जयजगत में निहित है विश्व शांति का संदेश

आचार्य विनोबा भावे की 125 जयंती वर्ष पर‘विनोबा विचार प्रवाह’ में पी.वी.राजगोपाल का व्‍याख्यान

8 अगस्त। शाहजहांपुरदेश में संतों की भूमिका को आचार्य विनोबा भावे  ने जिस ढंग से रखा वह अनुकरणीय है। उनके जीवन में कर्म, ज्ञान और भक्ति का त्रिविधि संगम है। विनोबा ने एक ओर ग्रामदान का तो दूसरी ओर जयजगत का संदेश दिया। इस संदेश में गांव से लेकर दुनिया तक शांति का भाव निहित है। विनोबा विचार में शासन मुक्त और शोषण मुक्त समाज बनाने की शक्ति है।

यह बात एकता परिषद के संस्थापक श्री पी.वी.राजगोपाल ने विनोबा विचार प्रवाह के फेसबुक पर आयोजित मित्र मिलन में कहीं। ज्ञातव्य है कि देशभर में इस वर्ष विनोबाजी की 125 जयंती वर्ष मनाया जा रहा है। 1 अगस्त से 10 सितंबर तक चलने वाले विनोबा विचार प्रवाह में देशभर के गांधी परिवार, खादी परिवार और सर्वोदय परिवार के 40 चिंतक और प्रयोगकर्ता अपना उद्बोधन देंगे।

श्री पी व्‍ही राजगोपाल ने विनोबा की जयजगत की कल्पना के व्यावहारिक पहलुओं को उजागर करते हुए कहा कि आज दुनिया को एक करने की जरूरत है। आज राष्ट्र की सीमाएं टूट गई हैं। विनोबा जी ने दुनिया में न्याय और शांति कायम करने के लिए जयजगत मंत्र का उद्घोष किया। श्री राजगोपलन ने अपनी जयजगत यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि दुनिया में जयजगत यात्रा का स्वागत हो रहा है। दिल्ली के राजघाट से प्रारंभ होकर जिनेवा तक की यात्रा में विनोबा के विचारों को लोगों ने स्वीकार किया। विज्ञान युग में यह कल्पना साकार होने वाली है। जयजगत यात्रा में चार मुद्दों को प्रमुखता दी गई है गरीबी उन्मूलन, विषमता को मिटाना, अहिंसक समाज की स्थापना और पर्यावरण संरक्षण। उन्होंने बताया कि आज दुनिया के एक प्रतिशत लोगों के पास दुनिया की 58 प्रतिशत संपत्ति है। यह हिंसा का मुख्य कारण है। प्रत्यक्ष हिंसा के लिए अप्रत्यक्ष हिंसा जिम्मेदार है। विनोबा जी ने दोनों ही प्रकार की हिंसा को अपने जीवन में महसूस किया और उसे मिटाने के लिए देशभर में पदयात्रा की। भूमि समस्या को हल करने के लिए भूदान की गंगा प्रवाहित की। वे हमेशा गरीबों और मजदूरों के पक्ष में खड़े रहे। महिलाओं को सामर्थ्यवान बनाने के लिए काम किया। आज पर्यावरण इतना प्रदूषित हो गया है कि यदि उचित कदम नहीं उठाए गए तो दस साल में धरती नष्ट हो सकती है।

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श्री राजगोपाल ने कहा जिस प्रकार आसमान, हवा पर किसी का अधिकार नहीं हो सकता उसी प्रकार जल, जंगल, जमीन भी सभी का है। उन्होंने आज की राजनीति पर टिका करते हुए कहा कि दुनिया में राजनीतिज्ञों का एकाधिकार बढ़ता जा रहा है। इससे अनेक प्रकार के खतरे उत्पन्न हो गए हैं। इस पर वैज्ञानिक तरीके से ही अंकुश लगाया जा सकता है। विरोध के बजाए सकारात्मक चिंतन से रास्ता निकलेगा। एक अगस्त से प्रारंभ हुए विनोबा विचार प्रवाह में ब्रह्मविद्या मंदिर की सुश्री उषा बहन, गौतम भाई, कंचन बहन, डाॅ.एस.एन.सुब्बाराव, गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत, खादी ग्रामोद्योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीदास, जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने अपने विचार व्यक्त कर चुके हैं। प्रारंभ में विनोबा सेवा आश्रम शाहजहांपुर बरतारा के श्री रमेश भैया ने विनोबा विचार प्रवाह की जानकारी देते हुए श्री राजगोपाल का परिचय दिया। संचालन श्री संजय राय ने किया। आभार श्री रमेश भैया ने माना।

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