दवा गुणवत्ता पर सवाल, केंद्र से अनुपयुक्त कफ सिरप पर स्थायी प्रतिबंध की मांग

जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने लिखा पत्र स्वास्थ्य मंत्रालय को

इंदौर, 7 अक्टूबर। जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को पत्र लिखकर देशभर में खांसी की सिरप के निर्माण, बिक्री और विपणन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। हाल ही में राजस्थान (भरतपुर, सीकर) और मध्य प्रदेश (छिंदवाड़ा, बैतूल) में संदिग्ध दूषित खांसी की सिरप से बच्चों की मौत की घटनाओं को लेकर  अभियान ने गहरी चिंता व्यक्त की है।

पत्र में कहा गया है कि हाटी समिति (1975), विश्व स्वास्थ्य संगठन , यूनिसेफ  और भारतीय शिशु रोग अकादमी (आईएपी) ने बच्चों में खांसी की सिरप के उपयोग को अवैज्ञानिक और हानिकारक बताया है।यूनिसेफ़ ने अपने बाल स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों में कहा है कि कफ सिरप बच्चों के उपचार में अनुशंसित नहीं हैं। इसके स्थान पर गुनगुने तरल पदार्थ, एक वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए शहद, और लक्षणों की निगरानी जैसी सुरक्षित विधियों की सलाह दी गई है।

जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में सरकार के समक्ष मांग रखी है कि खांसी की सभी सिरपों को सरकारी खरीद सूची से हटाया जाए। दोषी कंपनियों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।‌ दवा नियंत्रण प्रणाली को सशक्त और पारदर्शी बनाया जाए। जनता और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाए।                                         

जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर नहीं हैं। लगातार इंदौर के बाद छिंदवाड़ा और अब बैतूल में चार बच्चों ने जान गंवाई है जिसमें अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई और सरकार जिम्मेदार अधिकारियों को बचा रही है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए, जो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को चला नहीं पा रहे हैं। अभियान भारत में असुरक्षित और अवैज्ञानिक दवाओं से होने वाली और बचाई जा सकने वाली मौतों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।

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