लक्ष्मी आश्रम की गांधीवादी कर्मयोगिनी कांति भट्ट ‘ओदी’ नहीं रहीं

90 वर्ष की आयु में हृदयाघात से निधन, अंतिम समय तक आश्रम की जिम्मेदारियां निभाती रहीं

कौसानी, 4 जून। लक्ष्मी आश्रम, कौसानी (उत्‍तराखंड) की वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं गांधीवादी रचनात्मक परंपरा की महत्वपूर्ण हस्ती कांति भट्ट ‘ओदी’ का बुधवार को हृदयाघात के कारण निधन हो गया। वह 90 वर्ष की थीं। पिछले कुछ समय से वे वयोवृद्धता संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। उनके निधन से लक्ष्मी आश्रम परिवार तथा गांधीवादी कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है।

कांति भट्ट, लक्ष्मी आश्रम की वरिष्ठ मार्गदर्शक एवं पद्मश्री सम्मानित गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता राधा बहिन भट्ट की छोटी बहन थीं। आश्रम परिवार में वे स्नेहपूर्वक ‘ओदी’ नाम से जानी जाती थीं। गांधीजी के विचारों को अपने जीवन में पूरी तरह आत्मसात करने वाली ओदी ने सादगी, सेवा और श्रम को जीवन का आधार बनाया। उच्च आयु के बावजूद वे अंतिम समय तक आश्रम की दैनिक जिम्मेदारियों और गतिविधियों में सक्रिय रूप से योगदान देती रहीं।

उनकी अंतिम यात्रा गुरुवार को प्रातः 11 बजे लक्ष्मी आश्रम से सोमेश्वर घाट के लिए रवाना होगी।

आश्रम से लंबे समय तक जुड़े रहे सामाजिक कार्यकर्ता बसंत पांडे ने कहा कि ओदी उन विरल व्यक्तित्वों में थीं, जिन्हें गांधीजी की विचारधारा को निकट से देखने और उसे जीवन में उतारने का अवसर मिला। उन्होंने विनोबा भावे के भूदान आंदोलन और जयप्रकाश नारायण के सामाजिक सरोकारों के दौर को करीब से देखा तथा मानव सेवा को अपने जीवन का ध्येय बनाया। उन्होंने कहा कि गांधी के विचारों को जीने वाली ऐसी कर्मयोगिनी के निधन से समाज और आश्रम परिवार में अपूरणीय रिक्तता पैदा हुई है।

See also  कौसानी में गांधीवादी विचारकों और युवाओं का राष्ट्रीय शिविर 7 जून से

केंद्रीय गांधी स्मारक निधि के मंत्री संजय सिंह ने अपने शोक संदेश में कहा कि कांति दीदी केवल राधा भट्ट की बहन ही नहीं थीं, बल्कि स्वयं एक समर्पित गांधीवादी और रचनात्मक कार्यकर्ता थीं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन पर्वतीय समाज, विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, जल-संरक्षण, ग्राम स्वावलंबन तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित किया। वे बच्चों को गीत, संस्कार, कौशल, खेती-किसानी और श्रम के मूल्य सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर और संवेदनशील नागरिक बनाने का कार्य करती रहीं।

उन्होंने कहा कि कांति दीदी का सादगीपूर्ण जीवन, कर्मनिष्ठा और समाज के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उनके निधन से गांधीवादी और रचनात्मक कार्यों की दुनिया ने एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक, सेवाभावी कार्यकर्ता और कर्मयोगी को खो दिया है।

उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी की शिष्या सरला बहन द्वारा स्थापित लक्ष्मी आश्रम पिछले सात दशकों से अधिक समय से उत्तराखंड में बालिका शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, ग्राम स्वराज, पर्यावरण संरक्षण और गांधीवादी रचनात्मक कार्यों का प्रमुख केंद्र रहा है। कांति भट्ट ने भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपना पूरा जीवन समाज सेवा और आश्रम के कार्यों के लिए समर्पित किया।

Table of Contents

नीले धुएँ की धरती : ‘ग्रेट स्मोकी माउंटेन्स’

समाज और सरकार चाहे तो पर्यावरण को पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसका एक बेहतरीन उदाहरण अमरीका के टेनेसी और नार्थ कैरोलीना राज्यों की सीमाओं से लगा ‘ग्रेट स्मोकी माउंटेन्स’ है। करीब सौ साल पहले कानून बनाकर प्रकृति को उसके

Read More »

पर्यावरण संरक्षण : केवल पौधारोपण नहीं, जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी

विश्व पर्यावरण दिवस केवल पौधे लगाने का संदेश नहीं देता, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने का आह्वान करता है। जल संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग, प्रदूषण नियंत्रण, जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपभोग जैसे छोटे-छोटे प्रयास

Read More »

World Environment Day : पर्यावरण संरक्षण पर टिका है भविष्य

पर्यावरण संरक्षण और संतुलन का प्रश्न आज पूरी मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन ने पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित

Read More »