दूसरों की बेहतरी के लिये जीने का पर्याय पेरीन दाजी

अनिल त्रिवेदी

इंदौर, मध्यप्रदेश और देश के मजदूरों, किसानों, आदिवासियों और अन्याय के विरोध में खडे होने वाले असंख्य लोगों में बेहद आदर, स्नेह से याद किए जाने वाले दाजी परिवार की पेरीन दाजी को हम से विदा हुए चार वर्ष पूर्ण हो रहे है। अपने जीवनकाल में ही किंवदंती बन गए कामरेड होमी एफ. दाजी की जीवनसंगिनी होने के साथ-साथ कामरेड पेरीन दाजी खुद संघर्षशीलता, निष्ठा और वैचारिक स्पष्टता की मिसाल थीं।

पेरिन दाजी : चौथी पुण्‍य तिथि

किसे मालूम था कि चार वर्ष पूर्व की छः फरवरी की सुबह 91 साल की कामरेड पेरीन दाजी (Perin Daji) की आखिरी सुबह होगी। कामरेड पेरीन दाजी दूसरों की बेहतरी के लिये जीते रहने का पर्याय थीं। वे आजीवन साम्यवादी विचारों को जमीन पर लाने के लिये जीती रहीं। शिक्षा, राजनीति,सांस्कृतिक आंदोलन और मेहनतकश लोगों के साथ कामरेड पेरीन दाजी ने अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा बिताया। वे संघर्ष को ही जीवन मानती थीं और उनका समूचा जीवन संघर्षमय रहा। वंचित, शोषित और मेहनतकश लोगों की राजनीति करने वाले तमाम सामाजिक-राजनैतिक लोगों का उनका भरा-पूरा परिवार था। वे ‘अपने लिए, जिए तो क्या जिए’ के जीवन-दर्शन में भरोसा करती थीं। इन्दौर की जनवादी राजनीति में कामरेड पेरीन दाजी का अविस्मरणीय योगदान रहा है।

इन्दौर के सेंट रेफियल स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्य करते हुए इन्दौर ही नहीं भारत के साम्यवादी आंदोलन के प्रखर नेता कामरेड होमी दाजी की जीवनसाथी कामरेड पेरीन दाजी (Perin Daji) ने आजीवन साम्यवादी विचारों के साथ एकनिष्ठ होकर अपने निजी और सार्वजनिक जीवन को जीवन की भरपूर ऊर्जा के साथ जीने का कार्य किया। आजादी के बाद के शुरूआती दौर में इन्दौर के मजदूर आंदोलन में कामरेड पेरीन दाजी ने निजी और सार्वजनिक जीवन में समन्वय के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। इन्दौर की कपड़ा मिलों के सवालों को लेकर खडे हुए मजदूर आंदोलन में साम्यवादी विचारों के राजनैतिक कार्य को खड़ा करने में कामरेड पेरीन दाजी (Perin Daji) ने महती भूमिका निभाई। कामरेड होमी दाजी इन्दौर ही नहीं मध्यभारत के उभरते हुए प्रखर साम्यवादी नेता थे। वे 1962 में इन्दौर से सांसद भी बने थे।

कामरेड पेरीन दाजी इन्दौर के सार्वजनिक जीवन में एक कामकाजी महिला और गृहस्थ होते हुए भी सक्रिय राजनैतिक, सामाजिक,सांस्कृतिक, वैचारिक आंदोलनों में संघर्षमय जीवन कैसे शान्ति एवं धीरज के साथ जिया जा सकता है, इसकी जिन्दा मिसाल थीं। वे समूह गीतों को खुद गाती थीं और संघर्ष में अपने साथियों में ऊर्जा का संचार करती थीं। उनकी भाषण देने की कला भी बांधने वाली थी। रूसी दाजी एवं डॉक्टर रोशनी दाजी उनके बेटे और बेटी थे जो उनके संघर्ष की राह में साथी, सहयोगी रहे। रूसी दाजी वकील और रोशनी दाजी रूस में पढी डाक्टर थीं और मजदूर बस्ती में वंचितों, मेहनतकशों के लिये दवाखाना चलाती थीं। दोनों ही जनवादी आंदोलन के सिपाही थे जो छोटी आयु में इस दुनिया से विदा हो गये। इतने भारी सदमे के बावजूद कामरेड पेरीन दाजी का एक नया जीवन-मूल्य हम सबने देखा। यह निजी और पारिवारिक क्षति उनके जीवन की ऊर्जा को समाप्त नहीं कर पाई। लगता था जैसे उनके मन एवं जीवन में निराशा या मोह जैसा कोई कोना ही न हो।

कामरेड होमी दाजी को जब पक्षाघात हुआ तो पेरीन दाजी (Perin Daji) का एक नया व्यक्तित्व हम सबने देखा। घर एवं बाहर जीवन के संघर्ष में भागीदारी करते हुए पेरीन दाजी ने अपने जीवन-साथी को कठिन समय में जिस तेजस्विता, निष्ठा और समर्पण के साथ संभाला वह उनकी जीवन निष्ठा की जिन्दा मिसाल है।

कामकाजी महिला होने से कामरेड पेरीन दाजी कामकाजी महिलाओं के सवालों को बखूबी समझती थीं। वे आजीवन महिला फेडरेशन की सक्रिय सदस्य एवं आदरणीय नेता रहीं। कामरेड पेरीन दाजी अध्ययनशील,सेवा-परायण, सर्वहारा की नेता और संस्कृतिकर्मी थीं। उन्होंने कभी अपनी चिन्ता नहीं की और लोगों की चिन्ताओं पर सक्रिय चिन्तन कर अपने सहकर्मियों, साथियों और संगठन के बलबूते समाधान करते रहने की आजीवन कोशिश की। कामरेड पेरीन दाजी हम सबके बीच से चली तो गयीं पर वे सब काम जो वे करती रहीं हम सबके लिये करने को बाकी हैं। निरंतर दूसरों की जिन्दगी को बेहतर बनाने के लिये जीते रहना यह कामरेड पेरीन दाजी का सक्रिय जीवन दर्शन था। इसे हम सब सक्रियता से जीते रहकर अपने एवं अपने काल के वंचितों के जीवन में रंग भरकर कामरेड पेरीन दाजी को निरंतर अपने व्यक्तित्व में जिन्दा रख सकते हैं। (सप्रेस)

श्री अनिल त्रिवेदी अभिभाषक,गांधीवादी विचारक एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं

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