प्लास्टिक प्रदूषण खत्म करना जागरूकता और समाधान की दिशा में प्रेरक प्रयास – इंदौर संभागायुक्त  दीपक सिंह

जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट द्वारा आयोजित पर्यावरण संवाद सप्ताह

इंदौर, 2 जून । जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट द्वारा आयोजित पर्यावरण संवाद सप्ताह के तीसरे दिन “आओ मिलकर स्वच्छ जल के लिए प्लास्टिक प्रदूषण खत्म करें” विषय पर इंदौर के संभागायुक्‍त श्री दीपक सिंह ने अपने मुख्‍य आतिथ्‍य उद्बोधन में कहा कि सन्  90 के दशक में ग्रामीण भारत में फैले नारू रोग की समस्या को मैंने बहुत करीब से देखा है। कैसे स्वच्छ जल और जागरूकता ने इस रोग को समाप्त किया। भगवद् गीता में उल्लेखित पीपल वृक्ष का भी आपने उदाहरण दिया, जो पर्यावरणीय चेतना का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि गौतम बुद्ध, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी आदि के जीवन “अब उठो ” इस एक पंक्ति ने उन्हें जाग्रत किया और प्रेरणा दी । उसी तरह हमारा सौभाग्य कि इतने दशकों से जनक दीदी  समाज और पर्यावरण सेवा को समर्पित है । जनक दीदी की पहल पर “प्लास्टिक प्रदूषण खत्म करना” जागरूकता और समाधान की दिशा में प्रेरणादायक प्रयास है । उन्होंने कहा कि यदि हम चाहते हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ भी ऐसे चमकते हुए हीरे हों तो हमें उन्हें आज ही जागरूक करना होगा। उन्होंने कहा, “सतत जीवनशैली की दिशा दिखाना जिम्मेवार नागरिकों का कर्तव्य है।”

कार्यक्रम के मुख्य विशिष्ट अतिथि उम्‍दा फोटोग्राफर पद्मश्री भालू मोंढे ने कहा कि नागरिकों में सफाई और पर्यावरणीय संवेदनशीलता और दैनिक जीवन में अपने स्वभाव और आदतों को बदलना होगा। प्लास्टिक में खाना खाने और बोतलों में पानी पीने की आदतें लोगों की सेहत और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचा रही हैं। एक समय था जब खाने के लिए पत्तल-दोनों का उपयोग होता था। आज के युवा कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिसका एक बड़ा कारण प्लास्टिक का हमारे भोजन में शामिल होना है ।

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पानी विशेषज्ञ सुधीरेंद्र मोहन शर्मा ने ऋग्वेद मंत्र से शुरुआत करते हुए कहा “जल स्वच्छ रहे, सूर्य हमेशा रहे, वृक्ष बढ़ते रहे, पृथ्वी समृद्ध रहे” को सार्थक करना होगा । अब पानी में 2 मिमी से भी छोटे माइक्रोप्लास्टिक और अत्यंत सूक्ष्म नैनो प्लास्टिक के कणों का प्रदूषण हो गया है, यह स्थिति अत्यंत भयावह है। विश्व में प्रति सेकंड 5000 प्लास्टिक बोतलें बिक रही हैं – इससे पृथ्वी को कितना नुकसान हो रहा है इसकी कल्पना ही की जा सकती है। दुनिया में  प्रतिदिन 460 मिलियन मीट्रिक टन प्लास्टिक उत्पादन हो रहा है, जिसमें 26,000 टन भारत से आता है। उन्होंने जोर देकर कहा, “जब तक हर घर में एक ईको फ्रेंडली साथी नहीं होगा, तब तक पर्यावरण शुद्ध और सतत नहीं हो सकता।”

इस पूर्व कार्यक्रम संयोजक जनक पलटा मगिलिगन ने प्रार्थना के बाद उपस्थितों का स्वागत करते हुए बताया कि उन्‍होंने पृथ्वी सम्मेलन 1992 में भाग लेकर इंदौर लौटने के दिन से अपना जीवन पर्यावरण संरक्षण को समर्पित किया है। सभी ने मिलकर इंदौर को स्वच्छता में नम्बर 1 बनाया लेकिन प्लास्टिक इतना बढ़ गया कि समस्त प्राणियों के  जीवन को खतरा बन गया । इस बार ट्रस्ट द्वारा आयोजित  33वां वार्षिक  पर्यावरण  यूएनईपी थीम पर “प्लास्टिक प्रदूषण खत्म करने” के उद्देश्य से पर्यावरण के लिए संवेदनशील संस्थाओं और लोगों के साथ मिलकर प्लास्टिक प्रदूषण पर काबू पाना है।

कार्यक्रम के दौरान ‘पंचम निशाद’ की संस्थापक शोभा चौधरी के  संगीत समूह ने अपनी सुरीले भजनों की प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पर्यावरण पर विशेष गीत “पर्यावरण बचाएं” ने कार्यक्रम को नई ऊर्जा से भर दिया।

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कार्यक्रम का संचालन जयश्री सिक्का ने करते हुए कहा कि आज दुनिया में प्लास्टिक के 5 विशाल पैच बन चुके हैं, जिनमें सबसे बड़ा पैच फ्रांस से तीन गुना बड़ा है जो प्रशांत महासागर में स्थित है। उन्होंने चेताया कि हमारे शरीर के हर हिस्से में प्लास्टिक पहुंच चुका है – यहाँ तक कि हमारे डीएनए और गर्भवती महिलाओं के भ्रूण में भी। अंत में ट्रस्ट के श्री वीरेन्द्र गोयल द्वारा आभार व्यक्त किया।

पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए केवल बात नहीं बल्कि युवा पीढ़ी को आगे आना होगा : डॅा. रामगुलाम राजदान

इसी प्रकार साप्ताहिक पर्यावरण संवाद के चौथे दिन इंदौर के  मालवांचल यूनिवर्सिटी  के सभागृह  में ” प्लास्टिक प्रदूषण को खत्म करने और पर्यावरण को बेहतर बनाने ” विषय  पर विशेष परिचर्चा आयोजित की गई।

मालवांचल यूनिवर्सिटी  के प्रोवाईस चांसलर  डॅा. रामगुलाम राजदान ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए एक दिवस नहीं बल्कि हर दिन हमें पर्यावरण को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाना होगी। प्लास्टिक मुक्त जीवन को बनाने से ही  हम इस प्रदूषण को खत्म कर सकते है। पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए केवल बात नहीं बल्कि युवा पीढ़ी को आगे आना होगा।’

पर्यावरणविद आईआईटी,बीएचयू और हैदराबाद के पूर्व डायरेक्टर प्रो. राजीव संगल ने कहा कि प्रकृति में एक सहयोग चक्र चलता है और हर चीज एक दूसरे का सहयोग कर इसी चक्र को पूरा करती है। पर्यावरण के नुकसान में सबसे ज्यादा गैर जिम्मेदार मानव पीढ़ी है। हम कई हजारों वर्षों में बनी इस पर्यावरण संरचना को खत्म करने की ओर कदम बढ़ा रहे है। प्लास्टिक हमारे जीवन में आज एक अभिन्न अंग बन गया। यह प्लास्टिक प्रदूषण हमारी नदी,जीवन सभी को खत्म कर रहा है। आज की पीढ़ी की सबसे बड़ी जरूरत है कि वह प्लास्टिक की पानी की बॅाटल का उपयोग बंद करें क्योंकि एक छोटी शुरूआत हमारे पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है। पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में युवा पीढ़ी को आगे आना होगा ।

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इस मौके पर पद्मश्री डॅा. जनक पलटा मगिलिगन ने कहा कि आज विश्व का कल्याण हो  और समस्त प्राणियों में सदभावना हो वाक्य हम सभी  बोलते है, लेकिन इस कल्याण को करने वाले हम ही लोग है। पर्यावरण और शरीर के लिए प्लास्टिक प्रदूषण जहर के समान है। माइक्रो प्लास्टिक आज हमारी खाने पीने की वस्तुओं के साथ हमारे शरीर में पहुंच रहे है। यही हृदय रोग से लेकर कई गंभीर बीमारिय़ों का सबसे बड़ा कारण बन रहे है। आने वाली पीढ़ियों के लिए यदि स्वच्छ जल और वायु रखना है तो हमें सबसे पहले प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने में अहम भूमिका निभाना होगी।

इस अवसर पर इंडेक्स समूह के एडिशनल डायरेक्टर डॅा.आर सी,यादव, इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के वाइस डीन डॅा. प्रेम न्याती, पैरामेडिकल डीन डॅा. रेशमा खुराना,डेंटल प्रभारी डीन डॅा. रोली अग्रवाल, मालवांचल यूनिवर्सिटी डीन एकेडमिक डॅा.सलील भार्गव, डायरेक्टर रिसर्च डॅा.लिली गंजू,डाय़रेक्टर एचआर रूपेश वर्मा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और अधिकारीगण उपस्थित थे। डॉ. राम गुलाम ने आभार प्रकट किया और सभी ने प्लास्टिक पैक्ड पानी ड्रिंक्स नहीं पीने का संकल्‍प लिया।

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