रूस के चित्रकार ने गांधीजी पर आधारित अद्वितीय 7000 दुर्लभ छवियों की कलाकृति कोलाज भारत को अर्पित की

नई दिल्ली, 26 सितंबर। महात्‍मा गांधीजी के जीवन से जुड़ी लगभग 7000 दुर्लभ छवियों को एक वर्ष की कठिन साधना से कोलाज कला के रूप में साकार करने वाले रूस के प्रख्यात चित्रकार इगोर अनातोलेविच प्शेनित्सिन (निझ्नी नोवगोरोद) Igor Anatolievich Pshenitsyn (Nizhny Novgorod) ने अपनी अनुपम कृति collage artwork आज भारत की जनता को समर्पित की।

समकालीन कलाकार इगोर अनातोलेविच प्शेनित्सिन रूसी कला जगत में अपनी अनूठी पहचान के लिए जाने जाते हैं। वे FrameUniteArt तकनीक के संस्थापक हैं, जिसमें छोटे चित्र और ऐतिहासिक फ़ोटोग्राफ़ मिलकर एक बड़ा और जटिल मोज़ाइक चित्र बनाते हैं। इगोर अनातोलेविच प्शेनित्सिन की कला न केवल दृष्टिगत रूप से आकर्षक होती है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कथाओं को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है। उन्होंने अनेक अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शिनयों में रूस का प्रतिनिधित्व किया है और उनकी रचनाएँ यूरोप व एशिया के कई देशों की दीर्घाओं में सुरक्षित हैं।

उनकी सबसे चर्चित कृति महात्मा गांधी का मोज़ाइक पोर्ट्रेट है, जो उनकी अब तक की सबसे श्रमसाध्य और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण कृति मानी जा रही है। उन्होंने आज दिल्ली स्थित गांधी संग्रहालय को भेंट किया। यह पोर्ट्रेट हजारों छोटे चित्रों और फ़ोटोग्राफ़्स से निर्मित है, जो गांधी जी के जीवन और उनके योगदान की कहानी को दर्शाता है। उनके कार्यों में सांस्कृतिक संवेदनशीलता, ऐतिहासिक जागरूकता और तकनीकी कौशल का अनूठा मिश्रण मिलता है।

यह विशिष्ट कला-कृति राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय, नई दिल्ली को, मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के जे.एन.सी.सी. की पूर्व निदेशक डॉ. उषा आर.के. के माध्यम से भेंट की गई। इस अवसर पर डॉ. एलेना रेमिज़ोवा, रूस विज्ञान एवं संस्कृति केंद्र की प्रमुख, विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम में अतिथि के रूप में डॉ. सुधाकर शर्मा, पूर्व सचिव, ललित कला अकादमी ने शिरकत की। संग्रहालय की निदेशक श्रीमती ए. अन्नामलाई ने इस अनमोल उपहार को गहन आभार और विनम्रता सहित स्वीकार किया। इस मौके पर गांधी स्‍मारक निधि के मंत्री संजय सिंह भी मौजूद थे और उन्‍होंने कथक नृत्यांगना रेवा और गौरवाणी एवं अतिथियों  का अभिनंदन किया।

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कार्यक्रम के दौरान कथक नृत्यांगना रेवा और गौरवाणी ने “रघुपति राघव राजा राम” की धुन पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसने वातावरण को आध्यात्मिकता और संवेदनाओं से भर दिया। यह अद्वितीय कलात्मक भेंट न केवल गांधीजी के जीवन-दर्शन की स्मृति को जीवंत करती है, बल्कि भारत और रूस के बीच गांधी–टॉल्स्टॉय की वैचारिक साझेदारी और ऐतिहासिक मैत्री को भी नए आयाम प्रदान करती है।

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