व्यावसायिक एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य अभियान को देश भर में समर्थन
08 अप्रैल। जन स्वास्थ्य अभियान भारत (जेएसएआई) ने अपने राज्य इकाइयों और संबद्ध संगठनों के साथ मिलकर 1 से 7 अप्रैल तक व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर एक सप्ताह राष्ट्रीय अभियान सफलतापूर्वक सम्पन्न किया, जो विश्व स्वास्थ्य दिवस के संदर्भ में आयोजित किया गया था। इस अभियान के दौरान 16 राज्यों में जागरूकता बैठक और परामर्श कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के नागरिकों ने भाग लिया। कुल 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश) से भागीदारी रही। जिसमें 2000 से अधिक श्रमिकों, नागरिकों, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के सदस्यों ने हस्ताक्षर कर व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर चार्टर ऑफ डिमांड्स का समर्थन किया। सभी ने मिलकर भारत में बढ़ते व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य संकट पर चर्चा की और सामूहिक रूप से इस चार्टर का अनुमोदन किया, जिसे भारत के माननीय राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को प्रस्तुत किया गया है।
इस अभियान में यह रेखांकित किया गया कि व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य एक गंभीर और बढ़ती हुई जन स्वास्थ्य चुनौती है, जिसके समाधान के लिए स्वास्थ्य, श्रम, पर्यावरण, उद्योग और खनन सहित विभिन्न क्षेत्रों में त्वरित और समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।
वायु, जल और मिट्टी प्रदूषण के बढ़ते स्तर, जो श्वसन रोगों, व्यावसायिक बीमारियों और समय पूर्व मृत्यु का कारण बन रहे हैं। विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए व्यावसायिक स्वास्थ्य सुरक्षा का अभाव। सिलिकोसिस, एस्बेस्टोसिस और रासायनिक संपर्क जैसी व्यावसायिक बीमारियों का व्यापक रूप से कम निदान और कम रिपोर्टिंग होता है। श्रमिकों, महिलाओं और बच्चों सहित कमजोर वर्गों पर असमान रूप से अधिक प्रभावित होते हू। मौजूदा कानूनों और नीतियों के क्रियान्वयन और निगरानी में कमी भी प्रमुख कारण है।
जन स्वास्थ्य अभियान भारत (जेएसएआई) ने केंद्र सरकार से अपनी मांगों पर तत्काल कार्रवाई की अपील की है। इन मांगों में स्वच्छ वायु, जल और मिट्टी के साथ सुरक्षित पर्यावरण को जन स्वास्थ्य प्राथमिकता बनाया जाए। सभी के लिए सुरक्षित पेयजल की सार्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। सभी श्रमिकों, विशेषकर असंगठित क्षेत्र के लिए, व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा की गारंटी दी जाए।
यह भी मांग की गई कि निगरानी, रोकथाम, उपचार और मुआवजा तंत्र सहित व्यावसायिक स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम स्थापित किया जाए। सभी विकास परियोजनाओं के लिए स्वास्थ्य प्रभाव आकलन अनिवार्य किया जाए। जलवायु परिवर्तन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों का समाधान किया जाए और सतत विकास को बढ़ावा दिया जाए।
मांग में पर्यावरण से जुड़े एस्बेस्टोस जैसे खतरनाक पदार्थों पर प्रतिबंध लगाने और विषैले रसायनों को नियंत्रित करने की भी मांग की है। नीतिगत और कानूनी ढांचे को मजबूत किया जाए, जिसमें अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन कन्वेंशन 155 का अनुमोदन शामिल हो।
परामर्श बैठकों में इस बात पर जोर दिया गया कि यह किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए बहु-मंत्रालयी समन्वय और जवाबदेही आवश्यक है।
जन स्वास्थ्य अभियान भारत ने सरकार से आग्रह किया है कि वह चार्टर ऑफ डिमांड्स पर तत्काल कार्रवाई करे, पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए और प्रभावी क्रियान्वयन तंत्र सुनिश्चित करे, ताकि लाखों श्रमिकों और नागरिकों के स्वास्थ्य और आजीविका की रक्षा की जा सके।
उक्त जानकारी संयोजक और सचिवालय टीम के चंद्रकांत यादव, राही रियाज, महजबीन भट, गौरंगा महापात्रा, संजीव सिन्हा, पुनिता कुमार, दीपमाला पटेल, मित्र रंजन, अमूल्य निधि ने दी।


