम का संचालन कर रहे प्रबंध न्यासी अभय प्रताप ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान तिब्बती संसद के निवर्तमान डिप्टी स्पीकर आचार्य येशी फ़ुन्स्टोक, समाजवादी नेता राजवीर पवार, विश्व युवक केंद्र के अजीत राय, जगदीश सिंह, डॉ. शशि शेखर सिंह, देवेंद्र राय, डॉ. राजीव रंजन गिरि, अमलेश राजू, प्रेम प्रकाश, उमेश चतुर्वेदी, महेश भाई, संजीव कुमार जैसे अनेक महत्वपूर्ण शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, शोधकर्ता, पत्रकार आदि उपस्थित रहे।

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