राष्ट्रीय युवा संगठन के 30वें राष्ट्रीय शिविर का शुभारंभ
कटक, 1 जून। राष्ट्रीय युवा संगठन का 30वां राष्ट्रीय शिविर रविवार को कटक स्थित न्यू स्टुअर्ट स्कूल परिसर में जन आंदोलनों की प्रख्यात नेत्री मेधा पाटकर के उद्घाटन के साथ शुरू हुआ। देश के 18 राज्यों से आए युवा प्रतिभागियों की उपस्थिति में शुरू हुए इस सात दिवसीय शिविर में लोकतंत्र, संविधान, पर्यावरण, सामाजिक न्याय और गांधीवादी मूल्यों पर व्यापक विमर्श होगा। शिविर 7 जून तक चलेगा।
उद्घाटन अवसर पर मेधा पाटकर ने कहा कि आज के समय में जब समाज का एक बड़ा हिस्सा तथाकथित “व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी” से प्रभावित होकर सूचनाओं और विचारों को ग्रहण कर रहा है, तब इस प्रकार के वैचारिक और संवादात्मक युवा शिविरों का महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि देश में विचारधारा आधारित राजनीति लगातार कमजोर हुई है और राजनीतिक दल सिद्धांतों की बजाय अवसरवाद की दिशा में बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
मेधा पाटकर ने ओडिशा में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और कॉरपोरेट हस्तक्षेप पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में खनन और औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर जल, जंगल और जमीन पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने सिजिमाली पर्वत क्षेत्र के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के लोग अपने संसाधनों और जीवनाधार की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वेदांता जैसी कंपनियों के बाद अब अडानी समूह भी इस क्षेत्र में हिस्सेदारी चाहता है। कृषि भूमि, आवासीय क्षेत्रों और जंगलों पर बढ़ते अतिक्रमण के कारण स्थानीय समुदायों का अस्तित्व संकट में पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर गांवों और समुदायों को विस्थापित करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। सरकारें कई बार लोगों से संवाद करने की बजाय उन पर निर्णय थोपने का प्रयास करती हैं। ऐसे समय में युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों और जन आंदोलनों की विरासत को समझने की आवश्यकता है।
शिविर के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय युवा संगठन के संस्थापक एवं गांधी शांति प्रतिष्ठान के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने कहा कि अहिंसा केवल एक विचार नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में साहसपूर्वक खड़े रहने की क्षमता का नाम है।

कुमार प्रशांत ने कहा कि हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराए जाने के बाद महात्मा गांधी से पूछे गए प्रश्न का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधीजी ने तब कहा था कि विनाश का सामना दो तरीकों से किया जा सकता है—डरकर मरना या निर्भीक होकर मृत्यु की आंखों में आंखें डालकर उसका सामना करना। यही साहस अहिंसा का वास्तविक स्वरूप है।
कुमार प्रशांत ने समकालीन वैश्विक परिस्थितियों का संदर्भ देते हुए कहा कि जब शक्तिशाली राष्ट्र किसी देश को नष्ट करने की धमकी देते हैं, तब जनता का साहस ही लोकतंत्र और स्वतंत्रता की सबसे बड़ी ताकत बनता है। उन्होंने कहा कि अहिंसक क्रांति का अर्थ केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि मूल्यों का परिवर्तन है।
संविधान और लोकतंत्र के सवाल पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि संविधान केवल पुस्तकालयों में रखी किताब नहीं है। जब तक उसके मूल्यों को समाज और जनता अपने जीवन में नहीं उतारते, तब तक उसकी वास्तविक शक्ति प्रकट नहीं होती। उन्होंने कहा, “संविधान की किताब बंद पड़ी रहे तो उसका कोई अर्थ नहीं है। संविधान की ताकत सड़कों पर उतरने से, जनता के सक्रिय हस्तक्षेप से और लोकतांत्रिक भागीदारी से पैदा होती है।”
उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज की चुनौतियों का सामना करते समय डरने, विचलित होने या पथभ्रष्ट होने की जरूरत नहीं है। यह नए प्रकार का संघर्ष है, जिसमें नैतिक शक्ति और सामाजिक प्रतिबद्धता सबसे महत्वपूर्ण हैं।
राष्ट्रीय युवा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूर्य नारायण नाथ की अध्यक्षता में आयोजित उद्घाटन समारोह में दैनिक समाज के प्रकाशक राजेंद्र जेना, वरिष्ठ गांधीवादी कृष्णा महंती, लोक शक्ति अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रफुल्ल सामंतरा, उत्कल गांधी स्मारक निधि के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सत्य राय, वरिष्ठ चिंतक जयंत कुमार दास, गांधी शांति प्रतिष्ठान के सभापति मनोरंजन महंती, संगठन सचिव हरिहर सेन, उत्कल सर्वोदय मंडल के महासचिव आर्यभट्ट महंती, समाजसेवी किशोर जेना, कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट की गायत्री दास तथा बाजी राउत छात्रावास के सभापति अंतर्यामी बड़ाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मेधा पाटकर द्वारा पौधों को जल अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर सिजिमाली आंदोलन से जुड़े युवा कार्यकर्ता लक्ष्मण नायक और मिथुन नायक को उनके संघर्ष और योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय युवा संगठन के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक डॉ. विश्वजीत ने युद्ध, अस्थिरता और बढ़ते स्वार्थ के दौर में संगठन की वैश्विक दृष्टि और युवाओं की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में संवाद, सहअस्तित्व और मानवीय मूल्यों को केंद्र में रखने की आवश्यकता है।
उद्घाटन समारोह का संचालन महाराष्ट्र की प्रेरणा राउत ने किया, जबकि उत्कल सर्वोदय मंडल के सभापति मिहिर प्रताप दास ने आभार व्यक्त किया। देश के विभिन्न राज्यों से आए युवा प्रतिभागी आगामी सात दिनों तक संवाद, अध्ययन, प्रशिक्षण, समूह चर्चा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विविध विषयों पर आयोजित सत्रों में भाग लेंगे। आयोजकों के अनुसार शिविर का उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक चेतना, सामाजिक जिम्मेदारी और गांधीवादी मूल्यों के प्रति समझ विकसित करना है।


