Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

धर्म और राजनीति के स्थान पर अध्यात्म और विज्ञान को स्थापित करना समय की मांग

विनोबा विचार प्रवाह में  पवनार आश्रम की सुश्री कालिंदी बहन ने कहा

आज विज्ञान से मनुष्य समाज भयभीत है। विज्ञान आक्रमण कर रहा है। दूसरी ओर राजनीतिक चिंतन संकुचितता को बढ़ावा दे रहा है। इसमें सांप्रदायिकता भी अपना योगदान दे रही है। इससे समस्याएं हल होने के बजाए विकराल रूप में मनुष्य समाज में सामने उपस्थित हैं। आज मन से ऊपर उठकर धर्म के स्थान पर अध्यात्म और राजनीति के स्थान पर विज्ञान को स्थापित करने की जरूरत है। इससे विज्ञान का कल्याणकारी रूप जाहिर होगा।

उक्त विचार ब्रह्मविद्या मंदिर की अंतेवासी सुश्री कालिंदी बहन ने विनोबा जी की 125वीं जयंती पर विनोबा विचार प्रवाह द्वारा फेसबुक माध्यम पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगीति में व्यक्त किए। सुश्री कालिंदी बहन ने कहा कि भगवद्गीता में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को अपना विश्वरूप दिखाया। इससे अर्जुन घबरा गया। उसे आंख बंद करने और खोलने पर वही दृश्य दिखाई देता था। यही आज विज्ञान का रूप है। आज ऐसी कोई शाखा नहीं है जिससे हम प्रभावित नहीं हुए हों।

कालिंदी बहन ने कहा कि विज्ञान को कितना स्वीकार करना या न करना यह मनुष्य के हाथ में है। इसके लिए सामूहिक दर्शन की उपासना करनी होगी, इसके लिए मनुष्य को सामूहिक पुरुषार्थ करने की आवश्यकता है। आज मन प्रेरक शक्ति बन गया है। जब मनुष्य मन से ऊपर उठेगा तब विज्ञान की भूमिका में जाएगा। इससे ऊपर उठने पर ब्रह्म साक्षात्कार की ओर अग्रसर होगा। आज विज्ञान के कारण ऐसा करना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि मन से ऊपर उठने के लिए भेद बढ़ाने वाली बातों को हटाना होगा। इसमें सांप्रदायिक चिंतन सबसे बड़ी बाधा है। धर्म से मनुष्य की उन्नति होती है। सभी धर्मों के सार भाग को विनोबा जी ने हमारे सामने रखा है। सभी धर्मों में सत्य, प्रेम और करुणा का संदेश है। पूजा पद्धतियों को लेकर होने वाले झगड़े संकुचितता को बढ़ाते हैं। आज धर्मपंथ को निकालकर उसके स्थान पर अध्यात्म को स्थापित करने की जरूरत है।

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कालिंदी बहन ने कहा कि राजनीति मनुष्य के टुकड़े करती है। इसके स्थान पर विज्ञान का चिंतन करना चाहिए। राजनीतिक चिंतन में सत्य नहीं मिल सकता। सत्य की मांग अध्यात्म भी कर रहा है और विज्ञान भी। सत्य की अनुभूति के लिए राजनीतिक चिंतन बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान युग में तटस्थ बुद्धि से समस्याओं को हल करने में सहायता मिलेगी। इसके लिए हमें अपना चिंतन का क्रम बदलना होगा। स्थानीय समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से हल करने की जरूरत है। विज्ञान ने दुनिया को नजदीक लाकर रख दिया है। इसलिए हमें चिंतन का स्वरूप बदलना चाहिए। इसके बिना हम समस्या का उपाय नहीं खोज पाएंगे।

दूसरी वक्ता अहमदाबाद की सामाजिक कार्यकर्त्‍ता सुश्री अनार बहन पटेल ने उनके द्वारा पिछले तीस सालों से महिलाओं और बच्चों के बीच किए जा रहे सेवा कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केवल हाथ में पैसा देने से महिला सशक्तिकरण नहीं होगा, बल्कि उनके हाथों में काम देने से उनमें परिवर्तन आएगा। उन्होंने बच्चों को बालश्रम से बचाने के लिए बहनों के बीच जाने की आवश्यकता बताई। उन्‍होंने कहा कि महिलाओं को एक्‍सपोजर देने की जरूरत है, जिससे वे आत्‍मविश्‍वास के साथ किये जाने कामों में सहयोगी हो सके। सभा का संचालन संजय राय ने किया। आभार श्री रमेश भैया ने माना।

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