भोपाल 6 अप्रैल।स्वास्थ्य अधिकार मंच ने भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव को पत्र लिखकर HPV टीकाकरण अभियान से जुड़ी गंभीर जन-चिंताओं को उठाया है। उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी 2026 से देशभर में 14 वर्ष की किशोरियों को लक्षित करते हुए चलाया जा रहा यह अभियान कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।
मंच से जुडे अमूल्य निधि, सोहन लाल और प्रदीप गहलोत ने बताया कि इस अभियान के तहत ‘गार्डासिल’ (Gardasil) नामक क्वाड्रिवैलेंट वैक्सीन दी जा रही है, जिसका उद्देश्य सर्वाइकल कैंसर के कुछ प्रकारों से सुरक्षा प्रदान करना है। हालांकि, पूर्व में HPV वैक्सीन परीक्षणों में गंभीर अनियमितताओं, कर्तव्य में लापरवाही और सूचित सहमति (informed consent) के उल्लंघन के मामले सामने आ चुके हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2013 की 72वीं संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट में PATH संस्था द्वारा आंध्र प्रदेश और गुजरात में लगभग 25,000 वंचित एवं नाबालिग लड़कियों पर किए गए परीक्षणों में “धोखाधड़ी” जैसे गंभीर आरोप दर्ज किए गए थे। यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है।
मंच ने मांग की है कि वर्तमान ‘अभियान-शैली’ के टीकाकरण कार्यक्रम को औपचारिक रूप से ‘चौथे चरण के क्लिनिकल परीक्षण’ के रूप में मान्यता दी जाए और इससे जुड़े सभी नियमों व दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि जिन किशोरियों का टीकाकरण पहले ही हो चुका है, उनके अभिभावकों से दोबारा संपर्क कर उन्हें सहमति पत्र की प्रति उपलब्ध कराई जाए और एक अतिरिक्त ‘सूचित सहमति’ भी ली जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इन मांगों की समुचित समीक्षा और क्रियान्वयन नहीं हो जाता, तब तक इस टीकाकरण अभियान को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाना चाहिए।


