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पंचायत के विकास के बगैर समग्र भारत का विकास नहीं हो सकता

पंचायत के विकास के बगैर समग्र भारत का विकास नहीं हो सकता

केरल के पुलिस महानिदेशक संजीव पतजोशी बोल – हमें शहरी क्षेत्र की सभी सुविधाएं ग्रामीण क्षेत्र में भी उपलब्ध कराना होगी इंदौर, 15 मई। केरल के पुलिस महानिदेशक संजीव पतजोशी ने कहा है कि पंचायत क्षेत्र का विकास किए बगैर...

केरल के पुलिस महानिदेशक संजीव पतजोशी बोल – हमें शहरी क्षेत्र की सभी सुविधाएं ग्रामीण क्षेत्र में भी उपलब्ध कराना होगी

इंदौर, 15 मई। केरल के पुलिस महानिदेशक संजीव पतजोशी ने कहा है कि पंचायत क्षेत्र का विकास किए बगैर हम समग्र भारत के विकास की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। शहरी क्षेत्र में हमारे देश में जो साधन और सुविधाएं उपलब्ध है वह सभी हमें ग्रामीण क्षेत्र में भी उपलब्ध कराना होगी।

वे आज शाम यहां जाल सभागृह में अभ्यास मंडल की 64वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारत के दूरगामी विकास में पंचायत की भूमिका विषय पर संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदौर के एसीपी अमित सिंह ने की।

उन्होंने कहा कि बचपन में हम गांव में रहते थे और वहां पर खेत भी जाते थे। पशु भी चराते थे और किस तरह से गाय का दूध आता है वह सारी स्थिति भी देखते थे। शाम के समय पर गांव में बिजली नहीं होती थी तो ऐसे में जल्दी घर में खाना बन जाता था और जल्दी ही खाना खाकर हमें सोना भी पड़ता था। इस स्थिति से आज की पीढ़ी वाकिफ नहीं है। हमारे देश में पंचायत का महत्व पुराने समय से ही बहुत ज्यादा रहा है। हरियाणा की खाप पंचायत हो या फिर बिहार की कुछ पंचायतें हो, उनके नाम सभी सुनते रहते हैं। आज स्थिति यह हो रही है कि गांव के लोग शहर की तरफ आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हमें कठिन समस्या को पहले हल करना चाहिए लेकिन होता यह है कि हम आसान समस्या को पहले हल करने लग जाते हैं और कठिन समस्या को लंबित रख देते हैं। पंचायत को सरकार की ओर से इतना पैसा नहीं मिलता है कि वह अपने गांव में पक्की और अच्छी सड़क भी बना सके। जब प्रधानमंत्री आवास योजना को तैयार किया जा रहा था तो उस समय यह प्रावधान किया गया था कि गरीबों के लिए जो एक यूनिट बनकर तैयार होगा उसकी लागत 6 लाख रुपए होगी। यह प्रस्ताव जब वित्त मंत्रालय के पास गया तो उन्होंने इतने ज्यादा खर्च पर आपत्ति ली और उस यूनिट की कीमत को घटाकर 1.5 लाख रुपए कर दिया। अब इतने कम पैसे में आवास के लिए कैसा यूनिट बनेगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। यही कारण है कि आज इस योजना के तहत बने हुए आवास लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी साबित नहीं हो रहे हैं।

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पतजोशी ने कहा कि हमारे देश में 6 लाख गांव हैं और 2.5 लाख पंचायत हैं। पंचायत क्षेत्र में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की व्यवस्था की गई है। इस समय हमारे देश में पंचायत में 47% पदों पर महिलाएं हैं। इसके साथ में यह एक बुराई भी जुड़ गई है कि चुनाव लड़कर महिला जीत जाती है और काम सारा उसका पति संभालता है। इसके चलते हुए गांव में सरपंच पति के रूप में एक नया शक्ति केंद्र नजर आता है।

उन्होंने कहा कि पंचायत में होने वाले भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए सरकार के द्वारा बड़े कदम उठाए गए हैं। पंचायत के खाते से नकद राशि का आहरण और चेक जारी करने का काम पूरी तरह से रोक दिया गया है। अब पंचायत से सारा पैसा ऑनलाइन ही ट्रांसफर होता है। पंचायत के पास भी सरकार की ओर से पैसा डिजिटल ही आता है। इसके साथ ही पंचायत में जहां भी जो कुछ विकास कार्य हो रहा है उसके लिए जिओ ट्रैकिंग का सिस्टम लागू कर दिया गया है। इस तरह से गांव की व्यवस्था को बेहतर बनाने का काम किया गया है। राजस्व के संग्रहण के लिए पंचायत के पास संपत्ति कर और मनोरंजन कर के रूप में दो ही साधन है। इससे भी पंचायत को कोई ज्यादा राजस्व अर्जित नहीं होता है। हमें यदि अपने देश में समग्र विकास की धारणा को क्रियान्वित करना है तो पंचायत के विकास के बगैर यह संभव नहीं है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदौर के एसीपी अमित सिंह ने की। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति से आशय गांव में रहने वाले उस व्यक्ति से है जिसके पास तक साधन और सुविधा की अप्रोच नहीं है। हमें ऐसे व्यक्ति की समस्याओं का समाधान कर उस तक सुविधा पहुंचना है।

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कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत अशोक मित्तल, आरके जैन, संजय मोगरा, श्रद्धा जैन, ओपी जोशी और श्रवण गुप्ता ने किया। कार्यक्रम का संचालन वैशाली खरे ने किया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह सुनील मोहता और सीए राजेंद्र गोयल ने भेंट किए। कार्यक्रम के अंत में श्याम सुंदर यादव ने आभार प्रदर्शन किया।

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