Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों की जीवंत प्रतीक थीं कृष्णा रावल

शहर की सामाजिक व रचनात्‍मक संस्‍थाओं द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयेाजन

इंदौर, 1 जून। सादगी, करुणा, सहिष्णुता और सामाजिक प्रतिबद्धता की मिसाल रहीं श्रीमती कृष्णा रावल (90 वर्ष) को रविवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शहर के प्रबुद्धजनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और उनके आत्मीयजनों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि कृष्णा रावल ने कभी स्वयं को केंद्र में नहीं रखा, लेकिन वे हमेशा संघर्षरत लोगों, सामाजिक आंदोलनों और मानवीय सरोकारों के साथ मजबूती से खड़ी रहीं।

श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता समाजवादी नेता एवं राममनोहर लोहिया सामाजिक समिति के अध्यक्ष रामबाबू अग्रवाल ने की। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीवान (भोपाल), पुत्र असीम रावल (अमेरिका), भतीजे मिलिंद रावल सहित अनेक सामाजिक और वैचारिक जगत से जुड़े लोग उपस्थित थे।

सभा का आयोजन सर्वोदय प्रेस सर्विस, गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र, इंदौर समर्थक समूह, राममनोहर लोहिया सामाजिक समिति, लोहिया विचार मंच, कल्याण जैन पुस्तकालय तथा अन्य सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

वक्ताओं ने कहा कि स्व. ओमप्रकाश रावल मध्यप्रदेश की राजनीति में समाजवादी विचारधारा के महत्वपूर्ण स्तंभ थे। शिक्षा मंत्री के रूप में उनकी पहचान रही, लेकिन उससे भी बड़ी पहचान जनपक्षधर राजनीति की थी। ऐसे व्यक्तित्व के साथ जीवन बिताते हुए कृष्णा रावल स्वयं भी सामाजिक सरोकारों की यात्रा का अभिन्न हिस्सा बन गई थीं। नर्मदा घाटी के प्रश्न हों, विस्थापन का दर्द, जल-जंगल-जमीन की लड़ाई या सामाजिक न्याय और समानता के मुद्दे वे हमेशा इन संघर्षों के साथ खड़ी दिखाई देती थीं।

सर्वोदय प्रेस सर्विस से जुड़े कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जो चुपचाप लोगों के जीवन में प्रेम, सहारा और विश्वास की तरह उपस्थित रहते हैं। कृष्णा रावल ऐसा ही विरल व्यक्तित्व थीं। उनके निधन से जहां परिवार ने अपनी मां और अभिभावक को खोया है, वहीं सामाजिक आंदोलनों ने अपनी आत्मीय संरक्षक, शिक्षा जगत ने एक समर्पित शिक्षिका और जन आंदोलनों ने अपनी प्रिय “कृष्णा मौसी” को खो दिया है।

वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीवान ने रावल परिवार से जुड़े अपने अनेक संस्मरण साझा करते हुए कहा कि कृष्णा रावल और ओमप्रकाश रावल ने जीवनभर मूल्यों के साथ कोई समझौता नहीं किया। उन्होंने जिन मानवीय और सामाजिक मूल्यों को स्वीकार किया, उन पर पूरी निष्ठा और दृढ़ता के साथ कायम रहे। यही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।

एकलव्य संस्था के पूर्व निदेशक अरविंद सरदाना (देवास) ने कहा कि कृष्णा रावल का व्यक्तित्व सहज और प्रेरणादायी था। वे हमेशा लोगों को सामाजिक कार्यों और जनहित के प्रयासों से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करती थीं।

शोभा शिंदे ने कहा कि कृष्णा जी से मिलने वाला अपनापन और स्नेह कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनका विश्वास, प्रेम और आत्मीय व्यवहार हर मिलने वाले को अपनेपन का एहसास कराता था।

सारिका श्रीवास्तव ने कहा कि कृष्णा जी हर व्यक्ति के साथ आत्मीय संबंध बनाती थीं। लोगों को सम्मान देना और उन्हें अपना महसूस कराना उनके स्वभाव की विशेषता थी।

प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव विनीत तिवारी ने कहा कि 1990 का दशक इंदौर में जन आंदोलनों के उभार का दौर था। उस समय नर्मदा बचाओ आंदोलन, खेत मजदूर चेतना संगठन, आदिवासी मुक्ति संगठन सहित कई महत्वपूर्ण जन आंदोलनों को रावल परिवार का निरंतर सहयोग और समर्थन मिलता रहा। कृष्णा रावल इन सभी प्रयासों की एक मजबूत नैतिक शक्ति और संबल थीं।

सभा की अध्‍यक्षता करते हुए राम मनोहर लोहिया सामाजिक समिति के अध्‍यक्ष रामबाबू अग्रवाल रावल दंपति के साथ निभाये वर्षों क अनुभवों को साझा किया। कृष्‍णाजी शासकीय स्‍कूल में शिक्षिका, प्राचार्य के पद पर रहते हुए भी बेबाकी से सामाजिक व जन आंदोलनों में सहभागी होती रही। उन्‍होंने रावलजी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयेाग किया और वे ममतामयी मां के रूप में सदैव याद रखी जाएगी।

इस अवसर पर शशिकांत गुप्ते, प्रमोद बागड़ी, डॉ. सम्यक जैन, रूपल अजबे, अनु गुप्ता, डॉ. हिमांशु ठक्कर सहित अन्य वक्ताओं ने अपने संस्मरण साझा करते हुए कृष्णा रावल के सामाजिक योगदान, सादगी, मातृत्व भाव और मानवीय मूल्यों को स्मरण करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन रामस्वरूप मंत्री ने किया तथा अंत में आभार प्रदर्शन कुमार सिद्धार्थ ने किया।

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