250 किसान संगठनों ने किये जा रहे राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन तथा कोयला श्रमिकों की 2 से 4 जुलाई की हड़ताल का किया समर्थन

किसानों सम्बन्धी तीनों अध्यादेश ‘‘किसानों की लूट कारपोरेट को छूट’’ प्रदान करने वाला

किसानों के खिलाफ लाए गए तीनों अध्यादेश ‘‘किसानों की लूट कारपोरेट को छूट’’ प्रदान करने वाली नीति है। कृषि उपज, व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन व सुविधा अध्यादेश 2020), मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण समझौता अध्यादेश 2020), आवश्यक वस्तु (संशोधन अध्यादेश 2020) तथा साथ में बिजली कानून (संशोधन) विधेयक 2020) आदि अध्यादेशों को लाकर राज्यों के कृषि संबंधी अधिकार छीन लिए है तथा कृषि मार्केट कानून में भी बदलाव किए हैं। इनसे जमाखोरी व कालाबाजारी बढ़ेगी, फसल के दाम घटेंगे, सरकारी एमएसपी समाप्त हो जाएगा, बाजार में खाने के दाम बढ़ेंगे, किसानों की कर्जदारी तथा जमीन से बेदखली व आत्महत्याएं बढ़ेंगी।

ये बातें अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की वर्किंग कमेटी सदस्य एवं किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहीं है।

अ. भा. किसान संघर्ष समन्वय समिति ने डीजल पेट्रोल के दामों में बढती वृद्धि की निन्दा करते हुए कहा कि यह सरकारी टैक्स बढ़ाने की वजह से हुआ है। उन्‍होंने सरकार से मांग की कि टैक्स समाप्त कर ईधन के दाम तुरन्त घटाए जाएं। वहीं समिति ने 3 जुलाई को केंद्रीय श्रमिक संगठनों द्वारा किये जा रहे राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन तथा कोयला श्रमिकों की 2-3-4 जुलाई की हड़ताल का समर्थन किया है।

समिति ने श्रम कानूनों में किये जा रहे बदलावों, श्रमिकों के अधिकारों को निरस्त करने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की केंद्रीय श्रमिक संगठनों की मांग के समर्थन में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया गया है । समिति का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा लॉकडाउन का दुरुपयोग किसानों और मजदूरों के खिलाफ कानून बनाने और कारपोरेट पक्षधर नीतियां तेजी से लागू करने के लिए किया जा रहा है और केवल समाज को धर्म के आधार पर बाँटने और देश के संसाधन व बाजार बड़े विदेशी व घरेलू कारपोरेट को सौंपने का काम किया जा रहा है।

सरकारी घोषणाओं के बावजूद केंद्र सरकार ने अब तक श्रमिकों को तालाबंदी के दौरान मजदूरी का भुगतान नहीं कराया, छंटनी पर रोक नहीं लगाई, सभी मजूदरों को 10 हजार रुपए नगद प्रतिमाह हस्तांतरित नहीं किये गए है। वहीं 48 लाख केंद्रीय कर्मचारियों व 68 लाख पेंशनरों का महंगाई भत्ता भी फ्रीज कर दिया, कई राज्यों में काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 कर दिए। केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का थोक में विनिवेश और निजीकरण कर रही है, भारतीय रेलवे, रक्षा, बंदरगाह, डाक, कोयला, एयर इंडिया, बैंक और बीमा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में एफडीआई को अनुमति देकर देश के प्राकृतिक संसाधनों की लूट को सुगम बनाने हेतु कोविड -19 लॉकडाउन का इस्तेमाल कर रही है। 

समिति ने देश के सभी किसान संगठनों से स्थानीय स्तर पर 3 जुलाई को आयोजित राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध के कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की है।  उसने कोल उद्योगों के निजीकरण पर रोक लगाने व ठेका मजदूरों के हाई पावर कमेटी की सिफारिशों के आधार पर वेतन देने, राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता अनुसार आश्रितों को रोजगार देने को लेकर कोयला श्रमिकों की हड़ताल का भी समर्थन किया है।

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